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अंतरराज्यीय शैक्षणिक भ्रमण : कृषि छात्रों ने अराकू घाटी में किया कॉफी, काली मिर्च, ड्रैगन फ्रूट एवं बहिस्तरीय खेती का प्रत्यक्ष अध्ययन

बैरिस्टर ठाकुर छेदीलाल कृषि महाविद्यालय, बिलासपुर की अभिनव पहल

बिलासपुर, 27 जून 2025 — कृषि शिक्षा को व्यवहारिक, प्रायोगिक और अनुभवात्मक स्वरूप प्रदान करने की दिशा में एक अभिनव कदम उठाते हुए, बैरिस्टर ठाकुर छेदीलाल कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, बिलासपुर तथा कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, लोरमी-मुंगेली के संयुक्त तत्वावधान में बी.एससी. (कृषि) तृतीय वर्ष के 47 छात्र-छात्राओं का एक अंतरराज्यीय शैक्षणिक भ्रमण आयोजित किया गया है। यह भ्रमण पाठ्यक्रम AHPD-5321 के अंतर्गत संचालित हो रहा है।

विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करने हेतु भ्रमण दल में डॉ. अर्चना केरकेट्टा, डॉ. (ले.) रोशन परिहार तथा डॉ. यशपाल सिंह निराला उपस्थित हैं।

भ्रमण का पांचवां पड़ाव – अराकू घाटी (विशाखापट्टनम, आंध्र प्रदेश)

27 जून 2025 को भ्रमण के पांचवें चरण में छात्र-छात्राओं ने विशाखापट्टनम जिले की प्रसिद्ध अराकू घाटी का दौरा किया। यह क्षेत्र अपने उत्कृष्ट जलवायु, प्राकृतिक सौंदर्य और टिकाऊ कृषि पद्धतियों के लिए प्रसिद्ध है।

विद्यार्थियों ने यहाँ कॉफी बागानों, काली मिर्च की बेलों (जो सिल्वर ओक वृक्षों पर उगाई जाती है), तथा ड्रैगन फ्रूट की व्यवस्थित खेती का प्रत्यक्ष अवलोकन किया। विशेष आकर्षण रहा मल्टी स्टोरी (बहिस्तरीय) खेती प्रणाली, जिसमें विभिन्न ऊँचाई की फसलें एक साथ एक ही क्षेत्र में उगाई जाती हैं— जैसे कि:

  • नीचे स्तर: ड्रैगन फ्रूट व अन्य रेंगने वाली फसलें
  • मध्य स्तर: काली मिर्च की बेलें
  • ऊपरी स्तर: कॉफी पौधे व छायादार वृक्ष (जैसे सिल्वर ओक)

इस बहिस्तरीय प्रणाली से भूमि का अधिकतम उपयोग, जल संरक्षण, पोषक तत्वों का कुशल प्रबंधन, तथा पर्यावरणीय संतुलन सुनिश्चित होता है।

स्थानीय विशेषज्ञों से संवाद एवं तकनीकी जानकारी

छात्रों ने स्थानीय जनजातीय कृषकों और कृषि विशेषज्ञों के साथ संवाद कर:

  • भूमि की ढलान के अनुसार फसल चयन
  • प्राकृतिक कीट एवं रोग प्रबंधन तकनीकें
  • जैविक खेती की विधियाँ
  • स्थानीय विपणन एवं मूल्य वर्धन रणनीतियाँ जैसे विषयों पर महत्वपूर्ण जानकारियाँ प्राप्त कीं।

विशेष रूप से कॉफी की प्रसंस्करण इकाई का निरीक्षण करते हुए छात्रों ने उत्पादन से लेकर उत्पाद विपणन तक की पूरी मूल्य श्रृंखला का व्यावहारिक ज्ञान अर्जित किया।

व्यवहारिक ज्ञान की ओर एक सार्थक कदम

यह शैक्षणिक भ्रमण छात्रों को एकीकृत कृषि प्रणाली, सतत कृषि विकास, एवं कृषि उद्यमिता की दिशा में सशक्त कर रहा है। छात्रों ने अनुभव किया कि कैसे अराकू घाटी के जनजातीय किसान आधुनिक और पारंपरिक तकनीकों का समावेश करते हुए आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर हैं।

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