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अंतिम तारीख में भी नहीं मिला पीड़ित को फर्जी जाति का नकल….फर्जी जाति प्रकरण का मामला

जाति बदलकर अनुसूचित जनजाति प्रमाण पत्र लेने का आरोप

कलेक्टर जनदर्शन में शिकायत, जांच की मांग

पीड़ित पहुंचा एसडीएम ऑफिस लेकिन आरोपी नहीं पहुंची

बिलासपुर। जाति बदलकर अनुसूचित जनजाति का प्रमाण पत्र हासिल करने का गंभीर मामला सामने आया है।जिसमें जांच के नाम पर खेल खेला जा रहा है।पीड़ित ने शिकायत करते हुए गंभीर आरोप लगाया है आरोप है कि ऑफिस से प्रकरण ही गायब कर दिया गया है।जिसमें पूरी तरह
फर्जी जाति का प्रमाण है।यही कारण है कि नकल नहीं दिया जा रहा है।बल्कि घुमाया जा रहा है।

दरअसल जिले में फर्जी जाति का मामला
आने के बाद हड़कंप मचा हुआ है।इसके लिए प्रार्थी पूजा कुशवाहा ने कलेक्टर से लेकर एसडीएम ऑफिस तक शिकायत कर चुकी है।इसके बाद भी जिला प्रशासन ने इसे गंभीरता से नहीं लिया है।बल्कि दिनों दिन घुमाया जा रहा है।
आलम ये हो चुका है
की अब खुद पीड़ित को लगने लगा है कि कही वही तो फर्जी नहीं है।और उसे खुद दूसरे के झूठ को सच साबित करने के लिए
मशक्कत करना पड़ रहा है।

बता दे शिकायतकर्ता पूजा कुशवाहा ने आरोपों की पुष्टि के लिए कमला सिंह के स्कूली दस्तावेज भी प्रस्तुत किए हैं।
शिकायत में पूजा ने आरोप लगाया है कि कमला सिंह पिता तिरथराम, निवासी नवांगांव, तहसील कोटा बिलासपुर ने वर्ष 2008 में कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर अनुसूचित जनजाति गोड़ जाति का स्थायी प्रमाण पत्र प्राप्त किया है। शिकायत के अनुसार कोटा एसडीएम के 5 फरवरी 2008 को जारी जाति प्रमाण पत्र संदेहास्पद है और इसकी विस्तृत जांच आवश्यक है।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि उपलब्ध शैक्षणिक अभिलेखों में कमला सिंह की जाति सतनामी दर्ज है, जिससे जाति परिवर्तन कर अनुसूचित जनजाति का प्रमाण पत्र लेने की आशंका मजबूत होती है।

प्राथमिक शाला के रिकॉर्ड में सतनामी जाति दर्ज

शिकायत में संलग्न दस्तावेजों के अनुसार कमला बाई पिता तिरथराम की प्राथमिक शिक्षा शासकीय कन्या प्राथमिक शाला मोगरा, तहसील कटघोरा में सत्र 1979-80 में हुई थी। विद्यालय के दाखिल-खारिज प्रमाण पत्र में जन्म तिथि 1 जुलाई 1972 तथा जाति सतनामी दर्ज बताई गई है। संबंधित दस्तावेज का क्रमांक 337 5 जुलाई 1979 बताया गया है।

मिडिल स्कूल और हाईस्कूल रिकॉर्ड में भी सतनामी

शासकीय कन्या मिडिल स्कूल मोगरा में कक्षा 8वीं के अभिलेखों में भी जाति सतनामी अंकित होने का दावा किया गया है। इसके बाद कक्षा 9वीं में प्रवेश के लिए सरस्वती उच्चतर माध्यमिक शाला बाकीमोगरा में प्रस्तुत आवेदन पत्र में पिता तिरथराम के हस्ताक्षर के साथ जाति सतनामी एवं वर्ग हरिजन दर्ज बताया गया है।शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि स्थानांतरण प्रमाण पत्र, दाखिल-खारिज रिकॉर्ड तथा हाईस्कूल परीक्षा वर्ष 1989 की अंकसूची में भी उक्त विवरण दर्ज है। हाईस्कूल परीक्षा का रोल नंबर 814280 तथा अंकसूची क्रमांक 198336 बताया गया है।

हायर सेकेंडरी में नाम और जाति में बदलाव का आरोप

शिकायत के अनुसार कक्षा 12वीं की पढ़ाई देवकीनंदन कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बिलासपुर से वर्ष 1993 में हुई, जहां अंकसूची में कमला बाई के स्थान पर कमला पटेल तथा पिता का नाम तिरथराम पटेल अंकित बताया गया है। इससे दस्तावेजों में नाम और जाति बदलने की आशंका जताई गई है।

2008 में गोड़ जाति का प्रमाण पत्र जारी

शिकायत के अनुसार वर्ष 2007-08 में राजस्व प्रकरण क्रमांक 218/बी-121/2007-08 के तहत 5 फरवरी 2008 को अनुसूचित जनजाति गोड़ जाति का स्थायी प्रमाण पत्र जारी किया गया, जिसमें मूल निवास नवांगांव तहसील कोटा दर्ज है। शिकायतकर्ता ने इसे फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जारी किया गया प्रमाण पत्र बताया है।

प्रार्थी ने जाति प्रकरण का नकल देने की मांग की

प्रार्थी पूजा कुशवाहा ने एसडीएम कार्यालय में। नकल आवेदन लगाकर फर्जी जाति प्रमाण पत्र देने की मांग की थी।जिसका अंतिम तिथि 10 अप्रैल था वह आज खत्म हो गया लेकिन उसे नकल की प्रति नहीं दी गई बल्कि
नकल का प्रकरण नहीं मिल रहा है कहकर बार बार घुमाया जा रहा है।जिसके कारण प्रार्थी मानसिक और शारीरिक रूप से भी परेशान है।

प्रार्थी बोली,आरोपी नहीं पहुंची,बल्कि उसे बचाने की कोशिश जारी

पूजा कुशवाहा ने बताया कि कोटा एसडीएम कार्यालय के उसकी सुनवाई थी।जिसके लिए वह निर्धारित समय से पहुंच चुकी थी।लेकिन जिसके ऊपर आरोप लगा है वह नहीं पहुंची ।जबकि शुक्रवार को सुनवाई होनी थी।इसके बाद भी जिला प्रशासन गंभीर नहीं है और खुद फर्जी जाति का दुरुपयोग करने वाली महिला का सपोर्ट कर रही है।

पूजा बोली,जांच करके एफआईआर होना चाहिए दर्ज

शिकायतकर्ता पूजा का आरोप है कि यह एक गंभीर मामला है और इसमें जिला प्रशासन को गंभीरता के साथ ध्यान देकर जांच करना चाहिए।और एफआईआर दर्ज करना चाहिए ताकि फिर कोई व्यक्ति फर्जी जाति बनवाकर नौकरी या किसी तरह का कोई लाभ नहीं ले सके।लेकिन इसके लिए प्रशासन को गंभीर होना जरूरी है।

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