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कलेंडर परिवर्तन तिथि पर शुभमविहार में हुआ हनुमान चालीसा का पाठ

बिलासपुर।कलेंडर परिवर्तन तिथि पर आज शुभमविहार मानस मंडली ने हनुमान चालीसा का पाठ किया। इस अवसर पर ललित अग्रवाल ने बताया कि पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा कर रही है और पृथ्वी को सूर्य की एक परिक्रमा पूरी करने के लिए जितना समय लगता है वह एक वर्ष कहलाता है। अर्थात् नव-वर्ष दिवस उस दिन को कहेंगे जहां से हम पृथ्वी की परिक्रमा का प्रारंभ मानेंगे । वैसे तो यह कोई भी दिन हो सकता है किन्तु अधिक उचित होगा यदि इस दिन का निर्धारण एक तार्किक आधार पर किया जाए। पृथ्वी की परिक्रमा के कारण दिन और रात तथा ऋतुओं का परिवर्तन होता है। 21 मार्च व 21 सितंबर दो अवसर ऐसे आते हैं जब दिन और रात समान हो जाते हैं तथा 21 जून व 21 दिसम्बर दो अवसर ऐसे आते हैं जब दिन और रात की अवधि में अंतर सर्वाधिक होता है। तो अन्य किसी दिन के तुलना में इन चारों में से किसी एक दिन को नव वर्ष दिवस माना जाना ही तार्किक होगा।

इन चारों में से कौन सा दिन मानना अधिक तार्किक होगा, तो ज्ञात हुआ कि वे दो दिन, जब दिन रात समान होते हैं, उनमें से एक दिन हमें वर्ष का प्रारंभ मानना चाहिए। तो इन दोनों दिनों के अंतर देखने पर ज्ञात हुआ कि एक ऐसे अवसर के पश्चात दिन बड़े होते हैं और दूसरे ऐसे अवसर के पश्चात रातें बड़ी होने लगती हैं। तो सामान्य मनोभाव कहता है कि जिसके पश्चात दिन बड़े होते हैं, उसी दिन को हमें वर्षारंभ मानना चाहिए। तो ऐसा दिन तो 21 या 22 मार्च पड़ता है।
इससे एक बात और स्पष्ट होती है कि मार्च का महीना वसंत का महीना है जब प्रकृति नव सृजन करती है तो ऋतुओं के आधार पर भी यह दिन वर्षारंभ मानने के लिए सही प्रतीत होता है।
मार्च का अर्थ होता है आगे बढ़ना। मार्च को पहला महीना मानें तो सितंबर आता है सातवां महीना। सेप्टम्बर में सेप्टा का अर्थ भी सात, अक्टूबर में ऑक्टा आठवा व नवंबर में नोवा का अर्थ नौ होता है, दिसंबर में डेका का अर्थ दस होता है। यदि हम कहीं कुछ वितरण करते हैं तो जो कम अधिक होता है वह अंत वाले के भाग में ही आता है तो जब वर्ष के महीनों को दिनों का वितरण किया गया तो अंत में बचे 28/29 दिन, जब की सभी महीने तो 30 या 31 दिन के बने थे, तो ये 28 दिन फरवरी को दिए गए। और जब लीप ईयर आता है तो अंत में बचते हैं 29 दिन तो वह एक अतिरिक्त दिन भी फरवरी को दिया जाता है। अर्थात पहले कभी फरवरी वर्ष का अंतिम मास होता था। शक संवत के अनुसार 21 या 22 मार्च को या चंद्र पंचांग के अनुसार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को जो 21- 22 मार्च के आसपास ही पड़ती है, वर्ष आरंभ मानना अधिक तार्किक है।
आज के हनुमान चालीसा पाठ में आख़िलानन्द पांडेय, ललित अग्रवाल, सत्यनारायण पांडेय, नरेंद्र गोपाल, आर पी मिश्रा, प्रमोद अवस्थी, सुरेंद्र दुबे, अनिल तिवारी, भूपेंद्र यादव, अखिलेश द्विवेदी, डी पी सक्सेना आदि उपस्थित हुए।

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