अतिथि व्याख्याताओं की सेवा शर्तों में सुधार की मांग, मुख्यमंत्री व उच्च शिक्षा मंत्री को सौंपा ज्ञापन

रायपुर (छत्तीसगढ़ पत्रिका)अतिथि व्याख्याता, क्रीड़ाधिकारी एवं
ग्रंथपालों की लंबे समय से लंबित समस्याओं तथा उनकी सेवा शर्तों में सुधार की मांग को लेकर प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री एवं उच्च शिक्षा मंत्री से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। इस दौरान अतिथि व्याख्याताओं ने अपनी विभिन्न न्यायोचित मांगों से अवगत कराते हुए उच्च शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की।
प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि प्रदेश के शासकीय महाविद्यालयों में कार्यरत अतिथि व्याख्याता, क्रीड़ाधिकारी और ग्रंथपाल वर्षों से सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन उनकी सेवा शर्तें स्पष्ट और सुरक्षित नहीं होने के कारण उन्हें कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इस संबंध में मुख्यमंत्री तथा उच्च शिक्षा मंत्री के समक्ष सात प्रमुख मांगें रखी गई।प्रतिनिधिमंडल की बात सुनते हुए उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा ने अतिथि व्याख्याताओं की सेवा शर्तों में सुधार के लिए उच्च शिक्षा विभाग को समिति गठित करने के निर्देश दिए, जिससे उनकी समस्याओं का समाधान किया जा सके।ज्ञापन में प्रमुख रूप से मांग की गई कि अतिथि व्याख्याता, क्रीड़ाधिकारी और ग्रंथपालों को प्रत्येक शैक्षणिक सत्र में राज्य शासन के नियमित कर्मचारियों की तरह आकस्मिक एवं ऐच्छिक सवैतनिक अवकाश की सुविधा प्रदान की जाए, ताकि वे अपनी पारिवारिक एवं सामाजिक जिम्मेदारियों का निर्वहन कर सकें।
इसके अलावा विभिन्न विश्वविद्यालयों में नियुक्ति एवं सेवा समाप्ति की अलग-अलग व्यवस्था को समाप्त कर एक समान शैक्षणिक कैलेंडर लागू करने की मांग की गई। प्रतिनिधिमंडल ने सुझाव दिया कि चालू शैक्षणिक सत्र में 1 जुलाई से 31 मई तक सेवा सुरक्षा सुनिश्चित की जाए, जिससे शिक्षकों को स्थायित्व मिल सके।
ज्ञापन में हरियाणा राज्य के अतिथि व्याख्याता सेवा सुरक्षा अधिनियम 2024 की तर्ज पर छत्तीसगढ़ में भी सेवा सुरक्षा लागू करने की मांग की गई। इसके तहत कम से कम तीन वर्ष की सेवा पूर्ण कर चुके अतिथि व्याख्याता, क्रीड़ाधिकारी एवं ग्रंथपालों को 65 वर्ष
की आयु तक कार्य करने का अवसर दिया जाए। साथ ही यदि किसी वर्ष में किसी व्याख्याता ने 150 दिन कार्य किया हो तो उसे पूरे वर्ष की सेवा के रूप में मान्यता देने की मांग रखी गई।
वेतन व्यवस्था में सुधार की मांग करते हुए प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि वर्तमान कालखण्ड आधारित भुगतान व्यवस्था के स्थान पर प्रत्येक कार्यरत अतिथि व्याख्याता को सहायक
प्राध्यापक के मूल वेतन के समतुल्य 57,700 रुपये प्रतिमाह एकमुश्त भुगतान किया जाए। साथ ही भविष्य निधि (पीएफ) की सुविधा प्रदान कर उन्हें सामाजिक सुरक्षा दी जाए तथा प्रतिवर्ष 1 जनवरी और 1 जुलाई से सरकार द्वारा घोषित महंगाई भत्ता के अनुसार वेतन में वृद्धि भी सुनिश्चित की जाए।
इसके अतिरिक्त शासकीय
महाविद्यालयों में सहायक प्राध्यापक, क्रीड़ाधिकारी एवं ग्रंथपाल के रिक्त पदों की भर्ती में अतिथि व्याख्याताओं के लिए 25 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण लागू करने की मांग भी रखी गई। यह आरक्षण उन अतिथि व्याख्याताओं को दिया जाए जिन्होंने कम से कम एक पूर्ण शैक्षणिक सत्र में अध्यापन कार्य किया हो अथवा नीति-2024 के अनुसार 5 अंक अर्जित किए हों। यह व्यवस्था आगामी तीन भर्ती विज्ञापनों तक लागू रखने का प्रस्ताव भी दिया गया।
ज्ञापन में भर्ती परीक्षाओं में आयु सीमा में छूट देने की मांग भी शामिल है। इसके अनुसार अतिथि व्याख्याता नीति 2024 के तहत प्राप्त अध्यापन अनुभव के आधार पर प्रति वर्ष एक वर्ष की छूट देते हुए अधिकतम 10 वर्ष तक की आयु छूट प्रदान करने की मांग की गई है।
इसके साथ ही छत्तीसगढ़ अतिथि व्याख्याता नीति-2024 में उल्लेखित ऑनलाइन पोर्टल के निर्माण की मांग भी उठाई गई, जिसके माध्यम से अतिथि व्याख्याताओं की भर्ती, पॉल-इन-आउट, चॉइस फिलिंग एवं रिक्त पदों से संबंधित पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन संचालित की जा सके। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि यह प्रावधान नीति में पहले से मौजूद है, लेकिन अब तक पोर्टल का निर्माण नहीं किया गया है।
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि उनकी सभी मांगें केवल व्यक्तिगत हित से जुड़ी नहीं हैं, बल्कि प्रदेश की उच्च शिक्षा की गुणवत्ता, स्थिरता और संस्थागत सुदृढ़ता से भी सीधे तौर पर संबंधित हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री और उच्च शिक्षा मंत्री से इन मुद्दों पर प्राथमिकता के साथ निर्णय लेने का आग्रह किया।
अंत में प्रतिनिधिमंडल ने विश्वास जताया कि राज्य सरकार के नेतृत्व में उच्च शिक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत, न्यायसंगत और प्रभावी बनाया जाएगा।