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जमीन की नई गाइडलाइन आने से मिली राहत…पहले जैसे दरों पर होगी खरीदी बिक्री

20 दिनों से रजिस्ट्री पर लगा था विराम,अब आयेगी रौनक

बिलासपुर।जमीन की खरीदी बिक्री और जमीन मकान और भवन को लेकर बनी हुई असमंजस की स्थिति अब खत्म हो गई है।सरकार की नई गाइड लाइन ने जमीन कारोबार करने वाले और खरीदी बिक्री करने वालो को काफी फायदा पहुंचाया है।जिससे रुकी हुई रजिस्ट्री फिर से शुरू हो जाएगी।
जानकारों की माने तो पहले जो गाइडलाइन सरकार ने जारी किया था उसके काफी पैसा रजिस्ट्री मे लग रहा था और अब पुराने हिसाब लगभग दर लागू हो गया है।

प्रदेश में गाइडलाइन दरों और मूल्यांकन उपबंधों को लेकर पिछले कई दिनों से चल रहा विवाद और असमंजस अब दूर होते दिख रहा है। सोमवार को महत्वपूर्ण बैठक में राज्य सरकार ने बड़े फैसले लिए है। इन निर्णयों को तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। माना जा रहा है कि इन बदलावों से रियल एस्टेट सेक्टर को नई दिशा मिलेगी, और आम नागरिकों के लिए संपत्ति खरीद-फरोख्त की प्रक्रिया पहले से अधिक सरल और पारदर्शी होगी।

1400 वर्ग मीटर तक की इंक्रीमेंटल गणना प्रणाली समाप्त

बैठक में सबसे बड़ा फैसला नगरीय क्षेत्रों में 1400 वर्ग मीटर तक के भूखंडों की इंक्रीमेंटल आधार वाली गणना प्रणाली को समाप्त करने का रहा। काफी समय से इसकी जटिलता को लेकर आपत्तियां उठ रही थीं। अब पुनः पूर्व प्रचलित नियम लागू होंगे

नगर निगम क्षेत्र : 50 डिसमिल तक स्लैब दर से मूल्यांकन

नगर पालिका क्षेत्र : 37.5 डेसिमल तक स्लैब दर

नगर पंचायत क्षेत्र : 25 डीसमिल तक स्लैब दर
इस बदलाव से न सिर्फ मूल्यांकन प्रक्रिया सरल होगी, बल्कि पिछली वृद्धि के बाद उत्पन्न विवादों को भी काफी हद तक शमन मिलेगा।

जमीन की कीमतों में वृद्धि वाला आदेश सरकार ने लिया वापस

जमीन खरीद-फरोख्त के लिए गाइडलाइन दरों में वृद्धि से प्रदेश में राजनीतिक माहौल गरमाया है। अनेक जिलों में गाइडलाइन दर 100 प्रतिशत वहीं कई क्षेत्रों में 500 प्रतिशत तक वृद्धि की गई थी। जिस पर लोगों में नाराजगी छाई हुई है।

अब मांगे जा रहे हैं सुझाव जिसके बाद बनाया जाएगा नया नियम

छत्तीसगढ़ में कुछ दिनों पहले जमीन की गाइडलाइन दर की घोषणा की गई थी। इसके खिलाफ कांग्रेस पार्टी एवं आम जनता ने भी नाराजगी जाहिर की थी। अब, सरकार ने गाइडलाइन के कई आदेश को तत्काल प्रभाव से वापस ले लिया है।सरकार का कहना है कि आम जनता से सुझाव आमंत्रित किया जा रहा है। जो लोग सुझाव देना चाहते हैं वे 31 दिसंबर तक सुझाव अथवा शिकायत जमा करवा सकते हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि अनेक आदेश को वापस लेने से जमीन की कीमतों में हुई वृद्धि से जनता को कुछ राहत मिल सकती है। सरकार ने नगर क्षेत्र में 1400 वर्ग मीटर के इंक्रीमेंटल आधार वाला आदेश, कमर्शियल कॉम्प्लेक्स के सामने और पीछे के रेट को समान करने वाला आदेश और बहु-मंजिला इमारत के सुपर बिल्ट-अप एरिया के आधार पर बाजार मूल्य तय करने वाला आदेश वापस ले लिया है।

भवनों एवं कमर्शियल कॉम्प्लेक्स के लिए मूल्यांकन में छूट के नए प्रावधान भी लागू

बहुमंजिला भवनों एवं कमर्शियल कॉम्प्लेक्स के लिए मूल्यांकन में छूट के नए प्रावधान भी लागू किए हैं। अब बेसमेंट और प्रथम तल पर 10 प्रतिशत तथा द्वितीय तल एवं उससे ऊपर के तल पर 20 प्रतिशत की कमी के साथ मूल्यांकन किया जाएगा। इस निर्णय से मध्यम वर्ग को किफायती दरों पर फ्लैट और व्यावसायिक स्थान मिलने में मदद मिलेगी।

25 प्रतिशत कमी के साथ भूखंड की दरों का मूल्यांकन

कमर्शियल कॉम्प्लेक्सों में 20 मीटर से अधिक दूरी पर स्थित संपत्तियों के लिए 25 प्रतिशत कमी के साथ भूखंड की दरों का मूल्यांकन किया जाएगा। 20 मीटर की दूरी का आकलन मुख्य मार्ग की ओर से निर्मित हिस्से से किया जाएगा, जिससे वास्तविक स्थिति के आधार पर अधिक न्यायसंगत मूल्यांकन संभव होगा।

20 दिनों रजिस्ट्री पर पड़ा है फर्क

जानकारों का कहना है कि 20 दिन पहले जारी किया गया आदेश अब राहत दिया है।अन्यथा 20 दिनों से किसी तरह की कोई भी रजिस्ट्री नहीं हुई थी।इससे शासन और आमजनों दोनों को नुकसान हुआ है।और अब जो आदेश आया है लगभग वह पुराने जैसा है।जिससे एक बार फिर से लोगों के चेहरे पर रौनक आ गई है।

पहले और अब में जमीन खरीदी अंतर

रिहायशी इलाके में जमीन खरीदी करने पर महंगे दाम पड़ते थे लेकिन उसके साथ ही रजिस्ट्री शुल्क ज्यादा पड़ता था मतलब 10 लाख की जमीन पर 3 लाख से अधिक का रजिस्ट्री शुल्क लगता ,लेकिन अब 10 लाख की जमीन खरीदी पर 70 हजार के आसपास का रजिस्ट्री शुल्क लगेगा।इससे काफी हद तो पैसा बच रहा है।

इसी तरह ग्रामीण और शहर क्षेत्र के जमीनों पर भी अलग दाम तय किए गए है

जानकारों का मानना है कि जमीन का रजिस्ट्री होने से न सिर्फ आमजनों को बल्कि शासन को भी काफी राजस्व मिलता था।इसके बाद भी अचानक से दाम बढ़ा देना और आमजनता की जेब में डाका डालना एकदम से लोगो को सोचने में।मजबूर कर दिया गया है।

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