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EWS फर्जीवाड़े में नया मोड़ प्रमाणपत्र वैध होने के बावजूद छात्रा को बताया फर्जी

प्रशासन की जल्दबाज़ी से छात्रा की मेडिकल सीट पर संकट, न्याय की आस में परिवार

बिलासपुर । तहसील कार्यालय में EWS प्रमाण पत्र फर्जीवाड़े का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। प्रशासन ने जहां तीन प्रमाण पत्रों को फर्जी घोषित कर दिया है, वहीं चार को संदिग्ध मानकर जांच जारी है लेकिन एक छात्रा के सामने आने से इस पूरे प्रकरण में नया मोड़ आ गया है।

बिलासपुर में सामने आया ये फर्जीवाड़ा चौंकाने वाला है प्रशासन के मुताबिक,छात्राएं सुहानी सिंह, श्रेयांशी गुप्ता और भव्या मिश्रा ने फर्जी EWS प्रमाण पत्र लगाकर मेडिकल कॉलेजों में दाखिला लिया तहसील कार्यालय के रिकॉर्ड में इनके नाम से न तो आवेदन मिला और न ही कोई प्रमाणपत्र जारी हुआ। अब तक सात संदिग्ध मामले सामने आए हैं,जिनमें से तीन की पुष्टि हो चुकी है लेकिन प्रभावित सरकंडा निवासी छात्रा भव्या मिश्रा का कहना है कि उसका प्रमाणपत्र पूरे नियमों के तहत जारी हुआ था एडमिशन से पहले वेरिफिकेशन भी हुआ,तभी उसने काउंसलिंग में हिस्सा लिया लेकिन अब उसे गलत तरीके से फर्जी करार दिया जा रहा है।
यानी तस्वीर साफ यही है कि… आयुक्त चिकित्सा शिक्षा के आदेश के बाद प्रशासन ने इतनी हड़बड़ी में कार्रवाई की कि सही प्रमाण पत्र को भी अवैध ठहरा दिया।
दरअसल भव्या के EWS प्रमाण पत्र में अधिकारी का हस्ताक्षर फर्जी पाया गया। लेकिन सवाल ये है कि इसमें छात्रा का क्या दोष?आवेदन सही,दस्तावेज सही और प्रमाणपत्र भी तहसील कार्यालय से जारी हुआ तो फिर इसकी सजा एक मासूम छात्रा क्यों भुगते?भव्या और उसके परिजन अब इसी आस में हैं कि प्रशासन संवेदनशीलता दिखाए और जल्द से जल्द उनकी परेशानी दूर करे। लगातार हो रही देरी से उसकी पढ़ाई बाधित हो रही है। वहीं दूसरी ओर मेडिकल काउंसलिंग का दूसरा चरण जारी है और भव्या को मिली सीट उसके हाथ से फिसलने की कगार पर है।अब बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रशासन पारदर्शिता दिखाते हुए छात्रा को न्याय दिला पाएगा? या फिर यह मामला भी महज औपचारिकताओं और फाइलों में दबकर रह जाएगा

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