आधी रात अंतर्राज्यीय सीमा में परिवहन हो रहे धान को कलेक्टर ने तीन किलोमीटर पीछा कर पकड़ा

बलरामपुर।अंतर्राज्यीय सीमा पर से दो पिकअप में हो रहे अवैध धान परिवहन को कलेक्टर राजेंद्र कटारा ने खुद देर रात पीछा कर घने जंगलों से पकड़ा। अवैध धान परिवहन पर कार्यवाही की जा रही है।
बता दे बलरामपुर– रामानुजगंज जिले में अंतर्राज्यीय सीमा पर हो रहे अवैध धान तस्करी को पकड़ा गया है। कलेक्टर राजेंद्र कटारा ने खुद देर रात अवैध धान को जंगलों में पीछा कर पकड़ा है। जिले में धान खरीदी को प्रभावित करने वाली गतिविधियों पर जिला प्रशासन लगातार सख्त रुख अपना रहा है। इसी कड़ी में कलेक्टर राजेंद्र कटारा ने धान की अवैध तस्करी को रोक लगाने खुद ही कमान सम्हाल कर कार्यवाही की है।

रामचंद्रपुर विकासखंड अंतर्गत अंतर्राज्यीय सीमा क्षेत्र के तालकेश्वरपुर के घने जंगलों में अवैध धान परिवहन की सूचना पर कलेक्टर और उनकी टीम ने बड़ी कार्यवाही की है। कलेक्टर राजेंद्र कटारा को अवैध धान परिवहन की सूचना मिली थी। जिस पर कलेक्टर राजस्व अमले के साथ मौके पर पहुंचे। यहां संदिग्ध वाहनों की जांच की जा रही थी। इसी दौरान जंगल के रास्ते से गुजर रहे दो संदिग्ध पिकअप वाहनों का पीछा किया। अंधेरे और घने जंगलों का फायदा उठा पिकअप भागने लगा। तब कलेक्टर ने अपने वाहन से पिकअप का पीछा किया। लगभग तीन किलोमीटर तक पीछा करके दोनों पिकअप को पकड़ लिया गया।
जांच करने पर दोनों वाहनों में 140 बोरा अवैध धान पाया गया। जिसका वैध दस्तावेज मांगने पर चालक प्रस्तुत नहीं कर पाया। मौके पर ही पिकअप और अवैध धान जप्त कर सनवाल थाने में कार्यवाही के लिए सुपुर्द कर दिया गया। इस कार्यवाही के समय कलेक्टर के साथ तहसीलदार, नायब तहसीलदार और पूरा राजस्व अमला मौजूद रहा।
कलेक्टर राजेंद्र कटारा ने इस अवसर पर स्पष्ट कहा कि जिले में धान खरीदी व्यवस्था को कमजोर करने वाले अवैध परिवहन, भंडारण और तस्करी को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि अंतरराज्यीय सीमा क्षेत्रों में सतत निगरानी रखी जाए और 24 घंटे चौकसी बढ़ाते हुए ऐसे मामलों में तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि शासन की मंशा के अनुरूप धान खरीदी प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी, सुरक्षित और सुचारू बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिकता है। अवैध धान परिवहन में संलिप्त लोगों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी, ताकि किसानों और शासन के हितों की रक्षा की जा सके।