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आय से अधिक संपत्ति के मामले में एसीबी द्वारा दर्ज FIR रद्द करवाने अधिकारी द्वारा लगाई गई याचिका खारिज

बिलासपुर। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के निलंबित ज्वाइंट डायरेक्टर अशोक चतुर्वेदी पाठ्य पुस्तक निगम में प्रतिनियुक्ति में जीएम थे। इस दौरान उनके ठिकानों पर एंटी करप्शन ब्यूरो ने रेड मार कर 31 करोड़ रुपए की आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का खुलासा किया था। निलंबित अफसर अशोक चतुर्वेदी और उनकी पत्नी के नाम पर चालान भी एसीबी द्वारा प्रस्तुत किया गया था और मामला ट्रायल में है। अशोक चतुर्वेदी ने आय से अधिक संपत्ति का मामला रद्द करवाने हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी। इसमें सुनवाई के बाद डिवीजन बेंच ने मामले को गंभीर प्रकृति का मानते हुए याचिका खारिज कर दी है। पाठ्य पुस्तक निगम के निलंबित जीएम अशोक चतुर्वेदी के द्वारा आय से अधिक संपत्ति के मामले में एसीबी द्वारा दर्ज प्रकरण को खारिज करवाने लगाई गई याचिका को हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है। एसीबी के द्वारा प्रस्तुत जवाब के आधार पर चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र अग्रवाल की बेंच ने यह निर्णय सुनाया है।

अशोक चतुर्वेदी पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के ज्वाइंट डायरेक्टर हैं। फिलहाल वे निलंबित चल रहे हैं। लंबे समय तक पाठ्य पुस्तक निगम में वे प्रतिनियुक्ति पर जीएम के पद पर पदस्थ थे। इस दौरान गड़बड़ियों और आर्थिक घोटाले की सूचना मिलने पर एंटी करप्शन ब्यूरो और ईओडब्ल्यू की टीम ने प्रारंभिक जांच करवाई। जांच में पुष्टि होने पर आय से अधिक संपत्ति का केस दर्ज कर एंटी करप्शन ब्यूरो के द्वारा उनके ठिकानों पर छापेमारी भी की गई थी। रेड के दौरान और जांच में करोड़ों रुपए की चल– अचल अघोषित संपति का पता चला था। जिसे अशोक चतुर्वेदी ने अपने व अपने परिजनों के नाम पर खरीदी थी। जो उनकी सेवाकाल के दौरान प्राप्त किए गए कुल आय से कई गुना अधिक थी। जांच के बाद एंटी करप्शन ब्यूरो ने 28 अगस्त 2023 को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13( 1)(बी) और 13(2) के तहत चालान प्रस्तुत किया। यह मामला विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम रायपुर में चल रहा है।

आज से अधिक संपत्ति मिलने पर राज्य सरकार ने अशोक चतुर्वेदी को निलंबित कर दिया था। निलंबित अफसर अशोक चतुर्वेदी ने हाई कोर्ट में याचिका लगा एंटी करप्शन ब्यूरो द्वारा दर्ज ऐसे अधिक संपत्ति के मामले को निरस्त करने की मांग की थी। इसमें उन्होंने बताया था कि उनका रिकॉर्ड साफ है और राज्य सरकार ने राजनीतिक दुर्भावना के चलते कार्यवाही की है। वह जांच प्रक्रिया से गुजरने के लिए तैयार हैं। उनके खिलाफ बिना नियमानुसार विभागीय पूर्व स्वीकृति के चालान प्रस्तुत किया गया। जिसमें उनकी पत्नी को भी आरोपी बना दिया गया है, जबकि एफआईआर में पत्नी का नाम नहीं था। इस मामले में हाई कोर्ट ने एंटी करप्शन ब्यूरो और राज्य सरकार से जवाब मांगा था।

जवाब में बताया गया कि 68 लाख कुल आय के विरुद्ध अर्जित की है 31 करोड़ रुपए की संपत्ति:–

कोर्ट में जवाब प्रस्तुत कर राज्य सरकार और एसीबी ने बताया कि एफआईआर के अनुसार अधिकारी की सेवा अवधि यानी 3 मार्च 2001 से 31 दिसंबर 2019 तक कुल वेतन 68 लाख 89 हजार 344 रुपए रहा। पत्नी की आय 23 लाख 60 हजार 845 रुपए बताई गई है। जबकि जांच एजेंसी के अनुसार दोनों के पास 31 करोड़ 65 लाख 82 हजार 400 रुपए की संपत्ति है। इसमें छह संपत्तियों का विवरण दिया गया है। इनमें से एक संपत्ति ग्राम तेंदुआ, तहसील नवागढ़ में है। इसकी कीमत 1 करोड़ 10 लाख रुपए आंकी गई है। इसमें 30 लाख भूमि और 80 लाख कथित विकास कार्य के लिए बताए गए हैं। इसके अलावा अधिकारी ने बीमा पॉलिसियों में 22 लाख 31 हजार 47 रुपए और विविध खर्चों में 5 लाख 50 हजार रुपए का निवेश किया है।

राज्य सरकार के तर्कों से सहमत होते हुए अदालत ने माना कि मामला गंभीर प्रकृति का है। इस मामले में जांच के बाद चालान भी प्रस्तुत हो चुका है और ट्रायल के बाद मामले को तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचना जरूरी है। इस आधार पर हाईकोर्ट ने अशोक चतुर्वेदी की याचिका को खारिज कर दिया।

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