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ईद-उल-अजहा को लेकर बकरा बाजार में रौनक,5 हजार से लेकर 1 लाख तक में बिक रहे बकरे

रपटा पार विशेष मंडी में जुटे दूर-दराज के व्यापारी,खरीदारों में दिखा उत्साह

बिलासपुर। बकरीद की तैयारियों को लेकर मुस्लिम समाज में एक उत्साह बना हुआ है।बाजार में 5 हजार से लेकर 1 लाख से अधिक का बकरा बिक रहा है।चूंकि बिना बकरे की कुर्बानी दिए बकरीद नहीं मनाई जाती है।इसलिए त्यौंहारों के समय बकरा महंगा बिकता है।

बता दे रपटा पार सब्जी बाजार में ईद-उल-अजहा से ठीक पहले विशेष बकरा बाजार का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में व्यापारी और खरीदार पहुंचे। इस मंडी में कुर्बानी के लिए बकरों की जबरदस्त खरीदारी देखने को मिली। बकरीद को लेकर लोगों में खासा उत्साह नजर आया और बाजार में हजारों से लेकर लाखों रुपये तक के बकरे बिकते देखे गए।इस बार मंडी में पेंड्रा, मरवाही, कोरबा, रायपुर, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और ओडिशा से भी व्यापारी पहुंचे, जो विभिन्न नस्लों के बकरे लेकर आए थे। इनमें तोतापरी, जमनापारी, बर्बरी, अजमेरी और पंजाबी नस्ल के बकरे लोगों के आकर्षण का केंद्र रहे। सफेद, लाल-काले और तीन रंगों वाले बकरों की मांग सबसे ज्यादा रही। कुछ बकरों को चना, बादाम और काजू खिलाकर खास तरीके से तैयार किया गया था, जिससे उनकी कीमत 5 हजार से लेकर 1 लाख रुपए से अधिक तक पहुंच गई।बकरा खरीदने पहुंचे लोगों ने बताया कि कुर्बानी के लिए बकरा चुनते समय विशेष सावधानी बरती जाती है। बकरा तंदुरुस्त होना चाहिए, उसका सींग टूटा न हो, शरीर पर कोई जख्म न हो, दो दांत हों और उसकी उम्र कम से कम एक साल होनी चाहिए, तभी कुर्बानी मान्य मानी जाती है। इसी वजह से खरीदार मंडी में बकरे को हर पहलू से परखते नजर आए।बकरा बाजार में कुछ खास बकरे लोगों की चर्चा का विषय बने रहे। कोई अपनी भारी-भरकम कद-काठी तो कोई अनोखे रंग और नाम की वजह से सबका ध्यान खींचता रहा।कई लोग लाखों के बकरों के साथ सेल्फी लेते भी नजर आए।ईद-उल-अजहा को लेकर जिलेभर की मंडियों में इसी तरह की जानकारी रौनक बनी हुई है और खरीदार अंतिम समय तक अपनी पसंद का बकरा तलाशने में जुटे हैं।

वर्जन
मुसलमानों का प्रमुख त्यौहार में एक बकरी ईद होता है।जिसमें बकरियों की कुर्बानी देनी पड़ती है।यही कारण है कि बाजारों में बकरीद के मौके पर बकरा बहुत महंगा मिलता है।

शहबाज खान
स्थानीय निवासी

वर्जन
5 हजार से लेकर लाखों के बकरा मिलता है।जिसकी कोई कीमत नहीं होती है।बकरे की कुर्बानी देकर बकरीद मनाई जाती है जिसके लिए बकरा बाहर से आता है।जो छत्तीसगढ़ से ही नहीं बल्कि राज्य के बाहर से भी बकरा आता हैं।

जिया उल्लाह खान
स्थानीय निवासी

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