एनएचएम हड़ताल पर सरकार का बड़ा प्रहार, प्रदेश अध्यक्ष समेत 60 संविदा कर्मचारियों की नियुक्ति समाप्त

स्वास्थ्य सेवाएं चरमराई,17 दिनों से 16000 से अधिक कर्मचारी हैं हड़ताल पर
बिलासपुर । छत्तीसगढ़ में 17 दिन से जारी एनएचएम कर्मचारियों की हड़ताल अब टकराव के निर्णायक दौर में पहुंच गई है। सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए हड़ताल का नेतृत्व कर रहे प्रदेश अध्यक्ष श्याम मोहन दुबे समेत 60 कर्मचारियों की संविदा नियुक्ति को तत्काल प्रभाव से समाप्त करने का आदेश जारी कर दिया। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी बिलासपुर के स्तर से जारी इस कार्रवाई ने कर्मचारियों में आक्रोश और स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा दिया है। इस कदम का सीधा असर प्रदेशभर में पहले से चरमराई स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है। मालूम हो की 16000 से अधिक कर्मचारी हड़ताल पर पिछले 17 दिनों से हैं।छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के कर्मचारी अपनी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर पिछले 17 दिन से हड़ताल पर हैं। इन मांगों में नियमितिकरण, वेतनवृद्धि, नौकरी की सुरक्षा, जोखिम भत्ता, पदोन्नति सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दे शामिल हैं। कर्मचारियों का कहना है कि वे लंबे समय से आंदोलनरत हैं, लेकिन शासन ने बार-बार आश्वासन देने के बावजूद उनकी मांगों पर अमल नहीं किया।
इसी बीच शासन-प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए बड़ा फैसला लिया है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी बिलासपुर की ओर से आदेश जारी कर प्रदेश अध्यक्ष श्याम मोहन दवे दुबे सहित 60 संविदा कर्मचारियों की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गईं। आदेश में साफ लिखा है कि बार-बार नोटिस देने और समझाइश के बावजूद कर्मचारी काम पर उपस्थित नहीं हुए। राज्य शासन ने इस कार्रवाई को छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम 1965 और मानव संसाधन नीति-2018 का हवाला देकर उचित ठहराया है।
इस आदेश के बाद एनएचएम संगठन और भी आक्रामक हो गया है। कर्मचारी नेताओं ने चेतावनी दी है कि शासन की यह कार्रवाई संघर्ष को और तेज करेगी। वहीं स्वास्थ्य सेवाओं पर इसका गहरा असर पड़ रहा है। ग्रामीण अंचलों के अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में टीकाकरण, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाएं, राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम और आपातकालीन सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हैं।
*हड़ताल करने वाले कर्मचारी बोले,हड़ताल जारी रहेगा*
राज्य सरकार के आदेश के बाद भी हड़ताल करने वाले कर्मचारियों का कहना है कि यह हड़ताल जारी रहेगा। कार्रवाई करने के बाद भी कोई टूटेगा नहीं,बल्कि लगातार आंदोलन करने से और हिम्मत बढ़ गई है।इसलिए हड़ताल।का रूप अब बदला जायेगा और उग्र आंदोलन करके सरकार को नींद से जगाया जाएगा।