ऑटो चालक आकाश वैष्णव की अनोखी भक्ति बनी चर्चा का विषय

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जहां राधा रानी को बेटी मानकर निभा रहे हैं वात्सल्य और आस्था का अद्भुत संगम।
बिलासपुर । इन दिनों भक्ति और वात्सल्य का एक अनोखा उदाहरण चर्चा का विषय बना हुआ है। शहर के एक साधारण ऑटो चालक आकाश वैष्णव अपनी गहरी आस्था के कारण लोगों के बीच विशेष पहचान बना रहे हैं। उनकी श्रद्धा पारंपरिक पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि उसमें परिवार जैसा अपनापन और स्नेह झलकता है।
दरअसल आकाश वैष्णव के छोटे से परिवार में तीन सदस्य हैं वे स्वयं, उनकी पत्नी और उनकी आराध्य राधा रानी। आकाश स्वयं को राधा रानी का भक्त नहीं, बल्कि उनका सेवक और संरक्षक मानते हैं। उनके लिए राधा रानी किसी प्रतिमा मात्र नहीं, बल्कि परिवार की बेटी के समान हैं जिनकी देखभाल वे पूरे समर्पण और जिम्मेदारी के साथ करते हैं। प्रतिदिन सुबह वे विधिवत स्नान कराकर राधा रानी का श्रृंगार करते हैं और भोग अर्पित करते हैं। दिनभर की अपनी बातें भी वे उनके साथ साझा करते हैं। शाम को समय निकालकर उन्हें पार्क में घुमाने ले जाते हैं झूला झुलाते हैं और बच्चों की तरह कार्टून भी दिखाते हैं। उनकी इस दिनचर्या में औपचारिकता नहीं बल्कि सच्चे स्नेह की झलक दिखाई देती है। आकाश का मानना है कि भक्ति केवल मंदिरों तक सीमित नहीं होनी चाहिए बल्कि उसमें भावनात्मक जुड़ाव भी होना चाहिए। वे कहते हैं कि जब आस्था में प्रेम और वात्सल्य का भाव जुड़ जाता है तो ईश्वर परिवार का हिस्सा बन जाते हैं। उनकी यह सोच आसपास के लोगों को भी प्रभावित कर रही है। शहर में उनकी अनोखी श्रद्धा चर्चा का विषय बनी हुई है। कई लोग इसे भक्ति का अद्भुत स्वरूप बता रहे हैं जहां आस्था और पारिवारिक प्रेम का सुंदर संगम देखने को मिलता है। बिलासपुर में भक्ति का यह मानवीय और भावनात्मक रूप विरले ही देखने को मिलता है जो लोगों को सोचने पर मजबूर कर रहा है कि श्रद्धा का असली अर्थ क्या है।