ओएचई तार से झुलस कर ठेकाकर्मी की मौत पर हो रहे प्रदर्शन पर हाईकोर्ट के आदेश के बाद छठवें दिन देर रात बनी सहमति,26 लाख मुआवजा, बेटी को शिक्षा, पत्नी को आउटसोर्स कंपनी में नौकरी की शर्त पर धरना समाप्त
रेलवे के ठेका कर्मी की ट्रेन के बोगी की छत पर चढ़ कर सफाई के दौरान
ओएचई तार की चपेट में आने से झुलसने से मौत हो गई थी। इसके बाद परिजनों ने शव लेने से इनकार कर दिया और एक करोड़ रुपए मुआवजा तथा रेलवे में नौकरी की मांग को लेकर भीम आर्मी तथा सामाजिक संगठनों के साथ डीआरएम ऑफिस के बाहर धरने पर बैठे थे। 6 दिनों तक चले धरने और कल हाईकोर्ट के आदेश के बाद देर रात प्रशासनिक और पुलिस अफसरों के बीच 26 लाख 45 हजार रुपए मुआवजा, मृतक की पत्नी को आउटसोर्स कंपनी में कंप्यूटर ऑपरेटर की नौकरी तथा मृतक की बच्ची को 12वीं तक की पढ़ाई रेलवे स्कूल में कराने की शर्त पर छठवें दिन धरना समाप्त हुआ।
बिलासपुर। रेलवे में ओएचई तार की चपेट में आकर ठेकाकर्मी की मौत पर लगातार 6 दिनों तक चले धरने के बाद कल रात प्रशासन-रेलवे और परिजनों के बीच डीआरएम ऑफिस में बातचीत हुई। दोनों पक्षों में बातचीत के दौरान पत्नी को कुल रेलवे और प्रशासन की 26.45 हजार रुपए मुआवजा, पत्नी को आउट सोर्स कंपनी के माध्यम से कम्प्यूटर ऑपरेटर की नौकरी और बच्ची को 12वीं तक की पढ़ाई रेलवे स्कूल में कराने की बात कही गई है। इसके बाद सहमति के आधार पर धरना समाप्त कर दिया गया। आज परिजन शव का अंतिम संस्कार करेंगे।
धरने के छठवें दिन हाईकोर्ट में बुधवार रात 9.30 बजे एडीएम शिव बनर्जी, एडिशनल एसपी राजेंद्र जायसवाल व रेलवे मेंटेनेंस विंग के सीडीपीओ प्रणय मित्रा और परिजन के बीच बातचीत हुई। अधिकारियों ने परिजन को हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार अतिरिक्त ठेकेदार की ओर से 5 लाख रुपए मुआवजा राशि बढ़ाने की बात कही। इस तरह परिजन को रेलवे, प्रशासन और ठेकेदार की तरफ से कुल 26 लाख 45 हजार रुपए, मृतक प्रताप बर्मन की पत्नी खुशबू बर्मन को आउट सोर्स कंपनी के अंतर्गत कम्प्यूटर ऑपरेटर की नौकरी। बच्ची की 12वीं तक की शिक्षा रेलवे स्कूल में निशुल्क कराने की बात पर कही गई है। इतना ही नहीं एसबीआई में प्रताप बर्मन का खाता होने के कारण बैंक की तरफ अतिरिक्त दो लाख रुपए भी परिजन को मिलेंगे। परिजन प्रताप का शव गुरुवार सुबह मरचुरी से गांव ले जाकर अंतिम संस्कार करेंगे। बता दें लगातार छह दिनों से परिवार व भीम आर्मी के साथ अन्य संगठनों के लोग एक करोड़ रुपए मुआवजा और रेलवे में सरकारी नौकरी की मांग को लेकर डटे हुए थे।
लगातार बारिश ने भी बढ़ाई मुसीबत:–
इधर, बुधवार शाम से शुरू हुई बारिश भी धरना स्थल पर बैठे लोगों की मुसीबत बढ़ा दी थी। मौके पर सभी तिरपाल लेकर बारिश से जूझ रहे थे। इसी दौरान प्रशासन और रेलवे की तरफ से बातचीत का प्रस्ताव उन्हें भेजा गया, जिसके बाद परिजनों ने भीम आर्मी व अन्य सगठनों से सहमति के बाद अधिकारियों से बात चीत के लिए तैयार हुए।