कलेक्टर का संरक्षण या सिस्टम की कमजोरी?”—बलभद्रे पर नए आरोप, DMF कामकाज पर भी उठे सवाल

सूत्रों का दावा—शीर्ष महिला अधिकारी के कामकाज में अहम भूमिका, आवंटन से लेकर प्रक्रिया तक प्रभाव
बिलासपुर/गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। उप अभियंता वीरेंद्र बलभद्रे को लेकर सामने आ रहे तथ्यों और आरोपों ने जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ उनका ट्रांसफर और मंत्रालय से रिलीव आदेश, वहीं दूसरी ओर उनका लगातार एक ही स्थान पर बने रहना—पूरे मामले को संदेहास्पद बना रहा है।
उप अभियंता वीरेंद्र बलभद्रे का मामला अब सिर्फ ट्रांसफर विवाद तक सीमित नहीं रह गया है। अब उनके कामकाज और कथित प्रभाव को लेकर भी गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
सूत्रों के हवाले से जानकारी सामने आ रही है कि बलभद्रे जिले में एक शीर्ष महिला अधिकारी के कार्यों के प्रबंधन में अहम भूमिका निभाते रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि DMF (जिला खनिज न्यास) से जुड़े कार्यों के आवंटन से लेकर पूरी प्रक्रिया में उनका प्रभाव बना रहा।
आवंटन प्रक्रिया पर उठे सवाल
यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि DMF के तहत होने वाले कार्यों में किसे काम मिलेगा और कैसे मिलेगा—इन प्रक्रियाओं में बलभद्रे की भूमिका प्रभावशाली रही। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
“विशेष कृपा” की वजह यही?
स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि यही कारण हो सकता है कि ट्रांसफर और रिलीव आदेश के बावजूद भी उनके खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई नहीं हुई और वे अब तक पद पर बने हुए हैं।
कलेक्टर का खास” होने की चर्चा
सूत्रों के अनुसार, बलभद्रे को लेकर लंबे समय से यह चर्चा रही है कि वे जिले के शीर्ष अधिकारियों, खासकर कलेक्टर के करीबी माने जाते हैं। यही वजह बताई जा रही है कि नियमों के बावजूद उन्हें रिलीव नहीं किया गया और वे वर्षों से एक ही जगह जमे हुए हैं।
पर्यटन कार्यों और DMF फंड पर सवाल
मामला यहीं तक सीमित नहीं है। बताया जा रहा है कि जिले में पर्यटन स्थलों पर कराए गए कार्यों में भी बलभद्रे की भूमिका प्रमुख रही है। इन कार्यों की गुणवत्ता और वास्तविकता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
गौरेला क्षेत्र के ठाड़ पथरा में जिला खनिज न्यास (DMF) मद से करोड़ों रुपये के कार्य दर्शाकर राशि निकाले जाने की चर्चा है, जबकि स्थानीय स्तर पर ऐसे कार्य जमीन पर स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देते। इससे पूरे मामले में अनियमितता की आशंका जताई जा रही है।
जांच की जरूरत क्यों?
DMF जैसे महत्वपूर्ण फंड से जुड़े कामों में यदि किसी प्रकार की अनियमितता या प्रभाव की बात सामने आती है, तो यह गंभीर विषय बन जाता है। ऐसे में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठना स्वाभाविक है।
⚠️ नोट: उपरोक्त बातें स्थानीय सूत्रों और चर्चाओं पर आधारित हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित पक्ष का पक्ष सामने आने पर उसे भी प्रकाशित किया जाना चाहिए।