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अंतरराज्यीय शैक्षणिक भ्रमण : कृषि छात्रों ने किया केंद्रीय मीठाजल जलीय कृषि संस्थान का अवलोकन

बैरिस्टर ठाकुर छेदीलाल कृषि महाविद्यालय, बिलासपुर की अभिनव पहल

भुवनेश्वर/बिलासपुर, 24 जून 2025 – कृषि शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार और व्यवहारिक अनुभव को बढ़ावा देने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण पहल करते हुए, बैरिस्टर ठाकुर छेदीलाल कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, बिलासपुर तथा कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, लोरमी-मुंगेली के संयुक्त तत्वावधान में बी.एससी. (कृषि) तृतीय वर्ष के कुल 47 छात्र-छात्राओं को एक अंतरराज्यीय शैक्षणिक भ्रमण पर भेजा गया है। यह भ्रमण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के पाठ्यक्रम AHPD-5321 (Educational Tour/Field Visit) के अंतर्गत आयोजित किया गया है।

शैक्षणिक दल के इस भ्रमण का उद्देश्य विद्यार्थियों को देश के अग्रणी कृषि अनुसंधान संस्थानों, केंद्रीय विश्वविद्यालयों तथा तकनीकी केंद्रों की कार्यप्रणाली और नवाचारों से प्रत्यक्ष रूप से परिचित कराना है, ताकि उनकी ज्ञान की सीमाएं पुस्तकें और कक्षाएं पार कर प्रयोगशाला, अनुसंधान फार्म तथा उद्यमशीलता के क्षेत्र तक विस्तृत हों। इस शैक्षणिक दल का नेतृत्व डॉ. (श्रीमती) अर्चना केरकट्टा, सह-प्राध्यापक (कीट विज्ञान), डॉ. (ले.) रोशन परिहार, सहायक प्राध्यापक (अनुवांशिकी एवं पादप प्रजनन), तथा डॉ. यशपाल सिंह निराला, सहायक प्राध्यापक (कीट विज्ञान) द्वारा किया जा रहा है।

भ्रमण का दूसरा चरण: आईसीएआर – केंद्रीय मीठाजल जलीय कृषि संस्थान, भुवनेश्वर का दौरा

भ्रमण के दूसरे चरण में दिनांक 24 जून 2025 को छात्र-छात्राओं ने आईसीएआर – केंद्रीय मीठाजल जलीय कृषि संस्थान (CIFA), भुवनेश्वर का अवलोकन किया। यह संस्थान देश में मीठाजल जलीय कृषि (फ्रेशवॉटर एक्वाकल्चर) के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। संस्थान के वैज्ञानिकों द्वारा छात्रों को उच्च उत्पादक मछली नस्लें, मत्स्य आहार तकनीक, जल गुणवत्ता प्रबंधन, बायोफ्लॉक प्रणाली, तथा मत्स्य पालन में नवीनतम अनुसंधान व विकास की जानकारी प्रदान की गई। छात्रों ने जलीय कृषि की प्रायोगिक इकाइयों, हैचरी प्रबंधन, मत्स्य बीज उत्पादन, और प्रशिक्षण केंद्रों का भी अवलोकन किया।

विद्यार्थियों ने संस्थान में चल रहे राष्ट्रीय मत्स्य बीज मिशन, आजीविका उन्नयन कार्यक्रम और अनुसंधान से किसानों तक की रणनीतियों के बारे में भी जाना, जिससे उन्हें मत्स्य आधारित उद्यमशीलता की संभावनाओं को समझने में मदद मिली। वैज्ञानिकों ने उन्हें संस्थान में संचालित हाईटेक रिसर्च लैब्स का भ्रमण भी कराया, जहाँ छात्र आधुनिक उपकरणों और अनुसंधान विधियों से प्रत्यक्ष रूप से रूबरू हुए।

सांस्कृतिक अनुभव: कोणार्क और धौलीगिरी का भ्रमण

शैक्षणिक भ्रमण के दौरान छात्रों ने कोणार्क सूर्य मंदिर तथा धौलीगिरी शांति स्तूप का भ्रमण कर ओडिशा की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से भी परिचय प्राप्त किया। कोणार्क मंदिर की अद्भुत स्थापत्य कला और ऐतिहासिक महत्ता ने छात्रों को भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों की गहराई से अवगत कराया, वहीं धौलीगिरी में बौद्ध दर्शन और सम्राट अशोक के शांति सन्देश ने उनके चिंतन को व्यापकता प्रदान की।

नवाचार और प्रेरणा का संगम

इस भ्रमण से विद्यार्थियों को केवल तकनीकी ज्ञान ही नहीं, बल्कि वैज्ञानिक सोच, अनुसंधान प्रवृत्ति, नवाचार, तथा सांस्कृतिक चेतना का समावेश भी हुआ। छात्रों ने इस अनुभव को अपने करियर के लिए अत्यंत प्रेरणादायक बताया। भ्रमण से लौटते हुए छात्रों में नया आत्मविश्वास, जोश और भविष्य की स्पष्ट दृष्टि देखने को मिली।

इस प्रकार के शैक्षणिक भ्रमण न केवल विद्यार्थियों के ज्ञान का विस्तार करते हैं, बल्कि उन्हें कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत की संकल्पना को साकार करने की दिशा में अग्रसर भी करते हैं। बैरिस्टर ठाकुर छेदीलाल कृषि महाविद्यालय, बिलासपुर की यह पहल अन्य संस्थानों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन सकती है।

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