कृषि महाविद्यालय, बिलासपुर में विश्व मृदा दिवस का आयोजन

मृदा विज्ञान विभाग द्वारा स्वस्थ मिट्टी–स्वस्थ शहर थीम पर विविध कार्यक्रम आयोजित
बिलासपुर। बैरिस्टर ठाकुर छेदीलाल कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, बिलासपुर में विश्व मृदा दिवस बड़े हर्षोल्लास और उत्साह के साथ मनाया गया। कार्यक्रम का आयोजन मृदा विज्ञान विभाग द्वारा किया गया, जिसमें महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापकों, वैज्ञानिकों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थीगण ने सक्रिय भागीदारी दी।
मुख्य व विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. एन.के. चौरे, अधिष्ठाता, कृषि महाविद्यालय, बिलासपुर ने शिरकत की। विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. एस.एल. स्वामी, अधिष्ठाता, कृषि महाविद्यालय, लोरमी–मुंगेली, डॉ. संजय कुमार वर्मा, मुख्य वैज्ञानिक, क्षेत्रीय कृषि अनुसंधान केंद्र, बिलासपुर, डॉ. तापस चौधरी, विभागाध्यक्ष, मृदा सूक्ष्मजीव विज्ञान विभाग, डॉ. अनूप कुमार सिंह, प्राध्यापक, मृदा सूक्ष्मजीव विज्ञान विभाग, कृषि महाविद्यालय रायपुर उपस्थित थे।

अतिथियों द्वारा मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया।
स्वागत एवं थीम पर जानकारी
अपने स्वागत उद्बोधन में डॉ. प्रमेंद्र कुमार केसरी, वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं विभाग प्रमुख, मृदा विज्ञान ने इस वर्ष की थीम “स्वस्थ शहरों के लिए स्वस्थ मिट्टी” पर प्रकाश डालते हुए बताया कि शहरों में बढ़ते प्रदूषण, अव्यवस्थित कचरा प्रबंधन व घटती मिट्टी की उर्वरता से शहरी पर्यावरण प्रभावित हो रहा है। इसलिए स्वस्थ मिट्टी का संरक्षण समय की आवश्यकता है।
विशेषज्ञों के विचार
डॉ. तापस चौधरी ने कहा कि मृदा केवल कृषि का आधार नहीं बल्कि जीवन का आधार है। उन्होंने छात्रों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड, जैविक पदार्थों की भूमिका और सतत मृदा प्रबंधन तकनीकों की जानकारी दी। उन्होंने भविष्य की चुनौतियों जैसे मृदा क्षरण, लवणता वृद्धि, कार्बन क्षय पर चिंतन व्यक्त किया।
डॉ. अनूप कुमार सिंह ने अपने उद्बोधन में मृदा सूक्ष्मजीवों की भूमिका पर विस्तार से चर्चा करते हुए बताया कि सूक्ष्मजीव मिट्टी की उर्वरता बढ़ाते हैं। ये पौधों की वृद्धि नियामक पदार्थ बनाते हैं। रासायनिक खादों के अत्यधिक उपयोग से इनके स्तर में गिरावट आती है। उन्होंने छात्रों को जैव उर्वरकों के प्रयोग एवं टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने की अपील की।
मुख्य वैज्ञानिक डॉ. संजय कुमार वर्मा ने बताया कि तेजी से बदलती जलवायु और असंतुलित कृषि पद्धतियाँ मृदा की गुणवत्ता को प्रभावित कर रही हैं। उन्होंने कहा कि मृदा स्वास्थ्य सुधरे बिना खाद्य सुरक्षा संभव नहीं है। किसानों को फसल चक्र, हरी खाद, कार्बन प्रबंधन और जल संरक्षण तकनीक अपनानी चाहिए। अनुसंधान केंद्र सतत कृषि हेतु नई तकनीक विकसित कर रहा है।
डॉ. एस.एल. स्वामी ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि मृदा विज्ञान भविष्य का उभरता हुआ क्षेत्र है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ मिट्टी ही स्वस्थ समाज और स्वस्थ अर्थव्यवस्था की नींव है। युवाओं को मृदा संरक्षण तकनीकों का प्रसार किसानों तक पहुँचाना चाहिए।
डॉ. एन.के. चौरे, मुख्य अतिथि ने अपने उद्बोधन में कहा कि “मृदा पृथ्वी पर जीवन का आधार है। यदि मिट्टी स्वस्थ होगी तो हमारी फसलें, किसान और पूरा समाज स्वस्थ रहेगा।” उन्होंने महाविद्यालय द्वारा मृदा स्वास्थ्य के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की सराहना की और विद्यार्थियों से सतत कृषि तकनीकों पर अध्ययन एवं नवाचारी विचार प्रस्तुत करने की अपील की।
विद्यार्थियों की सहभागिता
बी.एस.सी. कृषि चतुर्थ वर्ष के छात्र वेदराम वर्मा ने कार्यक्रम में अपने विचार साझा करते हुए कहा कि मृदा प्रबंधन तकनीकों के अध्ययन और प्रयोग से विद्यार्थियों का ज्ञान बढ़ता है और यह किसानों की समस्याओं के समाधान में भी सहायक होता है।
कार्यक्रम का सफल आयोजन
कार्यक्रम के सफल आयोजन में मृदा विज्ञान विभाग के साथ–साथ महाविद्यालय के सभी प्राध्यापकों, वैज्ञानिकों, कर्मचारियों एवं छात्र–छात्राओं का योगदान उल्लेखनीय रहा।