कृषि महाविद्यालय में मनाई गई “बसंत पंचमी

बिलासपुर। बैरिस्टर ठाकुर छेदीलाल कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, बिलासपुर (छ.ग.) में विद्या, ज्ञान एवं कला की अधिष्ठात्री देवी माँ सरस्वती के प्रकटोत्सव का पावन पर्व “बसंत पंचमी” हर्षोल्लास एवं श्रद्धा के वातावरण में मनाया गया। संपूर्ण महाविद्यालय परिसर पीले पुष्पों, भक्ति संगीत एवं आध्यात्मिक उल्लास से सराबोर दिखाई दिया।
इस अवसर पर महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. एन.के. चौरे, समस्त प्राध्यापकगण, वैज्ञानिक, अधिकारी, कर्मचारी बंधु तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने माँ सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण, दीप प्रज्वलन एवं विधिवत पूजा-अर्चना कर ज्ञान, विवेक और सद्बुद्धि की कामना की। पूजा उपरांत सभी उपस्थितजनों के बीच प्रसाद वितरण किया गया।
कार्यक्रम के प्रारंभ में वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. आर. बी. तिवारी ने बसंत पंचमी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह पर्व न केवल ऋतु परिवर्तन का प्रतीक है, बल्कि यह ज्ञान, सृजनशीलता और नवचेतना के आरंभ का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि माँ सरस्वती की उपासना विद्यार्थियों के जीवन में अनुशासन, एकाग्रता और बौद्धिक विकास का मार्ग प्रशस्त करती है।
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. एन.के. चौरे, अधिष्ठाता, कृषि महाविद्यालय ने छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि “बसंत पंचमी हमें यह स्मरण कराती है कि शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण, नवाचार और समाज के प्रति उत्तरदायित्व का आधार है। कृषि शिक्षा के विद्यार्थियों का दायित्व और भी अधिक है, क्योंकि उन्हें भविष्य में किसानों की समस्याओं का समाधान निकालकर देश की खाद्य सुरक्षा को सुदृढ़ करना है।”
उन्होंने विद्यार्थियों से परिश्रम, नैतिक मूल्यों और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को अपने जीवन में आत्मसात करने का आह्वान किया तथा कहा कि माँ सरस्वती की कृपा से ही ज्ञान सार्थक बनता है और उसका उपयोग समाजहित में किया जा सकता है।
कार्यक्रम के दौरान क्षेत्रीय कृषि अनुसंधान केंद्र, बिलासपुर के मुख्य वैज्ञानिक डॉ. एस.के. वर्मा, महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापक, वैज्ञानिक, कर्मचारी बंधु एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। अंत में कार्यक्रम का समापन शांतिपाठ के साथ हुआ। बसंत पंचमी के इस आयोजन ने महाविद्यालय परिसर में सकारात्मक ऊर्जा, सांस्कृतिक चेतना एवं शैक्षणिक प्रेरणा का संचार किया।