केंचुआ खाद उत्पादन पर कौशल विकास प्रशिक्षण हुआ संपन्न

6 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में हर दिन 30 किसान होते थे शामिल
बिलासपुर। कृषि विज्ञान केंद्र अंतर्गत ग्राम बहतराई में 6 दिनों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में किसानों को बताया गया कि केंचुआ खाद का उत्पादन कैसे और किस तरह से करना है कैसे इनका उपयोग करना है।यही कारण है कि 6 दिनों तक इसका प्रशिक्षण दिया गया जिसमे बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।
बता दे कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ.एके त्रिपाठी के मार्गदर्शन और डॉ.शिल्पा कौशिक के नेतृत्व में किसानों को बारीकी से प्रशिक्षण दिया गया। डॉ.शिल्पा कौशिक ने बताया कि आज के इस जीवन में इंसान कुछ भी कर सकता है और आज के समय में खेती सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है।क्योंकि बिना खेती के कुछ भी करना संभव नहीं है।इसलिए लोग
खेती की तरफ ज्यादा ध्यान भी देते है। जिस तरह से खेती के लिए लोग जागरूक हो रहे है ठीक उसी तरह से केंचुआ खाद के उत्पादन के लिए भी जागरूक होने लगे है।जिसके कारण किसान प्रशिक्षण लेने आते है।
चूंकि किसानों को प्रशिक्षित करना और उनको खेती करने के लिए प्रोत्साहित करना कृषि विज्ञान केंद्र और वैज्ञानिकों की प्राथमिकता है।
इसलिए जिले में किसी न किसी जगह पर आयोजन करके प्रशिक्षण दिया जाता है। डॉ.शिल्पा कौशिक ने यह भी कहा कि एक एक किसानों को केंचुआ खाद उत्पादन को लेकर बारीकियों से प्रशिक्षित किया गया।
इस 6 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ.एकता ताम्रकार , हेमकान्ति बंजारे जयंत साहू और अन्य लोग भी मौजूद रहे जिनका इस कार्यक्रम में विशेष योगदान रहा और किसानो को विभिन्न तरह की जानकारियां दी। और तो और एक एक दिन आकर किसानों को खेती में होने वाले केंचुआ खाद उत्पादन की बारीकियां बताई।कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने बताया कि आज के समय में खेती सबसे आसान भी है और मुश्किल भी है।जिनको पूरी जानकारी है उनके आसान है जिनको खेती की जानकारी नहीं है उनके लिए मुश्किल है।इसलिए बीच बीच में इस तरह का कार्यक्रम का आयोजन करके किसानों को प्रशिक्षण दिया जाता है। ताकि किसान पूरी तरह से जागरूक हो और पूरी तरह से प्रशिक्षित हो।
इस बीच कई किसानों ने अपनी जिज्ञासा पूरी करते हुए वैज्ञानिकों से पूछा कि खेती में कई तरह की समस्या होती है जिसका निराकरण नहीं हो पाता है।तब वैज्ञानिकों ने उसका उपाय बताया और किसानों को समझाया।
इस अवसर पर बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे जिन्हें कौशल विकास प्रशिक्षण का प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।इस अवसर पर कृषि विज्ञान केंद्र के सभी लोगों का सहयोग रहा।