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कोपरा जलाशय: छत्तीसगढ़ का पहला रामसर साइट — जल, जैव विविधता और भविष्य की सुरक्षा

बिलासपुर – छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में स्थित कोपरा जलाशय ने इतिहास रच दिया है। इसे राज्य का पहला रामसर साइट घोषित किया गया है। यह केवल एक सम्मान नहीं, बल्कि यह स्वीकारोक्ति है कि कोपरा जलाशय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण आर्द्रभूमि के सभी मानकों पर खरा उतरता है।

यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ के लिए पर्यावरण संरक्षण, जल प्रबंधन और जैव विविधता संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।

रामसर साइट क्या है?

रामसर साइट वह आर्द्र स्थल होता है जिसे रामसर कन्वेंशन (1971) के अंतर्गत अंतरराष्ट्रीय महत्व का दर्जा दिया जाता है।
इसका उद्देश्य है—

  • आर्द्रभूमियों का संरक्षण
  • जैव विविधता की रक्षा
  • सतत उपयोग को बढ़ावा

भारत रामसर कन्वेंशन का एक सक्रिय सदस्य है और देश में अब अनेक झीलें, जलाशय और दलदली क्षेत्र इस सूची में शामिल हैं।

कोपरा जलाशय: स्थान और स्वरूप

  • स्थान: बिलासपुर जिला, छत्तीसगढ़
  • प्रकार: मानव निर्मित जलाशय
  • जल स्रोत: वर्षा आधारित जलग्रहण क्षेत्र
  • उपयोग: सिंचाई, मत्स्य पालन, पेयजल, जैव संरक्षण

कोपरा जलाशय मानसून के समय जल संग्रह करता है और पूरे वर्ष क्षेत्र की पारिस्थितिकी को संतुलित बनाए रखता है।

रामसर साइट बनने के प्रमुख कारण

कोपरा जलाशय को रामसर मान्यता मिलने के पीछे कई वैज्ञानिक और पर्यावरणीय कारण हैं—

पक्षी विविधता का महत्वपूर्ण स्थल

  • स्थानीय और प्रवासी जलपक्षियों का आश्रय
  • सर्दियों में बड़ी संख्या में जलपक्षियों का आगमन
  • पक्षियों के प्रजनन और भोजन के लिए अनुकूल आवास

जलीय जैव विविधता

  • विभिन्न मछली प्रजातियाँ
  • जलीय वनस्पतियाँ
  • उभयचर और सूक्ष्म जीव

जल संरक्षण और भूजल पुनर्भरण

  • वर्षा जल संचयन
  • आसपास के क्षेत्रों में जलस्तर संतुलन
  • सूखा प्रभाव को कम करने में सहायक

मानव–प्रकृति सह-अस्तित्व

  • किसानों को सिंचाई सुविधा
  • मछुआरा समुदाय को आजीविका
  • ग्रामीण अर्थव्यवस्था का आधार

कृषि और ग्रामीण आजीविका पर प्रभाव
रामसर दर्जा मिलने से—

  • जलाशय का वैज्ञानिक प्रबंधन होगा
  • जल उपयोग में संतुलन और पारदर्शिता बढ़ेगी
  • मत्स्य पालन को संरक्षित और नियंत्रित स्वरूप मिलेगा
  • स्थानीय लोगों को स्थायी आजीविका के अवसर मिलेंगे

पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में महत्त्व
आज जब—

  • तापमान बढ़ रहा है
  • वर्षा अनियमित हो रही है
  • भूजल स्तर गिर रहा है

ऐसे समय में कोपरा जलाशय जैसे आर्द्र स्थल—

  • कार्बन अवशोषण
  • स्थानीय जलवायु को ठंडा रखने
  • जैविक संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

नई जिम्मेदारियाँ और चुनौतियाँ

रामसर साइट बनने के साथ कुछ जिम्मेदारियाँ भी जुड़ जाती हैं—

  • अतिक्रमण पर पूर्ण नियंत्रण
  • जल प्रदूषण रोकना
  • अवैज्ञानिक मत्स्य दोहन पर प्रतिबंध
  • गाद प्रबंधन
  • स्थानीय समुदाय की भागीदारी

अब कोपरा जलाशय केवल स्थानीय नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय धरोहर बन चुका है।

इको-टूरिज्म और शिक्षा की संभावनाएँ
भविष्य में कोपरा जलाशय—

  • बर्ड वॉचिंग केंद्र
  • पर्यावरण शिक्षा स्थल
  • रिसर्च और फील्ड स्टडी सेंटर
  • नियंत्रित इको-टूरिज्म हब के रूप में विकसित किया जा सकता है।

जैव विविधता और भविष्य की सुरक्षा का प्रतीक

कोपरा जलाशय का रामसर साइट बनना छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है। यह जलाशय अब केवल पानी का भंडार नहीं, बल्कि जीवन, जैव विविधता और भविष्य की सुरक्षा का प्रतीक बन चुका है।

यदि इसका संरक्षण वैज्ञानिक, सामुदायिक और संवेदनशील दृष्टिकोण से किया गया, तो कोपरा जलाशय आने वाली पीढ़ियों के लिए एक आदर्श मॉडल बनेगा।

अजीत विलियम्स, साइंटिस्ट (फॉरेस्ट्री), बीटीसी कॉलेज ऑफ़ एग्रीकल्चर एंड रिसर्च स्टेशन, बिलासपुर

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