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कछार में जनसुनवाई बनी जनविस्फोट, रेत माफियाओं के खिलाफ उबाल पर जनता…..गांव की रेत पर गांव का हक कछार के ग्रामीणों का ऐलान…

रेत माफिया को ठेका देने पर होगा उग्र आंदोलन ग्रामीणों ने दी चेतावनी

कछार की धरती पर गुंजा नारा ‘माफिया भगाओ गांव बचाओ’ खतरनाक…

बिलासपुर
शहर से चंद किलोमीटर की दूरी पर स्थित ग्राम पंचायत कछार में आज प्रशासन की जनसुनवाई का मंच, जनता के गुस्से का रणक्षेत्र बन गयारेत घाट को लेकर हुई सुनवाई में पांच गांवों की जनता एकजुट होकर ऐसे गरजी कि पूरी बैठक हिल उठी। ग्रामीणों ने कहा “हमारे गांव की रेत हमारे ही हक में रहनी चाहिए, ठेकेदारों के माफिया राज को अब नहीं सहेंगे”

दरअसल बुधवार को सुबह से ही कछार गांव के चौक-चौराहों पर माहौल गरमा चुका था।जहां जनसुनवाई का नाम सुनते ही सैकड़ों ग्रामीण नारों के साथ एकजुट हो गए।भीड़ इतनी जबरदस्त थी कि प्रशासन को मौके पर पुलिस बल और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था करनी पड़ी। जनसुनवाई में पहुंचे बिलासपुर के अतिरिक्त कलेक्टर शिवकुमार बनर्जी,जिन्होंने पूरे कार्यक्रम की निगरानी की।उनके साथ जिला प्रशासन के अधिकारी और पुलिस जवान चारों ओर सुरक्षा घेरे में तैनात थे।लेकिन जैसे ही रेतघाट की बात शुरू हुई, जनता फट पड़ी गांव के लोगों ने एक सुर में कहा “हम अपने घाट को बाहरी ठेकेदारों के हवाले नहीं करेंगे अगर घाट देना है तो पंचायत को दो, ताकि गांव खुद आत्मनिर्भर बने जनसुनवाई के दौरान ऐसा दृश्य था मानो कोई जनांदोलन चल रहा हो।गांव की महिलाएं, बुजुर्ग, नौजवान सब एकजुट थे।हर किसी की आवाज़ में सिर्फ एक मांग रेत घाट पंचायत को मिले, माफियाओं को नहीं ग्रामीणों ने मंच से प्रशासन पर भी सवाल दागे उन्होंने कहा कि जब पूरा गांव ठेके के खिलाफ है।फिर भी अगरअधिकारियों ने ठेकेदार को रेतघाट सौंप दिया तो यह जनता की नहीं, माफिया की सुनवाई कहलाएगी। इतना ही नहीं,

ग्रामीणों ने एक और चौंकाने वाला खुलासा किया।उन्होंने कहा कि अभी रेत घाट का ठेका मिला भी नहीं हैफिर भी ठेकेदार के गुर्गे गांव में घूम-घूमकर सरपंच और उपसरपंच को गोली मारने की धमकी दे रहे हैं।इससे गांव में डर और गुस्सा दोनों का माहौल है। उन्होंने कहा कि अगर प्रशासनिक प्रशासन जनता के विरोध में निर्णय देती है तो पूरा क्षेत्र की जनता कलेक्टर कार्यालय के समक्ष धरना प्रर्दशन करेगी।जब इस पूरे मामले पर अतिरिक्त कलेक्टर शिवकुमार बनर्जी से मीडिया ने सवाल किया,
तो उन्होंने बताया कि करीब 40 लोगों ने कैमरे के सामने अपना पक्ष रखा 10 लोगों ने लिखित आवेदन दिया, और कुछ ने सामूहिक आवेदन भी सौंपा है।बनर्जी ने भरोसा दिलाया कि जनता की हर राय को रिकॉर्ड किया गया है।और रिपोर्ट आरो ऑफिस के माध्यम से राज्य शासन को भेजा जायेगा।
अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन जनता की आवाज़ को सुनेगा?या फिर रेत माफियाओं की जेब से निकले नोटों की आवाज़ के आगे झुक जाएगा?कछार की जनसुनवाई आज सिर्फ एक बैठक नहीं रही यह बन गई है जनता के हक की हुंकार,रेत माफिया के खिलाफ जनता का एलान-ए-जंगअब नज़रें टिकी हैं जिला प्रशासन पर क्या वह ग्रामीणों के विश्वास को कायम रखेगा या फिर माफिया राज के सामने झुक जाएगा क्योंकि इस बार जनता ने कह दिया है।”अगर रेत घाट गया माफियाओं के हाथ, तो सड़कों पर उतरेगा पूरा गांव अब देखना होगा कि अधिकारी इस पर क्या निर्णय लेते हैं।

जनसुनवाई में पहुंचे ग्रामीण,जमकर किया हंगामा

जनसुनवाई में पहुंचे
ग्रामीणों के जमकर हंगामा मचाया और रेत घाट खुलने का विरोध किया,ग्रामीणों ने एक स्वर में कहा कि लगातार गुंडागर्दी बढ़ रही है और आतंक मचा रहे है।इसके बाद भी रेत घाट खुलेगा तो गुंडागर्दी बढ़ेगी।इसलिए किसी भी हाल में।जनसुनवाई नहीं होनी चाहिए और रेत घाट नहीं खुलना चाहिए।

वर्जन
जनसुनवाई का पुरी
तरह से विरोध किया गया है।रेत घाट खुलने से गुंडागर्दी बढ़ेगी और आतंक बढ़ेगा।इसलिए पूरे गांव वाले विरोध के रहे है।
राजेन्द्र साहू
जनपद पंचायत सदस्य)

वर्जन
रेत घाट का चलन बंद होना चाहिए,गांव में रेत घाट नहीं खुलना चाहिए।अन्यथा पूरे गांव वाले मिलकर आंदोलन करेंगे।
अयोध्या देवांगन सरपंच लोफंदी

वर्जन
रेत घाट नहीं खुलना चाहिए,इसका पूरे गांव वाले विरोध करते है।
रेत घाट चलाने वाले।माफिया गुंडागर्दी करते है जिससे जान का खतरा बना हुआ है।

रामकुमार लहरे (ग्रामीण)

वर्जन
जनसुनवाई हुई है जिसमें 40 लोगो ने पक्ष समर्थन और विरोध किया है।इसके अलावा10 लोगो ने लिखित शिकायत किया है।

शिव कुमार बनर्जी
अतिरिक्त कलेक्टर बिलासपुर

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