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17 बच्चों की शिक्षा की संपूर्ण जिम्मेदारी लेने की घोषणा

बिलासपुर। 14 अगस्त की पावन सुबह, स्वतंत्रता दिवस की पूर्व बेला पर,पायल एक नया सवेरा वेलफेयर फाउंडेशन एवं छत्तीसगड़ प्रांतीय अग्रवाल संगठन बिलासपुर महिला इकाई द्वारा मोहंती गर्ल्स स्कूल में एक प्रेरणादायक और भावनात्मक कार्यक्रम का आयोजन किया गया।कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य था शिक्षा को हर बच्चे का अधिकार बनाना।मुख्य अतिथि विधायक शुशांत शुक्ला ,
विशिष्ट अतिथि विजय अग्रवाल एवं सुशील अग्रवाल ,
और विशेष अतिथि आशा अग्रवाल एवं पूनम श्रीवास्तव ने अपनी उपस्थिति से कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। इस अवसर पर 17 बच्चों की शिक्षा की संपूर्ण जिम्मेदारी लेने की घोषणा की गई।


इन बच्चों की किताबें, फीस और अन्य शैक्षणिक आवश्यकताएँ फाउंडेशन द्वारा पूरी की जाएँगी।
साथ ही, मुख्य अतिथि के हाथों से बच्चों को स्कूल बैग और कॉपी-किताबें भी भेंट की गईं,
ताकि वे अपने नए सत्र की शुरुआत उत्साह और आत्मविश्वास से कर सकें।
इस मौके पर फाउंडेशन ने विशेष रूप से
श्रीराम फाउंडेशन, विशाल बजाज, लोकेश ठक्कर, एवं राहुल अग्रवाल के
निस्वार्थ सहयोग और मार्गदर्शन के लिए आभार व्यक्त किया।
इनके सहयोग ने न केवल संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की बल्कि पूरी पहल को सही दिशा और मजबूती भी दी।
इनका समर्पण इस मुहिम की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरा।

विधायक सुशांत शुक्ला ने कहा कि पायल लाठ मेरी बहन हैं और मैं हमेशा ऐसे कार्य को सराहूँगा।
मैं हर बच्चे की शिक्षा के लिए सहयोग करने के लिए हमेशा साथ खड़ा रहूँगा।

फाउंडेशन की अध्यक्ष पायल लाठ ने भावुक होते हुए बोली असली आज़ादी तब होगी, जब इस देश का कोई भी बच्चा अज्ञान के अंधेरे में नहीं रहेगा।
हम तब तक नहीं रुकेंगे, जब तक हर घर में शिक्षा का दीप नहीं जलता।आज ये 17 बच्चे हमारे सपनों का हिस्सा हैं, कल ये ही बच्चे भारत का उज्ज्वल भविष्य बनेंगे।
हमें केवल तिरंगे से प्रेम नहीं, बल्कि उस हर बच्चे से प्रेम करना होगा जो इस तिरंगे के नीचे सपने देख रहा है।उपाध्यक्ष प्रशांत सिंह राजपूत, सचिव चंचल सलूजा,
तथा अप्पू केसरी ने भी इस मुहिम में विशेष योगदान दिया।
कार्यक्रम में प्राचार्य अंजना लाल,
प्राची बरगाह, अनिल जेम्स, एन. लदेर, एच. मसीह, ए. एफ. हाशमी, एस. कटारे, और एम. के. वर्मा की उपस्थिति ने इसे और सशक्त बनाया।
कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ,
और उपस्थित सभी लोगों ने यह संकल्प लिया कि वे शिक्षा की इस मशाल को
हर गली, हर गाँव और हर घर तक पहुँचाएँगे।

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