3 महीने से छात्रवृत्ति बंद,राजीव युवा उत्थान योजना के छात्र भटकते रहे कलेक्ट्रेट में

आदिवासी मुख्यमंत्री के शासन में आदिवासी युवाओं के साथ कैसा न्याय
बिलासपुर।राजीव युवा उत्थान योजना के छात्र-छात्राओं को पिछले तीन महीनों से छात्रवृत्ति न मिलने से गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। सिविल सेवा की तैयारी कर रहे ये आदिवासी और आर्थिक रूप से कमजोर अभ्यर्थी सोमवार को बड़ी संख्या में कलेक्ट्रेट और आदिम जाति कल्याण विभाग पहुंचे, लेकिन लंबा इंतज़ार करने के बाद भी उन्हें स्पष्ट जवाब नहीं मिल सका। आदिवासी मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के कार्यकाल में इन छात्रों की परेशानियों ने कई सवालों को जन्म दे दिया है।
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में राजीव युवा उत्थान योजना के चयनित अभ्यर्थियों ने तीन माह से बंद छात्रवृत्ति को लेकर विरोध जताया। अभ्यर्थियों ने कहा कि वे दिल्ली आईएएस अकादमी बिलासपुर में सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं और योजना के नियमों के अनुसार उन्हें मासिक छात्रवृत्ति मिलनी चाहिए, जिससे किराया, भोजन और अध्ययन सामग्री का खर्च चल सके।
अभ्यर्थियों ने बताया कि अगस्त, सितंबर और अक्टूबर—लगातार तीन महीनों से छात्रवृत्ति जारी न होने से स्थिति गंभीर हो गई है। कई छात्र किराया न दे पाने की वजह से कमरों से निकाले जाने की आशंका में हैं। छात्रों का कहना है कि वे ऐसे सामाजिक-आर्थिक वर्ग से आते हैं जहां परिवार पढ़ाई का खर्च उठाने में सक्षम नहीं है।
कलेक्ट्रेट में पहुंचे छात्रों की संख्या काफी अधिक थी। राहुल कुमार, रूपक कुमार, नंद कुमार, अमल सिंह, मुरारी रानी, उमाशंकर गिरधारी, किशोर, तीरू, धरम सिंह, भीषण, आकांक्षा, जयश्री, सीमा बैकुरा, नंदलाल सिंह, इमरान, दीपक, देवेंद्र सहित 20 से अधिक छात्रों ने सामूहिक आवेदन देकर तत्काल छात्रवृत्ति जारी करने की मांग रखी।
अभ्यर्थियों ने बताया कि संस्थान में कक्षाएं नियमित चल रही हैं, मगर छात्रवृत्ति बंद होने के बाद पढ़ाई गंभीर रूप से प्रभावित हुई है। छात्रों द्वारा दी गई लिखित शिकायत में कहा गया—हम आदिवासी और कमजोर आर्थिक वर्ग से हैं। छात्रवृत्ति बंद होने से पढ़ाई जारी रखना मुश्किल हो रहा है।
आदिम जाति कल्याण विभाग और कलेक्ट्रेट में अधिकारियों से मुलाकात की कोशिशों के बाद भी छात्रों को स्पष्ट समाधान नहीं मिला। छात्र मायूस होकर लौट गए। इस स्थिति ने आदिवासी बहुल योजनाओं के क्रियान्वयन की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।