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गर्मी का कहर,बिलासपुर में गहराया जल संकट…

सूखते हैंडपंप, बढ़ती परेशानी- पानी पर संकट भारी…

प्यासा शहर,पानी के लिए भटकने को मजबूर लोग….

पानी की किल्लत से जूझता शहर, कब मिलेगी राहत?

बिलासपुर।गर्मी की तपिश बढ़ते ही पानी का संकट भी गहराने लगा है। बिलासपुर सहित कई शहरों में जल संकट अब लोगों की सबसे बड़ी चिंता बन चुका है। लगातार बढ़ते तापमान ने हालात और भी गंभीर कर दिए हैं।

दरअसल जैसे-जैसे गर्मी बढ़ रही है, वैसे-वैसे जलस्तर तेजी से नीचे जा रहा है। हालात ऐसे हैं कि जो पानी पहले 80 से 100 फीट में मिल जाता था, अब उसके लिए 300 से 400 फीट तक बोरिंग करनी पड़ रही है। इसका सीधा असर हैंडपंप और बोरवेल पर दिख रहा है। कई इलाकों में ये पूरी तरह सूख चुके हैं, तो कहीं पानी की सप्लाई भी बाधित हो रही है। लोग पानी के लिए भटकने को मजबूर हैं।इसी गंभीर स्थिति को देखते हुए प्रशासन भी अब पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है।जल संकट से निपटने के लिए प्रशासन ने ठोस कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। खास तौर पर बारिश के पानी के संरक्षण पर जोर दिया जा रहा है। इसके लिए 154 गांवों को चिन्हित किया गया है, जहां विशेष योजना के तहत काम किया जाएगा। उद्देश्य साफ है।जलस्तर को बढ़ाना और भविष्य में इस संकट को कम करना। सिर्फ योजनाएं ही नहीं, बल्कि लोगों की भागीदारी भी इस लड़ाई में बेहद जरूरी है। यही वजह है कि प्रशासन गांव-गांव में जागरूकता अभियान चला रहा है। लोगों को पानी बचाने, उसका सही उपयोग करने और दुरुपयोग से बचने की अपील की जा रही है।अगर अभी नहीं संभले, तो आने वाले दिनों में ये जल संकट और भी विकराल रूप ले सकता है। इसलिए जरूरत है—हर बूंद की कीमत समझने की।

गर्मी में जल संकट से निपटने नगर निगम सख्त, बोर खनन पर रोक

गर्मी की शुरुआत के साथ ही शहर में जलस्तर में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है, जिसे देखते हुए नगर निगम ने अब सख्ती बरतनी शुरू कर दी है। मेयर-इन-काउंसिल की बैठक में महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए नगर निगम ने उन सभी क्षेत्रों में बोर खनन पर प्रतिबंध लगा दिया है, जहां से निगम द्वारा पेयजल की आपूर्ति की जाती है।दरअसल, इन क्षेत्रों में नगर निगम के पंप हाउस संचालित हैं, जो शहरवासियों को नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित करते हैं। यदि इन स्थानों पर निजी बोरिंग की अनुमति दी जाती है, तो इससे भूजल स्तर और तेजी से नीचे जा सकता है, जिससे निगम की जल आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है। इसी को ध्यान में रखते हुए आगामी चार महीनों तक इन इलाकों में बोर खनन पर पूर्ण प्रतिबंध लागू किया गया है।नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि यह कदम शहर में जल संकट को नियंत्रित करने और आम जनता को निर्बाध पानी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से उठाया गया है।

सिरगिट्टी वार्ड नंबर 11 में गंदे पानी से हाहाकार,7 दिनों से नाली जाम

सिरगिट्टी के वार्ड नंबर 11 में पिछले सात-आठ दिनों से गंदे पानी की गंभीर समस्या बनी हुई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि घरों के सामने नाली खोद दी गई है, लेकिन पानी की निकासी नहीं हो पा रही है, जिससे गंदा पानी जमा हो गया है। हालात यह हैं कि आसपास के बोरवेल का पानी भी दूषित हो गया है और लोगों को पीने के लिए साफ पानी नहीं मिल पा रहा है।गंदे पानी के कारण क्षेत्र में बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। बच्चों की तबीयत खराब हो रही है और मच्छरों का प्रकोप भी तेजी से बढ़ा है। बदबू के चलते लोगों का घरों में रहना मुश्किल हो गया है। मजबूरी में लोग दूर-दूर से पानी लाकर अपनी जरूरतें पूरी कर रहे हैं, जिससे उनकी दिनचर्या पूरी तरह प्रभावित हो गई है।

पार्षद को शिकायत करने के बाद भी नहीं हुई सुनवाई

स्थानीय निवासियों ने बताया कि उन्होंने कई बार क्षेत्र की पार्षद एवं एमआईसी मेंबर केशरी इंगोले से शिकायत की, लेकिन अब तक समस्या का कोई समाधान नहीं हुआ है। लोगों का आरोप है कि पार्षद से संपर्क करने पर केवल आश्वासन मिलता है, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।वार्डवासियों ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इतनी गंभीर समस्या के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है।लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द नाली की सफाई और पानी निकासी की व्यवस्था कराई जाए, ताकि क्षेत्रवासियों को राहत मिल सके और बीमारी फैलने का खतरा टल सके।

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