गांजा तस्कर के नाबालिग बेटे को पैसा लेकर छोड़ने का गंभीर आरोप….एसएसपी की कार्रवाई से मचा हड़कंप
एसएसपी की कार्रवाई से हवलदार और आरक्षक
हुए निलंबित, टीआई
से माँगा गया स्पष्टीकरण
80 हजार लेकर थाना से छोड़ने का लगा आरोप
बिलासपुर । एक बार फिर खाकी की साख पर सवाल खड़े करने वाली घटना सामने आई है। नशे के खिलाफ अभियान का दम भरने वाली पुलिस के ही एक हिस्से पर 80 हजार रुपये लेकर गांजा तस्करी में पकड़े गए नाबालिग को छोड़ने का आरोप लगा है। हालाकि मामला सामने आते ही एसएसपी ने ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए हवलदार और आरक्षक को निलंबित कर दिया है और जांच के आदेश दिए है।जबकि थाना प्रभारी से स्पष्टीकरण मांगा गया है।
मिली जानकारी के अनुसार, कोटा के रानीसागर मे रहने वाले
एक गांजा तस्करी के आरोपी को कोटा की पुलिस पकड़ने गई थी जिसमें मुख्य आरोपी नहीं मिला बल्कि उसका नाबालिग बेटा
पुलिस को देखकर गांजा का पौधा लेकर भागते हुए मिला,जिसे दौड़ाकर पकड़ा गया।
लेकिन मुख्य आरोपी के चक्कर में पुलिस ने नाबालिग को छोड़ दिया।जिसमें ग्रामीणों
और परिजनों के आरोप लगाया है कि पैसा लेकर नाबालिग को छोड़ा गया है।
जिसके बाद से पुलिस पर गंभीर आरोप लगे हुए है।और उसके बाद मामला एसएसपी तक पहुंच गया।जिससे एसएसपी ने नाराजगी जाहिर की है।
13 साल का नाबालिग बेटा, 500 ग्राम गांजा और 80 हजार की डील
शनिवार को कोटा पुलिस ने रानीसागर गांव में एक कथित गांजा व्यापारी के 13 वर्षीय बेटे को पकड़ा। उसके पास से 500 ग्राम गांजा बरामद किया गया। नियमों के तहत किशोर न्याय कानून के तहत कार्रवाई होनी चाहिए थी, लेकिन आरोप है कि थाने में ही 80 हजार रुपये की मांग कर दी गई।
परिवार ने गांव के एक व्यक्ति से कर्ज लेकर 80 हजार रुपये जुटाए और थाने पहुंचाए। आरोप है कि रकम मिलते ही नाबालिग को गांजे सहित छोड़ दिया गया। न तो विधिवत जब्ती की कार्रवाई हुई, न ही किशोर बोर्ड के समक्ष पेशी।
रविवार सुबह खुलासा, डीएसआर मीटिंग में फटकार
रविवार सुबह मामला एसएसपी रजनेश सिंह तक पहुंचा। डीएसआर मीटिंग में एसएसपी ने सख्त रुख अपनाते हुए तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। हवलदार प्रकाश दुबे और आरक्षक सोमेश्वर को निलंबित कर दिया गया। जबकि थाना प्रभारी नरेश चौहान से लिखित स्पष्टीकरण तलब किया गया है।
एसएसपी के निर्देश पर पुलिस टीम आरोपी के घर पहुंची, लेकिन वह फरार मिला। दिनभर सर्चिंग के बावजूद पुलिस उसे पकड़ नहीं सकी। अब मोबाइल लोकेशन ट्रेस की जा रही है।
अवैध शराब में भी ‘कमाई’ का आरोप
बता दे कि कोटा थाना पर पहले भी उगाही के आरोप लगते रहे हैं। अवैध शराब बेचने वालों की धरपकड़ के नाम पर मोटी रकम लेकर छोड़ने की शिकायतें वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंच चुकी हैं। एक मामले में अफसरों की फटकार के बाद वसूली गई रकम वापस कराई गई थी। इसके बावजूद हालात नहीं बदले—और अब गांजा मामले ने खाकी की छवि पर नया दाग लगा दिया है।
सवालों के घेरे में पूरी थानेदारी
इस पूरे घटनाक्रम में थाना प्रभारी, हवलदार और आरक्षक की भूमिका संदिग्ध बताई गई है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब एसएसपी खुद नशे के खिलाफ अभियान चला रहे हैं, तब थाना स्तर पर ऐसे सौदे कैसे हो रहे है। क्या बिना मिलीभगत के नाबालिग को गांजे सहित छोड़ा जा सकता है
खाकी की साख दांव पर है। एक ओर नशे के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की बात, दूसरी ओर 80 हजार में कानून का सौदा—यह दोहरा चेहरा अब उजागर हो चुका है।
गांजा के तस्करी करने वाले आरोपी को पकड़ने गये थे लेकिन नाबालिग पकड़ाया
हवलदार प्रकाश दुबे के बताया कि मुखबिर की सूचना पर गांजा की तस्करी करने वाले आरोपी को पकड़ने के लिए गये हुए थे।लेकिन आरोपी नहीं मिला बल्कि उसका नाबालिग बेटा भागने लगा जिसे पकड़ा गया।थाना लाया गया और नाबालिग होने के कारण उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई बल्कि थाना में परिजनों को बुलाकर छोड़ दिया गया ।पैसा लेने का आरोप सरासर गलत है।बेजवाह फँसाने यार बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। ताकि छवि धूमिल हो सके।
एसएसपी बोले,नाबालिग को छोड़ने के एवज में हुई कार्रवाई
एसएसपी रजनेश सिंह का कहना है कि हवलदार और आरक्षक
की शिकायत मिली थी कि गांजा के पौधा लगाने वाले आरोपी को पकड़ने गये थे लेकिन आरोपी फरार हो गया और नाबालिग भागते हुए पकड़ा गया।पुलिस ने नाबालिग को बिना कार्रवाई के छोड़ दिया है।जिसके कारण दोनों को निलंबित कर दिया गया है और टीआई से स्पष्टीकरण मांगा गया है।जिसकी जांच भी जारी है।इस तरह की लापरवाही बरतने वाले किसी भी पुलिस कर्मी को बरदाश्त नहीं किया जायेगा।