गांव-गांव झोपड़ी झोपड़ी जाने वाला समस्त वैदान्ती जगत में अगर कोई साधू हुआ तो वे थे स्वामी सहजानंद सरस्वती-राघवशरण शर्मा

स्वामी सहजानंद सरस्वती के जन्म जयंती समारोह के अवसर पर नेत्र परिक्षण शिविर आयोजित किया गया।
बिलासपुर ।स्वामी सहजानंद सरस्वती भुमिहार ब्राम्हण समाज बिलासपुर द्वारा 22 फरवरी को महमंद स्थित सामाजिक भवन में सहजानंद सरस्वती जन्म जयंती समारोह मनाया गया इस अवसर पर नेत्र परिक्षण शिविर विनायक नेत्रालय के डॉ. ललित माखिजा एवं डॉ. सुधा सिंह के उपस्थित में किया गया। जन्म जयंती समारोह के मुख्य अतिथि वाराणसी के प्रसिद्ध लेखक एवं साहित्यकार डॉ. राघव शरण शर्मा थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता संरक्षक आरपी सिंह ने की। विशिष्टि अतिथि के रूप में समाज के अध्यक्ष नवीन सिंह सीआरपीएफ के कमांडेड नीलकमल भारद्वाज डॉ. केएन चौधरी एनएन शर्मा रमेश कुमार सिंह युवा उद्यमी आदित्य सिंह रहे। प्रारंभ में भगवान परशुराम स्वामी सहजानंद जी के चित्र पर फूल माला अर्पित कर दीप प्रज्जवलन कर कार्यक्रम का शुभांरभ हुआ। कार्यक्रम का स्वागत भाषण समाज के अध्यक्ष नवीन सिंह ने दिया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. सीमा राय एवं आभार प्रदर्शन प्रेमनाथ कमलेश ने किया। सचिव राजीव कुमार द्वारा मुख्य अतिथि को सौपे गये सम्मान पत्र का वाचन किया गया।
जन्म जयंती समारोह में मुख्य वक्ता एवं मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए डॉ. राघव शरण शर्मा ने कहा कि स्वामी सहजानंद के जीवन को अलग-अलग भागो में देखा जाना चाहिए। वैदान्ती साधू दण्डी स्वामी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी विचारक किसान नेता के रूप में उन्होंने समय समय पर पस्थिति अनुसार कार्य किया। डॉ. शर्मा ने कहा कि गांव गांव छोपड़ी छोपड़ी जाने वाला समस्त वैदान्ती जगत में अगर कोई साधू हुआ तो वे साधू सहजानंद थे। वे किसान रेहणीवाला गरीब मजदूरो के घर पहुंचकर उन्हे संगठित किया और उनकी चेतना विकसित की। चेतना विकसित होने के बाद समस्त लोग स्वतंत्रता संग्राम में भाग लिये। डॉ. शर्मा ने स्वामी जी के विभिन्न पहलुओ पर भी अपने विचार रखे। आजादी के इतिहास में ब्राम्हण समाज मुस्लिम समाज की भूमिका सहित स्वतंत्रता संग्राम सेनानियो विशेषकर महात्मा गांधी पण्डित नेहरू चन्द्रशेखर आजाद भगत सिंह सावरकर आदि पर अपने विचार उन्होने रखे। कार्यक्रम के अध्यक्ष आरपी सिंह ने कहा कि बिलासपुर समाज का नाम स्वामी सहजानंद सरस्वती के नाम पर रखा गया ताकि भूमिहार ब्राम्हण सहित अन्य समाज के लोग भी स्वामी जी के विचारो को पढ़़े जाने और आत्मसात करे। उन्होंने डॉ. राघव शरण शर्मा सहित सभी अतिथियों का आभार प्रगट किया और कहा कि प्रतिवर्ष हम स्वामी जी के जन्म जयंती के अवसर पर ऐसे आयोजन करते रहेंगे। समाज के अध्यक्ष नवीन सिंह ने सभी लोगों से अपील की कि वक्ता की बात हम सब आत्मसात करें और गौरवशाली इतिहास से परिचित रहें।
इस अवसर पर वृहद नेत्र परिक्षण शिविर का भी आयोजन किया गया जिसमें ग्रामीणों ने नेत्र परिक्षण कराया लगभग 100 लोगों ने नेत्र परिक्षण कराया डॉक्टरों की टीम ने सभी को परची बनाकर दिया समाज ने यह निर्णय लिया है कि कुछ जरूरतमंद लोगो को चश्मा भी बनवाकर प्रदान किया जावेगा। मोतियाबिंद के आपरेशन में भी जरूरतमंद लोगों को मदद कि जावेगी।
इस अवसर पर प्रमुख रूप से समाज के अमीय कुमार राय अजय कुमार स्वतंत्र कुमार डॉ. डी.डी.राय, एन के राय, पीएन राय, एस.के राय, अभयनारायण राय, पंकज कुमार, मिथलेश कुमार, मुकेश कुमार राजीव कुमार सिंह, अजय राय, शशि रंजन, विरेन्द्र, शशिभूषण, मनोज शर्मा, कुंदन सिंह, आशुतोष प्रियदर्शी, रेवतीरमन सिंह, विजय प्रकाश राय, सुजीत किशोर, अभिराम कुमार, धर्मेन्द्र कुमार, अजय कुमार, रविकांत सिंह, प्रमोद कुमार, अभिषेक रंजन प्रवीण कुमार, एस.एन सिंह, मुरारी कुमार, पंकज कुमार प्रभात भूषण आदि उपस्थित थे।
समाज के उपाध्यक्ष अभयनारायण राय ने बताया कि डॉ. राघव शरण शर्मा वरिष्ठ साहित्यकार लेखक है उन्होंने इंजीनियरिंग की पड़ाई की फिर साहित्य सेवा में लग गये। भारतीय स्वतंत्रता की इतिहास को लेकर उन्होंने समकालीन एवं प्रसिद्ध लेखको की किताबों का अध्ययन किया उन्होंने स्वयं बड़ी संख्या में किताबों का संपादन एवं लेखन किया। पूर्व में दुर्ग एवं रायपुर साहित्य सम्मेलनों में आ चुके है बिलासपुर समाज के आमंत्रण पर पहलीबार पहुंचे थे। राघव शरण शर्मा के द्वारा लिखि एवं संपादित की गई प्रमुख पुस्तके स्वामी सहजानंद सरस्वती रत्नावली, आचार्य नरेन्द्र देव, जंगे आजादी में मुस्लिम समाज, भारत के प्रख्यात ऋषि, जंगे आजादी में ब्राम्हण समाज, शहिद भगत सिंह अंछुवे पहलु, किसान आंदोलन का संक्षिप्त इतिहास, ब्रम्हर्षी वंश विस्तार क्रांति और संयुक्त मोर्चा, किसान पाठशाला, महानायक सुभाषचंद्र बोस, युग पुरूष डॉ. श्री कृष्ण सिंह प्रबज राष्ट्रवादी, मेरा जीवन संघर्ष, वृहदत्तर ब्राम्हण समाज आदि प्रमुख है।