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केरला का सबसे बड़ा त्योहार ओणम धूमधाम से मनाया गया

पारंपरिक व्यंजन का विशेष महत्व

बिलासपुर। केरल का राजकीय पर्व ओणम इस बार भी पूरे देश के साथ बिलासपुर में रहने वाले मलयाली समाज द्वारा हर्ष और उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर वामन देव और राजा महाबली की पूजा-अर्चना की गई। घरों में फूलों की सजावट के साथ पारंपरिक व्यंजन परोसे गए। इस दौरान श्रद्धा और भक्ति का विशेष माहौल देखने को मिला।

भारत विशालकाय देश है और यहां उत्तर से दक्षिण तक विभिन्न परंपराएं और त्यौहार अपनी अलग पहचान रखते हैं। इन्हीं में से एक है ओणम,जो सुदूर दक्षिण भारत के केरल राज्य में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। यह पर्व 10 दिनों तक चलता है। इस वर्ष 30 अगस्त से शुरू होकर 5 सितंबर को तिरुवोनम के साथ इसका समापन हुआ। ओणम पर्व के पीछे पौराणिक कथा जुड़ी हुई है। मान्यता है कि दैत्यराज महाबली अपनी दानशीलता और पराक्रम के लिए प्रसिद्ध थे। उनकी परीक्षा लेने के लिए भगवान विष्णु ने वामन अवतार लिया और उनसे तीन पग भूमि की मांग की। राजा बलि ने सहर्ष तीन पग भूमि देने की स्वीकृति दे दी।भगवान वामन ने दो कदमों में ही धरती और आकाश को नाप लिया। तीसरा पग रखने के लिए स्थान न बचा तो राजा बलि ने अपना सिर आगे कर दिया। भगवान वामन ने तीसरा पग उनके सिर पर रखकर उन्हें पाताल लोक भेज दिया। लेकिन उनकी दानशीलता से प्रसन्न होकर वरदान दिया कि वे हर वर्ष ओणम पर अपनी प्रजा से मिलने पृथ्वी पर आएंगे। इसी कारण से यह पर्व आज भी धूमधाम से मनाया जाता है।ओणम को नई फसल के आगमन का भी पर्व माना जाता है। यह केरल का फसल उत्सव है और साथ ही चिंगम महीने से वहां नए वर्ष की शुरुआत भी होती है। इस दौरान पूजा-पाठ, फूलों की विशेष सजावट, पुक्कलम और पारंपरिक व्यंजनों का विशेष महत्व होता है। केले के पत्ते पर परोसे जाने वाले इन व्यंजनों को “ओणम साध्य” कहा जाता है। इस पर्व पर केरल में अनेक सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं। खासकर नौका दौड़ और नृत्य-गीत ओणम उत्सव की शान माने जाते हैं। लोग एक-दूसरे से मिलकर त्यौहार की बधाई देते हैं और राजा बलि के स्वागत में उल्लास का माहौल बनाते हैं।

मलयाली समाज ने इस पर्व को पूरी परंपरा और उत्साह के साथ मनाया

केरल से दूर बिलासपुर में भी मलयाली समाज ने इस पर्व को पूरी परंपरा और उत्साह के साथ मनाया। भारतीय नगर स्थित श्री अय्यप्पा मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की गई। वहीं, मलयाली परिवारों के घरों में फूलों से सजावट की गई और वामन देव तथा महाबली की पूजा कर पारंपरिक शाकाहारी व्यंजन परोसे गए। खास बात यह है कि ओणम केवल हिंदू समुदाय तक सीमित नहीं है, बल्कि केरल में रहने वाले मुस्लिम और ईसाई परिवार भी इसे अपनी सांस्कृतिक विरासत के रूप में मनाते हैं। यही विशेषता इसे अद्वितीय और सामाजिक एकता का प्रतीक बनाती है।

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