गेहूं उत्पादन तकनीक विषय पर एक दिवसीय कृषक प्रशिक्षण संपन्न

क्षेत्रीय कृषि अनुसंधान केंद्र, बिलासपुर की पहल से किसानों को मिली वैज्ञानिक खेती की नई दिशा
बिलासपुर। किसानों की आय वृद्धि, फसल विविधीकरण तथा वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से क्षेत्रीय कृषि अनुसंधान केंद्र, बिलासपुर में संचालित अखिल भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान परियोजना के अंतर्गत अनुसूचित जनजाति उपयोजना के तहत “गेहूं उत्पादन तकनीक” विषय पर एक दिवसीय कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम में ग्राम भैंसाझार एवं पचपेड़ी सहित आसपास के क्षेत्रों से लगभग 60 गेहूं उत्पादक कृषकों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. अनिल खिप्पल, प्रमुख वैज्ञानिक (सस्य विज्ञान), भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद–भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान, करनाल रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. संजय कुमार वर्मा, मुख्य वैज्ञानिक द्वारा की गई।

विशिष्ट अतिथियों के रूप में डॉ. अमित शर्मा, प्रमुख वैज्ञानिक (अनुवांशिकी एवं पादप प्रजनन), भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान, करनाल, डॉ. जे. बी. सिंह, कृषि अनुसंधान परिषद क्षेत्रीय केंद्र, इंदौर, डॉ. के. के. मिश्रा, वैज्ञानिक (पादप रोग विज्ञान), कृषि महाविद्यालय पवारखेड़ा, डॉ. डी. प्रशांत बाबू, वरिष्ठ वैज्ञानिक (अनुवांशिकी एवं पादप प्रजनन), भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान, करनाल, डॉ. गीत शर्मा, वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख, कृषि विज्ञान केंद्र, बिलासपुर तथा प्रगतिशील कृषक राघवेंद्र सिंह चंदेल उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ किया गया।
गेहूं अनुसंधान परियोजना की उपलब्धियों पर विस्तृत प्रकाश
अपने स्वागत एवं अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. संजय कुमार वर्मा ने केंद्र में संचालित अखिल भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान परियोजना की उपलब्धियों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए बताया कि क्षेत्रीय परिस्थितियों के अनुरूप उच्च उत्पादकता एवं जलवायु सहनशील गेहूं किस्मों के विकास पर निरंतर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि केंद्र द्वारा समय पर बोनी के लिए उपयुक्त किस्मों के साथ-साथ विलंबित बोनी तथा सीमित सिंचाई परिस्थितियों में बेहतर प्रदर्शन करने वाली किस्मों के परीक्षण एवं मूल्यांकन किए जा रहे हैं।
उन्होंने कृषकों को जानकारी दी कि बदलती जलवायु परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए ऐसी गेहूं किस्मों के विकास पर विशेष जोर दिया जा रहा है जो तापमान वृद्धि, रोग-व्याधियों तथा नमी तनाव को सहन करने में सक्षम हों। डॉ. वर्मा ने बताया कि केंद्र में विकसित एवं परीक्षणाधीन उन्नत गेहूं किस्में न केवल अधिक उत्पादन देने में सक्षम हैं बल्कि उनकी दाना गुणवत्ता भी बेहतर है, जिससे किसानों को बाजार में बेहतर मूल्य प्राप्त हो सकता है।
उन्होंने आगे बताया कि धान आधारित कृषि प्रणाली वाले क्षेत्रों में धान कटाई के बाद कम समय में बोनी योग्य तथा शीघ्र परिपक्व होने वाली गेहूं किस्मों पर विशेष अनुसंधान किया जा रहा है, जिससे छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में धान-गेहूं फसल प्रणाली को सफलतापूर्वक अपनाया जा सके। साथ ही किसानों को उन्नत बीज उत्पादन, गुणवत्ता बीज उपलब्धता तथा वैज्ञानिक उत्पादन तकनीकों के माध्यम से उत्पादन लागत कम करने एवं लाभ बढ़ाने के उपायों की जानकारी दी जा रही है।
डॉ. वर्मा ने किसानों से अपील की कि वे प्रमाणित बीजों का उपयोग करें तथा अनुसंधान केंद्र द्वारा विकसित तकनीकों को अपनाकर गेहूं उत्पादन को लाभकारी व्यवसाय के रूप में विकसित करें।
प्रगतिशील कृषक राघवेंद्र सिंह चंदेल ने कहा कि बिलासपुर जिले की जलवायु एवं मिट्टी गेहूं उत्पादन के लिए अत्यंत अनुकूल है और किसानों को फसल विविधीकरण अपनाते हुए गेहूं को अपनी खेती का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाना चाहिए।
मुख्य अतिथि डॉ. अनिल खिप्पल ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि सफल कृषि के लिए जलवायु, भूमि की उर्वरता तथा जल उपलब्धता की वैज्ञानिक समझ आवश्यक है। उन्होंने संतुलित पोषण प्रबंधन एवं जल संरक्षण को उत्पादन वृद्धि का आधार बताया।
डॉ. जे. बी. सिंह ने बोनी अवधि एवं उपयोग के अनुसार किस्म चयन के महत्व पर जोर दिया। डॉ. अमित शर्मा ने मृदा स्वास्थ्य एवं जैविक कार्बन की भूमिका को किसानों की समृद्धि से जोड़ा। डॉ. गीत शर्मा ने कम अवधि धान के साथ धान-गेहूं प्रणाली अपनाने पर बल दिया, जिससे जल संरक्षण एवं आय वृद्धि दोनों संभव हैं।
तकनीकी सत्र में डॉ. विनोद कुमार निर्मलकर, डॉ. प्रमेंद्र कुमार केसरी, डॉ. यशपाल सिंह निराला, डॉ. अवनीत कुमार एवं डॉ. दिनेश कुमार पांडेय ने रोग प्रबंधन, उर्वरक प्रबंधन, कीट नियंत्रण, उन्नत किस्मों तथा उत्पादन तकनीकों की विस्तृत जानकारी दी। प्रशिक्षण से पूर्व ड्रोन तकनीक द्वारा कीटनाशक एवं उर्वरक छिड़काव का जीवंत प्रदर्शन भी किया गया।
कार्यक्रम का सफल संचालन वैज्ञानिक अजीत विलियम्स तथा आभार प्रदर्शन दिनेश कुमार पांडेय द्वारा किया गया। आयोजन की सफलता में तकनीकी सहायक माधुरी ग्रेस मिन्ज सहित केंद्र के वैज्ञानिकों, कर्मचारियों एवं छात्र-छात्राओं का सराहनीय सहयोग रहा।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम किसानों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ते हुए उत्पादन वृद्धि एवं सतत कृषि की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।