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गौ विज्ञान परीक्षा का सफल आयोजन, छात्रों में दिखा उत्साह और आत्मविश्वासकृषि महाविद्यालय बिलासपुर की पहल

बिलासपुर – बैरिस्टर ठाकुर छेदीलाल कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र में दिनांक 19 जनवरी 2026 को गौ विज्ञान परीक्षा का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। यह परीक्षा अत्यंत सुव्यवस्थित, शांतिपूर्ण एवं अनुशासित वातावरण में संपन्न हुई, जिसमें छात्रों की उल्लेखनीय सहभागिता देखने को मिली।

इस परीक्षा में कृषि महाविद्यालय, बिलासपुर तथा कृषि महाविद्यालय, लोरमी (मुंगेली) के कुल 112 छात्र-छात्राओं ने पंजीकरण कराया था, जिनमें से लगभग 90 विद्यार्थियों ने परीक्षा में उपस्थिति दर्ज की। विशेष रूप से प्रथम वर्ष एवं चतुर्थ वर्ष के छात्र-छात्राओं की भागीदारी सर्वाधिक रही, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि गौ विज्ञान विषय के प्रति युवाओं की रुचि निरंतर बढ़ रही है।

परीक्षा के दौरान पर्यवेक्षक की भूमिका को डॉ. यशपाल सिंह निराला एवं डॉ. तहसीन असरफ ने अत्यंत कुशलता एवं जिम्मेदारी के साथ निभाया। उनके मार्गदर्शन में परीक्षा प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी एवं व्यवस्थित रही। परीक्षा केंद्र पर समयबद्धता, अनुशासन और शांत वातावरण बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई थीं।

परीक्षा के पश्चात विद्यार्थियों में पूर्व वर्षों की तरह इस बार भी विशेष उत्साह और प्रसन्नता देखने को मिली। छात्रों ने आत्मविश्वास के साथ बताया कि इस वर्ष भी उनका महाविद्यालय जिला स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करेगा तथा राज्य स्तर पर चयनित होने वाले विद्यार्थियों में महाविद्यालय के छात्र प्रमुख रहेंगे। विद्यार्थियों का यह उत्साह उनके गंभीर अध्ययन और गौ विज्ञान विषय के प्रति बढ़ती समझ को दर्शाता है।

महाविद्यालय स्तर पर इस परीक्षा के नोडल अधिकारी के रूप में डॉ. यशपाल सिंह निराला, सहायक प्राध्यापक (कीट विज्ञान) एवं डॉ. विनोद कुमार निर्मलकर, सहायक प्राध्यापक (पौध रोग विज्ञान) ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके समन्वय एवं प्रयासों से परीक्षा का संचालन अत्यंत सफल रहा।

पूरे आयोजन का नेतृत्व अधिष्ठाता डॉ. एन. के. चौरे के कुशल मार्गदर्शन में किया गया। उनके निर्देशन में महाविद्यालय प्रशासन, प्राध्यापकगण एवं कर्मचारियों के सामूहिक सहयोग से यह परीक्षा एक उदाहरणीय शैक्षणिक आयोजन के रूप में संपन्न हुई।

उल्लेखनीय है कि गौ विज्ञान परीक्षा न केवल विद्यार्थियों के ज्ञान का मूल्यांकन करती है, बल्कि भारतीय कृषि, पशुपालन, जैविक खेती एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था में गौवंश के महत्व को समझने की दिशा में एक सशक्त कदम भी है। इस सफल आयोजन ने यह सिद्ध कर दिया कि बैरिस्टर ठाकुर छेदीलाल कृषि महाविद्यालय शिक्षा के साथ-साथ भारतीय परंपराओं एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण के समन्वय में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।

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