ग्राम पंचायत से आरटीआई के तहत सूचना न मिलने पर आवेदक ने ठोका अधिकार का डंका, मुख्य कार्यपालन अधिकारी से की न्याय की मांग

स्थानीय स्तर पर न्याय नही मिलने पर राज्य सूचना आयोग जाने की तैयारी!
कोरबा-पोड़ी उपरोड़ा! देश मे लागू सूचना का अधिकार कानून के तहत मांगी गई जानकारी से संबंधित आवेदन जमा करने की तिथि से 30 दिन (जीवन/स्वतंत्रता के लिए 48 घण्टे) के भीतर जानकारी न मिलने पर आवेदक द्वारा प्रथम अपील की जा सकती है। यदि प्रथम अपील के बाद भी अपीलीय अधिकारी द्वारा कोई निर्णय नही लेने पर आवेदक 90 दिनों के भीतर द्वितीय अपील (धारा 18/19) के तहत राज्य या केंद्रीय सूचना आयोग जा सकता है। इस अधिनियम में समय सीमा पर जवाब नही मिलने पर धारा 7(6) के तहत निशुल्क जानकारी दिया जाना आरटीआई कानून में तय किया गया है। ऐसे ही पोड़ी उपरोड़ा विकासखण्ड के ग्राम पंचायत अमझर (अ) से सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत समय से जानकारी न मिलने पर एक जागरूक नागरिक ने व्यवस्था की नींव हिला दी है। आवेदक अजय महंत ने पंचायत लोक सूचना अधिकारी के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए मुख्य कार्यपालन अधिकारी एवं जनसूचना अधिकारी से न्याय की गुहार लगाई है।
अजय महंत ने गत दिनांक 16 सितंबर 2025 को आरटीआई के तहत ग्राम पंचायत अमझर (अ) से वित्तीय वर्ष 2024- 25 में मुरुम कार्य हेतु किये गए भुगतान से संबंधित बिल बाउचर की प्रमाणित प्रतियां मांगी थी। लेकिन लोक सूचना अधिकारी एवं पंचायत सचिव ने तय 30 दिनों की सीमा में सही, स्पष्ट एवं संतोषजनक जानकारी के बजाय भ्रमित जानकारी उपलब्ध कराई। इससे क्षुब्ध होकर आवेदक ने दिनांक 10 अक्टूबर 2025 को प्रथम अपील के माध्यम से जनपद पंचायत कार्यालय में जनसूचना अधिकारी के समक्ष प्रथम अपील की। जिसके परिपालन में जनसूचना अधिकारी एवं सीईओ ने लोक सूचना अधिकारी/सचिव को 15 दिवस के भीतर आवेदक द्वारा चाही गई जानकारी उपलब्ध कराने निर्देशित किये। किंतु उक्त निर्देश के बावजूद सचिव ने आवेदक को जानकारी मुहैया नही कराई। आवेदक ने मामले को पुनः मुख्य कार्यपालन अधिकारी के दरवाजे पर ला पटका है और दिनांक 27 फरवरी 2026 को शिकायती आवेदन के तहत पंचायत सचिव पर सूचना के अधिकार का उल्लंघन, अपीलीय आदेश की अवहेलना व विधिक दायित्वों की उपेक्षा मामले में आवश्यक कार्रवाई की मांग करते हुए अविलंब चाही गई जानकारी प्रदान करने मांग की है। आवेदक अजय का आरोप है कि पंचायत सचिव सह लोक सूचना अधिकारी ने न सिर्फ आरटीआई अधिनियम का उल्लंघन किया, बल्कि पारदर्शिता और जवाबदेही जैसे मूलभूत अधिकारों को भी ताक पर रख दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि स्थानीय स्तर पर न्याय नही मिला, तो वे राज्य सूचना आयोग तक लड़ाई को ले जाने के लिए तैयार है। बता दें कि सूचना का अधिकार अधिनियम केवल एक कानून नही, बल्कि आम जनता की आंख और आवाज है। इसमें इस तरह की लापरवाही लोकतंत्र को कमजोर करती है। बहरहाल शिकायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी के पास दर्ज है, और देखना होगा कि लापरवाही के इस अंधेरे को न्याय का उजाला कब चीरता है? अजय महंत और तमाम जागरूक नागरिकों को उम्मीद है कि आरटीआई की गरिमा बरकरार रहेगी और जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई होगी।