चर्च ऑफ क्राइस्ट मेंशौचालय के चार ताले तोड़ने का आरोप

सीसीटीवी फुटेज के साथ प्रशासन से कड़ी कार्रवाई की मांग
पास्टर बोले,कुछ लोगों का चर्च से कोई संबंध नहीं,संपत्ति हड़पने की साजिश में लगे
बिलासपुर।तारबाहर स्थित चर्च ऑफ क्राइस्ट सीएमडी चौक में शौचालय और स्टोर रूम के ताले तोड़े जाने को लेकर फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। लगभग एक माह पहले प्रशासक एसडीएम के निर्देश पर एक शौचालय सभी के लिए खोल दिया गया था, जिसके बाद व्यवस्था शांति से चल रही थी। मगर 7 दिसंबर की शाम विमेश लाल और संजय हीराधर द्वारा दोबारा ताला तोड़ने की घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई। यह मामला पहले भी 8 नवंबर को चार ताले तोड़े जाने के बाद विवादों में था और अब फिर से स्थिति तनावपूर्ण हो गई है।पास्टर सुदेश पॉल और निर्वाचित प्राचीन पक्ष का कहना है कि विगत 50–60 वर्षों से चर्च परिसर में शौचालय नहीं था।

छह-आठ वर्ष पूर्व मिशन ग्रुप ने एक शौचालय बनाया, मगर उसे सभी महिलाओं को उपयोग की अनुमति नहीं दी गई। इसके बाद निर्वाचित प्राचीन पक्ष ने अपनी दान राशि से 1 लाख 60 हजार रुपये की लागत से दो शौचालय और एक स्टोर रूम का निर्माण कराया, जिसका विरोध मिशन ग्रुप और अस्थायी तीसरे ग्रुप द्वारा लगातार किया जाता रहा। शौचालय निर्माण को रोकने और चर्च की भूमि को कब्जाने के आरोपों पर चल रहा विवाद अब कोर्ट में लंबित है, जिसकी सुनवाई 9 जनवरी 2026 को होनी है।पास्टर सुदेश पॉल ने गंभीर आरोप लगाया कि संजय हीराधर, सुधीर, विमेश लाल, वीरेंद्र मसीह, अनिल दास, रवि गबरैल और राजकुमार मसीह का 19 जनवरी 2014 के बाद से चर्च या मिशन संस्था से कोई संबंध नहीं है।

उन्होंने आरोप लगाया कि ये लोग चर्च की जमीन बेचने और कब्रिस्तान भूमि को लेकर अवैध गतिविधियों में लिप्त रहे हैं। पास्टर के अनुसार चर्च परिसर में शाम के समय असामाजिक तत्वों का प्रवेश बढ़ गया है, शराब की बोतलें तक मिली हैं, और यही वजह है कि शौचालय व स्टोर रूम पर ताला लगाकर सुरक्षा की जाती है, जिसे बार-बार तोड़ा जा रहा है।9 दिसंबर को पास्टर सुदेश पॉल और उनकी कमेटी सीसीटीवी फुटेज के साथ प्रशासक और तारबाहर थाना प्रभारी के पास पहुँचे और कठोर दंडात्मक एवं प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की मांग की। पास्टर का कहना है कि यदि ताला तोड़ने वालों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो मामला कलेक्टर जनदर्शन में भी ले जाया जाएगा। उनका कहना है कि यह केवल ताला तोड़ने का मामला नहीं, बल्कि चर्च की संपत्ति को नुकसान पहुँचाने और कोर्ट के आदेशों की अवहेलना करने का गंभीर मुद्दा है, जिसके खिलाफ एफआईआर और कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट की कार्रवाई जरूरी है।