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छत्तीसगढ़ में चल रहे एसआईआर का अब साइड इफेक्ट दिखने लगा

स्कूलो मे बच्चो की पढ़ाई भगवान भरोसे

बिलासपुर।छत्तीसगढ़ में चल रहे एस आई आर का अब साइड इफेक्ट दिखने लगा है टीचर्स की एस आई आर ड्यूटी से स्कूलों की शैक्षणिक व्यवस्था चरमरा गई है। बच्चे स्कूल पहुंच रहे हैं, लेकिन उन्हें पढ़ाने वाला कोई नहीं है। स्कूल और स्कूलों की पढ़ाई भगवान भरोसे चल रही है। जो स्थिति है, इसका सीधा असर स्टूडेंट्स के सिलेबस, उनकी पढ़ाई और शिक्षा गुणवत्ता पर पड़ना तय माना जा रहा है।

दरअसल  छत्तीसगढ़ में 4 नवम्बर से एसआईआर की प्रक्रिया जारी है। 4 दिसम्बर तक प्रक्रिया को पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए बड़ी संख्या में अलग – अलग विभागों के शासकीय अधिकारी- कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। बिलासपुर जिले में अकेले 3 हजार से ज्यादा शासकीय कर्मचारी एसआईआर के काम में लगे हैं। जिनमें करीब 850 से ज्यादा शासकीय स्कूलों के शिक्षक हैं। शिक्षकों के एसआईआर ड्यूटी का इफेक्ट अब ये हो रहा है। कि स्कूलों की शैक्षणिक व्यवस्था चरमरा गई है। बच्चे स्कूल पहुंच रहे हैं, लेकिन उन्हें पढ़ाने वाला कोई नहीं है। कहीं स्कूल में सिंगल टीचर है तो कहीं स्कूल के आधे से ज्यादा टीचर एसआईआर की ड्यूटी में लगे हैं। कहीं एक टीचर पांच क्लास को एक साथ पढ़ा रहे हैं। तो कहीं स्टूडेंट्स ही टीचर बन सेल्फ स्टडी कर रहे हैं। जो स्थिति है, सैकड़ों, हज़ारों स्कूली बच्चे भगवान भरोसे पढ़ाई कर रहे हैं। प्राइमरी से लेकर हाईस्कूल तक एक जैसे हालात हैं। सिरगिट्टी क्षेत्र का शासकीय नवीन प्राथमिक शाला और शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय इसका बड़ा उदाहरण है। यहां प्राथमिक शाला में 260 बच्चे हैं हेड मास्टर के साथ 7 शिक्षकों की पदस्थापना है, लेकिन इसमें से 6 शिक्षक एसआईआर की ड्यूटी में हैं… यही स्थिति उच्चतर माध्यमिक विद्यालय की भी है। यहां 9वीं से 12वीं तक 950 से ज्यादा स्टूडेंट्स हैं… सेक्शन वाइज क्लास संचालित होते हैं, लेकिन यहां के भी 6 शिक्षक एसआईआर की ड्यूटी में लगे हुए हैं। एसआईआर को लेकर स्कूलों में जो स्थिति है, स्टूडेंट्स सबसे ज्यादा इससे अफेक्टेड हैं… स्टूडेंट्स के सिलेबस, उनकी पढ़ाई और शिक्षा गुणवत्ता पर इसका सीधा असर पड़ रहा है। आगामी दिनों में हाफ ईयरली एग्जाम होने हैं..कई स्टूडेंट्स के बोर्ड एग्जाम होंगे। लेकिन शिक्षकों के नहीं होने के कारण न तो सिलेबस पूरा हो पा रहा है और न ही स्टूडेंट्स को शिक्षकों का गाइडेंस मिल पा रहा है। स्टूडेंट्स इसके कारण अपने भविष्य को लेकर भारी चिंतित नजर हैं उनका कहना है। सरकार को इसपर ध्यान देना चाहिए और स्कूलों में शिक्षकों को वापस भेजना चाहिए। स्कूल के प्राचार्य और शिक्षक भी उसे लेकर चिंतित हैं
इधर, शिक्षा विभाग के सामने बड़ी उलझन है। एक तरफ शासन का आदेश है, जिसमें एसआईआर की प्रक्रिया को हर हाल में पूर्ण करना है। दूसरी तरफ शिक्षा गुणवत्ता के साथ बेहतर परिणाम देना है। लेकिन ग्राउंड पर जो हालात हैं, शिक्षा व्यवस्था इससे सबसे ज्यादा प्रभावित दिख रही है। खुद शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारी भी मान रहे हैं कि, शिक्षकों की ड्यूटी से शैक्षणिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है। जिले के 850 से ज्यादा सहायक शिक्षक, उच्च वर्ग शिक्षक, व्याख्याता की इसमें ड्यूटी लगी है… हालांकि, वे 4 दिसम्बर के बाद शिक्षकों की स्कूल में वापसी और पहले की तरह शैक्षणिक व्यवस्था संचालित करने की बात कह रहे हैं।

*खामियाजा स्कूलों और मासूम छात्रों को भुगतना पड़ रहा*

बहरहाल स्कूली शिक्षा पर एसआईआर की प्रक्रिया पर भारी है… कुल मिलाकर, प्रशासनिक जरूरतों के नाम पर चल रही एसआईआर प्रक्रिया का सबसे बड़ा खामियाजा स्कूलों और मासूम छात्रों को भुगतना पड़ रहा है… बच्चे इंतज़ार कर रहे हैं कि कब उनका टीचर लौटेगा और कब फिर से क्लास में पढ़ाई शुरू होगी… शिक्षा व्यवस्था और प्रशासन के बीच पिसता भविष्य आज सवालों के घेरे में है… अब देखना होगा कि एसआईआर की समय-सीमा पूरी होने के बाद शिक्षा व्यवस्था कितनी जल्दी पटरी पर लौटती है,या फिर इसका असर बच्चों के लंबे भविष्य पर भी गहरी छाप छोड़ जाता है।

वर्जन
शिक्षा व्यवस्था में फर्क नहीं पड़ रहा है।बल्कि पढ़ाई भी हो रही है।कुछ दिनों की बात है उसके बाद फिर से पढ़ाई शुरू हो जाएगी।

विजय तांडे
डीईओ बिलासपुर

वर्जन
एसआईआर के लिए ड्यूटी लगाई गई है।इससे शिक्षा पर फर्क नहीं पड़ रहा है।दूसरे शिक्षकों को पढ़ाने की जिम्मेदारी दी गई है।

संजय अग्रवाल, कलेक्टर बिलासपुर

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