छात्राओं से बैड टच करने वाले शिक्षक की हाईकोर्ट ने रखी सजा बरकरार, कहा स्कूल शिक्षक का पद विश्वास और जिम्मेदारी का, शिक्षक की याचिका खारिज
सातवीं कक्षा की छात्राओं से बैडटच और अभद्र टिप्पणी करने वाले शिक्षक को ट्रायल कोर्ट ने दो साल दो माह 6 दिन कैद और जुर्माने की सजा सुनाई थी। सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में शिक्षक ने अपील की थी। हाईकोर्ट ने शिक्षक के कृत्य को व्यवसायिक कदाचार के साथ पॉक्सो एक्ट के तहत गंभीर दंडनीय अपराध मानते हुए कहा कि शिक्षक का पद विश्वास और जिम्मेदारी का है। इसके साथ ही ट्रायल कोर्ट की दी गई सजा को बरकरार रखते हुए शिक्षक की याचिका खारिज कर दी गई।
बिलासपुर। बैड टच के मामले में ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ लगी याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने कहा कि स्कूल टीचर का पद विश्वास और जिम्मेदारी का होता है। नाबालिग छात्राओं के साथ यौन, अपमानजनक या शोषणकारी कृत्य केवल व्यावसायिक कदाचार नहीं बल्कि पाक्सो एक्ट के तहत गंभीर दंडनीय अपराध है। इसी टिप्पणी के साथ हाईकोर्ट ने मुंगेली जिले के बरेला शासकीय स्कूल के शिक्षक की अपील खारिज कर दी।
छात्राओं ने की थी शिकायत:–
आरोपी शिक्षक कीर्ति कुमार शर्मा गणित और अंग्रेजी पढ़ाने के लिए नियुक्त था, लेकिन वह बिना अनुमति सातवीं कक्षा में जाकर विज्ञान पढ़ाता था। इसी दौरान उसने छात्राओं के साथ अभद्र हरकत और बैडटच किया। छात्राओं ने उसके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई।
डीईओ की जांच में आरोप साबित:–
साल 2019 में छात्राओं की शिकायत पर डीईओ ने बीईओ प्रतिभा मंडलोई को जांच सौंपी। जांच में छात्राओं और शिक्षकों के बयान दर्ज किए गए। जांच में पाया गया कि आरोपी क्लास के दौरान छात्राओं के शरीर के विभिन्न हिस्सों को छूता था, जिसमें रीढ़ और छाती भी शामिल थे। इतना ही नहीं, आरोपी शिक्षक स्कूल परिसर में गुटखा और गुड़ाखू का सेवन करता था।
एफआईआर और फास्टट्रैक कोर्ट का फैसला:–
जांच में आरोप प्रमाणित होने के बाद पुलिस ने आरोपी शिक्षक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया। पुलिस ने चार्जशीट पेश की और मामला फास्टट्रैक पाक्सो कोर्ट में चला। कोर्ट ने 2 मार्च 2022 को कीर्ति शर्मा को 2 साल 2 माह 6 दिन कैद और जुर्माने की सजा सुनाई।
हाईकोर्ट में अपील, पर राहत नहीं:–
आरोपी शिक्षक ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी और दावा किया कि उसे षड्यंत्रपूर्वक झूठे केस में फंसाया गया है। लेकिन हाईकोर्ट ने छात्राओं की गवाही को विश्वसनीय मानते हुए कहा कि उन्हें नकारने का कोई कारण नहीं है। एक अन्य छात्रा ने भी उत्पीड़न की पुष्टि की। इसलिए आरोपी को किसी भी प्रकार की राहत नहीं दी जा सकती।
निचली अदालत का फैसला बरकरार:–
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि नाबालिग छात्राओं से ऐसा कृत्य करना केवल अनुशासनहीनता नहीं बल्कि कानूनन गंभीर अपराध है। अदालत ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए अपील को खारिज कर दिया।