Blog

जयरामनगर पंचायत में बाजार नीलामी को लेकर मचा घमासान

बिना नीलामी हो रही वसूली,विकास कार्य ठप और पारदर्शिता पर सवाल

बिलासपुर। मस्तूरी अंतर्गत ग्राम पंचायत जयरामनगर में साप्ताहिक बाजार की नीलामी चार माह से लंबित होने से पंचायत में असंतोष और प्रशासनिक लापरवाही को लेकर घमासान मचा हुआ है। पंचायत चुनाव और पंचायत सचिव संघ की हड़ताल के चलते मार्च से जून तक नीलामी प्रक्रिया रुकी रही, लेकिन वर्तमान में स्थिति सामान्य होने के बावजूद भी नीलामी नहीं की गई है। इस लापरवाही के कारण पंचायत को आर्थिक क्षति के साथ-साथ विकास कार्यों पर भी सीधा असर पड़ा है।

मिली जानकारी के अनुसार, इस अवधि में बाजार से लगभग दो लाख रुपये की वसूली की गई, परंतु यह राशि पंचायत खाते में जमा नहीं कराई गई है। गंभीर आरोप यह है कि बाजार की यह वसूली सरपंच और कुछ पंचों द्वारा की जा रही है, मगर इसके कोई आधिकारिक दस्तावेज या हिसाब पंचायत के पास मौजूद नहीं है। इससे पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं और अन्य पंचों में भारी रोष देखा जा रहा है। पंचों का कहना है कि क्षेत्र में नाली, सड़क, नल, बोर और स्ट्रीट लाइट जैसी बुनियादी सुविधाएं महीनों से खराब हालत में हैं। मरम्मत की मांग कई बार उठाई गई, लेकिन हर बार फंड की कमी का हवाला देकर मामला टाल दिया गया। अब जबकि बाजार से राजस्व अर्जन हो चुका है।

उसकी राशि और उपयोग पर ही प्रश्नचिह्न लग गया है। जयरामनगर का यह बाजार केवल स्थानीय नहीं बल्कि क्षेत्रीय महत्व रखता है, जहां आसपास की करीब 10 ग्राम पंचायतों से व्यापारी और ग्रामीण खरीदारी करने आते हैं। पूर्व सत्र में इस बाजार की नीलामी दो लाख रुपये से अधिक में की गई थी, जिससे पंचायत को सीधा लाभ हुआ था।

इस बार नीलामी न होने से पंचायत को न केवल आय की हानि हो रही है, बल्कि पंचायत संचालन की पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी गहरा प्रश्न उठ गया है। मस्तूरी जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने पहले ही निर्देश जारी कर रखे हैं कि सभी बाजारों की नीलामी शीघ्र कराई जाए, परंतु इसके बावजूद जयरामनगर में बिना नीलामी के वसूली जारी है। इससे स्पष्ट है कि या तो प्रशासनिक आदेशों की अवहेलना हो रही है या फिर जानबूझकर प्रक्रिया को टालने का प्रयास किया जा रहा है।

बोले पंच,बाजार की नीलामी प्रक्रिया शुरू करवाई जाए, वसूली की गई राशि का लेखा-जोखा सार्वजनिक किया जाए

पंचों ने मांग की है कि तत्काल बाजार की नीलामी प्रक्रिया शुरू करवाई जाए, वसूली की गई राशि का लेखा-जोखा सार्वजनिक किया जाए और प्राप्त आय से जरूरी विकास कार्यों को प्राथमिकता दी जाए। साथ ही, पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर अनियमितता करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए। इस प्रकरण ने न केवल पंचायत की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि ग्रामीण जनता के विश्वास को भी प्रभावित किया है। ऐसे में अब आवश्यकता है कि जिला प्रशासन स्वयं हस्तक्षेप कर व्यवस्था को पटरी पर लाए।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *