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जशपुर जिले के धौरासांड ग्राम में कुल्थी दिवस का सफल आयोजन

पोषण सुरक्षा और आय संवर्धन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

बिलासपुर। जशपुर जिला के धौरासांड ग्राम, विकासखण्ड फरसाबहार विकासखण्ड में किसानों के बीच कुल्थी (हॉर्सग्राम) की उन्नत खेती को बढ़ावा देने तथा इसके पोषण एवं आर्थिक महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से कुल्थी दिवस का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य वर्षा आधारित एवं सीमांत कृषि क्षेत्रों में जलवायु सहनशील दलहनी फसल के रूप में कुल्थी को लोकप्रिय बनाना था।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में क्षेत्र क्रमांक-2 की जनपद अध्यक्ष बोनी यादव उपस्थित रहीं। उन्होंने किसानों को संबोधित करते हुए वैज्ञानिक खेती अपनाने, दलहनी फसलों के विस्तार तथा पोषण सुरक्षा के साथ आय वृद्धि सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया।

यह कार्यक्रम क्षेत्रीय कृषि अनुसंधान केन्द्र, बिलासपुर द्वारा आयोजित किया गया। कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ वैज्ञानिक (सस्य विज्ञान) एवं अखिल भारतीय समन्वित गेहूं एवं जौ अनुसंधान परियोजना के प्रमुख अन्वेषक डॉ. दिनेश पाण्डेय तथा वैज्ञानिक (आनुवंशिकी एवं पादप प्रजनन) एवं अखिल भारतीय समन्वित शुष्क दलहन–कुल्थी अनुसंधान परियोजना के प्रमुख अन्वेषक डॉ. अवनीत कुमार द्वारा किया गया।

कृषि विभाग की ओर से वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी राकेश कुमार पैंकरा, कृषि विकास अधिकारी श्री अजगले तथा फरसाबहार विकासखण्ड के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी सुश्री पन्ना एवं श्री भगत ने किसानों के साथ सक्रिय संवाद स्थापित करते हुए योजनाओं और तकनीकी सहयोग की जानकारी प्रदान की।

कुल्थी में कीट एवं रोग प्रबंधन विषय पर विशेषज्ञ व्याख्यान उद्यानिकी महाविद्यालय एवं अनुसंधान केन्द्र, कोडबा के वैज्ञानिक (कीट विज्ञान) डॉ. जयकिशन भगत द्वारा दिया गया। उन्होंने किसानों को समेकित कीट प्रबंधन, रोग पहचान तथा कम लागत वाले वैज्ञानिक नियंत्रण उपायों की जानकारी प्रदान की।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को कुल्थी की उन्नत किस्मों, वैज्ञानिक उत्पादन तकनीकों तथा इसके स्वास्थ्य एवं घरेलू उपयोग से मिलने वाले आर्थिक लाभों के प्रति जागरूक करना था।

तकनीकी सत्र में डॉ. दिनेश पाण्डेय ने कुल्थी की वैज्ञानिक कृषि कार्य-पद्धति (एग्रोनोमिक पैकेज ऑफ प्रैक्टिसेस) जैसे उचित बुवाई समय, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, नमी संरक्षण तकनीक एवं उत्पादन वृद्धि उपायों पर विस्तार से जानकारी दी। वहीं डॉ. अवनीत कुमार ने कुल्थी के पोषण तत्वों, औषधीय एवं स्वास्थ्य लाभों तथा उन्नत किस्मों पर प्रकाश डालते हुए इसे वर्षा आधारित एवं सीमांत क्षेत्रों के लिए उपयुक्त जलवायु-सहनशील दलहन फसल बताया।

कार्यक्रम में विभिन्न ग्रामों के सरपंचों एवं स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी कुल्थी खेती से जुड़े अपने अनुभव साझा किए, जिससे किसानों को व्यावहारिक प्रेरणा मिली।

इस अवसर पर 250 से अधिक किसानों ने भागीदारी की, जिनमें लगभग 70 प्रतिशत महिला कृषक शामिल रहीं। यह ग्रामीण महिला सशक्तिकरण तथा कृषि गतिविधियों में उनकी बढ़ती सक्रिय भागीदारी का सकारात्मक संकेत है।

कुल्थी दिवस कार्यक्रम ने किसानों में दलहनी फसल विविधीकरण के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करते हुए आगामी फसल मौसम में कुल्थी उत्पादन प्रारम्भ करने के लिए प्रेरित किया। यह पहल क्षेत्र में पोषण सुरक्षा, आय संवर्धन तथा टिकाऊ कृषि प्रणाली को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगी।

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