जाति पांति पूछे नहिं कोई, हरि को भजे सो हरि को होय’ – स्वामी परमात्मानंद

स्व गोविन्दराम सचदेव सिंधु भवन तोरवा में चल रही श्री राम कथा में स्वामी परमात्मानंद गिरी जी ने कथा के प्रारंभ में भावपूर्ण भजन कर सभी ईश्वर रूपों को आमंत्रित किया। वनवास में श्री राम अगस्त्य ऋषि के आश्रम जाते है जहाँ उन्हें अगस्त्य ऋषि शस्त्र भेंट करते हैं और जटायु से भेंट होती है । राम लक्ष्मण संवाद में राम जी लक्ष्मण जी को ज्ञान देते है – ईश्वर , जीव , भक्ति , माया, अध्यात्म के बारे में बताते है । श्री राम जी ने सीता माता को कहा के अब मनुष्य लीला करनी है तब मैं राक्षसों का नाश कर सकू , तब तक तुम अग्नि में निवास करो । सीता माता सब समझ कर अग्नि में समा गई और अपनी ही छायामूर्ति वहाँ रख दी ।शुरपणखा का विवरण पंचवटी आश्रम में बताया ।

रावण मारीच के पास जाता है तब मारीच रावण को सचेत करता है के आप राम का विरोध मत करो अन्यथा अंत हो जाएगा । रावण द्वारा नहीं समझने पर मारीच श्रीरघुनाथ के हाथों प्राण तग करना बेहतर समझते है । लक्ष्मण रेखा विवरण और रावण द्वारा साधु का वेष धारण कर के सीता हरण की कथा बतायी गई । रावण जैसा बलवान राजा चोरी छिपे आता है , ग़लत कार्य में मनुष्य को डर लगता ही है ।
सीता हरण मृग के कारण होता है , जटायु रावण को रोकने का प्रयास करते है । स्वामी जी बोलते है के रामायण में स्त्री अपराध पर पक्षी भी प्रतिरोध करते है तो हम मनुष्यों को तो करना ही चाहिए। जटायु बताते है के रावण दक्षिण की तरफ़ गया है।शबरी के प्रेम और झूठे बेर की कथा में संदेश है के – “हरि को भजे सो हरि का होय “, प्रभु के लिए कोई जात पात , ऊंचनीच नहीं होती है और आगे नवधा भक्ति सुनाते है । कथा के बीच बीच में स्वामी जी द्वारा राम भाजन और भजन कराया गया। संत का क्रोध भी कल्याण करता है – जैसे माँ का क्रोध होता है ।
हनुमान जी की भेंट होती है , सुग्रीव से मिलते है । बाली का वध करते है। आगे अंगद , हनुमान और जामवंत शोध और खोज के लिए दक्षिण की तरफ़ जाते है । जटायु का छोटा भाई समपाति आगे का रास्ता बताता है । आज इतनी ही कथा की गई ।
आयोजन समिति द्वारा बताया गया के कल रविवार को प्रातः ७.३० बजे हवन प्रारंभ होगा और कथा १० बजे प्रारंभ हो कर कथा विश्राम १ बजे होगी तदपच्यात भंडारा होगा ।
आज के विशिष्ट अतिथियो मे
संतोषी महिला समिति , शारदा भजन मंडली महिला समिति सदस्यों , डॉ ललित माखीजा , यश मनहर , राजेश तिवारी , मोती गंगवानी , निर्मल जीवननी ,श्याम थावरानी , मेंघा माखीजा ,नीरज गेमनानी, शंकर मानिकपुरी , प्रदीप निर्णेजक, डॉ ओमप्रकाश माखीजा ,बी पी सिंह , चंचल सलूजा ,प्रकाश पंजवानी , लखन वाधवानी,ने कथा लाभ लिया ।