जिले की 42 हजार से अधिक महिलाएं बनीं जैविक किसान
आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ाया कदम
बिलासपुर ।जिले की महिलाएं अब खेती को सिर्फ आजीविका का साधन नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर बनने का माध्यम मान रही हैं। बिलासपुर जिले के 424 गांवों में जैविक खेती ने महिलाओं के जीवन में नई ऊर्जा और उम्मीदें भर दी हैं। सीएमएसए परियोजना के तहत 42,400 महिला किसान जैविक खेती को अपनाकर लखपति दीदी बनने की ओर अग्रसर हैं। इन महिलाओं ने खेतों को रासायनिक खाद से मुक्त कर देसी जैविक तरीकों को अपनाना शुरू कर दिया है। धनजीव अमृत, जीवामृत और प्रवजीव अमृत जैसे जैविक कीटनाशकों के उपयोग से न केवल खेती की लागत घटी है, बल्कि फसल की गुणवत्ता भी बेहतर हुई है। महिलाएं अपने घरों में जैविक खाद बना रही हैं और इसे खेतों में प्रयोग कर रही हैं। जैविक खेती से अब इन महिलाओं की आमदनी भी बढ़ रही है। कई महिलाओं ने बताया कि रासायनिक खेती के मुकाबले जैविक खेती से ज्यादा मुनाफा हो रहा है और उपज की मांग बाजार में तेजी से बढ़ रही है। इससे उन्हें आत्मविश्वास मिला है और वे अब अपने निर्णय खुद ले रही हैं। सीएमएसए परियोजना के माध्यम से महिलाओं को प्रशिक्षण, तकनीकी सहयोग और बाजार से जोड़ने का काम किया जा रहा है। इसका परिणाम यह है कि महिलाएं अब खेतों में मेहनत के साथ-साथ नेतृत्वकर्ता के रूप में भी सामने आ रही हैं। वे अपने गांव की दूसरी महिलाओं को भी इस दिशा में प्रेरित कर रही हैं। इस पहल से न केवल जैविक खेती को बढ़ावा मिला है, बल्कि गांवों में महिला सशक्तिकरण की एक मजबूत मिसाल भी कायम हो रही है। जिले की ये महिला किसान अब राज्य और देश में अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। सरकार भी इस मॉडल को अन्य जिलों में लागू करने की दिशा में प्रयासरत है।