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तहसीलदार की कुर्सी हिली! ज़िंदा महिला को ‘मृत’ दिखाकर ज़मीन हड़पने वाले अफसर पर गिरी गाज…

अम्बिकापुर/सूरजपुर, । सरगुजा संभाग से एक सनसनीखेज़ मामला सामने आया है जिसने शासन-प्रशासन की ज़मीन से जुड़ी कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। भैयाथान तहसील के तहसीलदार संजय राठौर को एक जीवित महिला को ‘मृत’ दिखाकर उसकी ज़मीन सौतेले बेटे के नाम पर हड़पने की साज़िश रचने के आरोप में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

क्या है पूरा मामला : ग्राम कोयलारी निवासी शैल कुमारी दुबे, पत्नी स्व. राधेश्याम दुबे, ने शिकायत दर्ज कराई थी कि तहसीलदार संजय राठौर ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए उन्हें मृत घोषित कर, उनकी निजी स्वामित्व की ज़मीन (ख.नं. 45/3, रकबा 0.405 हे.) का नामांतरण सौतेले पुत्र वीरेंद्रनाथ दुबे के नाम पर करवा दिया।

जाँच में गड़बड़ी का भंडाफोड़ : अपर कलेक्टर सूरजपुर और तहसीलदार लटोरी की संयुक्त जांच टीम ने 9 जून को प्रस्तुत प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में पाया कि :

  • शैल कुमारी दुबे जीवित हैं।
  • तहसीलदार संजय राठौर ने जानबूझकर उन्हें मृत दिखाया।
  • भूमि के नामांतरण और बंटवारे में कुटिल साजिश और सत्ता का दुरुपयोग हुआ।

नियमों की धज्जियाँ, सीधा सस्पेंशन : इस घोर अनियमितता को गंभीर मानते हुए आयुक्त, सरगुजा संभाग अम्बिकापुर ने छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के तहत राठौर को सेवा दायित्वों के निर्वहन में घोर लापरवाह और स्वेच्छाचारी करार दिया।
नतीजतन, छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण व अपील) नियम 1966 के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबन का आदेश जारी हुआ।

निलंबन के दौरान उनका मुख्यालय कलेक्टर कार्यालय, बलरामपुर-रामानुजगंज निर्धारित किया गया है, और नियमानुसार उन्हें केवल जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा।

प्रशासन से सवाल :

  • क्या तहसील स्तर पर नामांतरण माफिया सक्रिय हैं?
  • ऐसे अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मुकदमे क्यों नहीं?
  • क्या यह एकल मामला है या गहरी जड़ें हैं?

यह मामला केवल निलंबन से नहीं सुलझेगा, यह न्याय की कसौटी पर जन-विश्वास की परीक्षा है।

मीडिया की मांगे :

  • आरोपी तहसीलदार पर भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी का आपराधिक मामला दर्ज हो।
  • पीड़ित महिला को न्याय और भूमि की बहाली मिले।
  • ऐसी घटनाओं पर सख्त निगरानी और जवाबदेही की स्थायी व्यवस्था हो।

जनता की ज़मीन को कागज़ों पर लूटने वाले अफसरों को अब चुप नहीं बैठने देंगे।

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