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थानों में दर्ज मामलों की विवेचना सुधारने पुलिस अधीक्षक ने ली बैठक

बिलासपुर। अपराधियों के खिलाफ दर्ज मामलों की विवेचना में कमी के कारण कई बार आरोपी अदालत से बरी हो जाते हैं। जांच में लापरवाही और अधूरी विवेचना का पता अक्सर ट्रायल के दौरान चलता है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह ने अभियोजन अधिकारियों की बैठक ली और सख्त निर्देश जारी किए। बैठक में एसपी ने स्पष्ट किया कि विवेचना का स्तर सुधारना पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि अपराधियों को सजा दिलाना ही पुलिस का उद्देश्य होना चाहिए, इसलिए विवेचना के हर पहलू पर बारीकी से ध्यान दिया जाए। उन्होंने अभियोजन अधिकारियों को वैज्ञानिक और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के अधिकतम उपयोग पर जोर दिया। एसपी ने कहा कि मामलों की जांच केवल औपचारिकता न होकर साक्ष्य आधारित होनी चाहिए। इसके लिए आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जाए ताकि अदालत में आरोपी के खिलाफ पुख्ता प्रमाण पेश किए जा सकें। उन्होंने कहा कि सटीक और वैज्ञानिक विवेचना ही न्याय सुनिश्चित करने का सबसे बड़ा साधन है। बैठक में यह भी निर्देश दिए गए कि प्रत्येक दर्ज मामले की विवेचना के दौरान हर बिंदु पर विशेष ध्यान दिया जाए। यदि विवेचक को किसी बिंदु पर संदेह या कठिनाई हो तो तुरंत वरिष्ठ अधिकारियों से राय ली जाए। इससे जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता और मजबूती आएगी। पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह ने कहा कि अपराधियों को सजा दिलाने के लिए ठोस और गुणवत्तापूर्ण विवेचना जरूरी है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि मामलों की विवेचना में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। साथ ही अभियोजन अधिकारियों को विश्वास दिलाया कि पुलिस और अभियोजन के बीच बेहतर समन्वय से अपराधियों को कठोर सजा दिलाई जाएगी।

वर्जन
कई वर्षों से लंबित और अधूरे मामले पड़े हुए है।जिसके लिए मीटिंग आयोजित की गई थी और निर्देशित किया गया है कि लंबित मामले को जल्द से जल्द निबटारा किया जाए।

रजनेश सिंह
एसएसपी बिलासपुर

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