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दागी को बना दिया डीईओ, विधवा शिक्षिका से रिश्वत लेने के आरोप में बीईओ के पद से तत्कालीन कलेक्टर ने हटाया था, शिक्षक पोस्टिंग में भी की थी गड़बड़ी, अब बने डीईओ

जिस खंड शिक्षा अधिकारी को तत्कालीन कलेक्टर ने शिक्षिका से रिश्वत मांगने के मामले में हटाया था और विभागीय जांच के निर्देश दिए थे उसे जिला शिक्षा अधिकारी बना दिया गया है। उनके खिलाफ दी गई विभागीय जांच के आदेश पर हुई विभागीय जांच कभी कुछ पता नहीं है। बिलासपुर के डीईओ बनाए गए विजय टांडे के खिलाफ शिक्षक पोस्टिंग में भी गड़बड़ी करने का आरोप था। विजय टांडे को डीईओ बनाने का आदेश जारी होते ही शिक्षकों के व्हाट्सएप ग्रुप में गड़बड़ियों के पुराने दस्तावेज वायरल हो रहे हैं।

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में शिक्षा विभाग में दागी अधिकारी का बोलबाला है जिस अधिकारी को बीईओ रहते तत्कालीन कलेक्टर अवनीश शरण ने विधवा शिक्षिका से रिश्वत लेने के आरोप में हटा दिया था। उस दागी बीईओ को उल्टा उपकृत करते हुए बिलासपुर जिले का डीईओ बना दिया गया है। डीईओ बनाए गए विजय टांडे पर शिक्षक पोस्टिंग में भी गड़बड़ी करने का आरोप है। विजय टांडे को डीईओ बनाने का आदेश जारी होते ही शिक्षकों के व्हाट्सएप ग्रुप में गड़बड़ियों के पुराने दस्तावेज वायरल हो रहे हैं।

10 जुलाई को शिक्षा विभाग से जारी तबादला आदेश में बिलासपुर जिले में विजय पांडे को बिलासपुर जिले का जिला शिक्षा अधिकारी बनाया गया है। चार माह पहले ही उन्हें तत्कालीन कलेक्टर अवनीश शरण ने कोटा बीईओ के पद से रिश्वतखोरी के आरोप में हटा दिया था। दरअसल विधवा शिक्षिका नीलम भारद्वाज से उनके शिक्षक पति की मृत्यु के बाद लंबित वेतन और स्वत्वो के भुगतान के एवज में बीईओ कोटा रहते विजय पांडे ने रिश्वत की मांग की थी। शिक्षिका नीलम भारद्वाज ने इसकी शिकायत जनदर्शन में कलेक्टर अवनीश शरण से की थी।

अपनी शिकायत में शिक्षिका ने बताया था कि उनके पति शासकीय स्कूल पोड़ी में पदस्थ थे। शिक्षक पुष्कर भारद्वाज की मृत्यु के दस माह बाद भी उनके अर्जित अवकाश की राशि का भुगतान नहीं किया जा रहा था। कोटा विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय में आवेदन देकर भुगतान की मांग करने पर तत्कालीन बीईओ रहे विजय टांडे और उनके लिपिक एकादशी पोर्ते के द्वारा एक लाख 34 हजार रुपए रिश्वत की मांग की गई। 3 मार्च 2025 को कलेक्टर को शिक्षिका ने शिकायत की जिस पर कलेक्टर अवनीश शरण ने तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर जांच के निर्देश दिए थे।

जांच में यह बात सामने आई कि शिक्षिका के आवेदन पर 6 महीने के अर्जित अवकाश की राशि स्वीकृत की गई। प्रतिमाह 67 हजार रुपए वेतन के आधार पर राशि स्वीकृत की गई थी। बीईओ विजय टांडे और लिपिक के द्वारा दो माह का वेतन एक लाख 34 हजार रुपए मांगा जा रहा था। अर्जित अवकाश का चेक तो बना दिया गया था पर नहीं देने पर शिक्षिका को नहीं दिया जा रहा था। जांच में मामले की पुष्टि होने पर लिपिक एकादशी पोर्ते को निलंबित कर दिया गया वहीं खंड शिक्षा अधिकारी विजय टांडे को कलेक्टर अवनीश शरण ने बीईओ के पद से हटाते हुए खुरदुर कोटा के प्राचार्य के पद पर पर कार्य निर्वहन करने के आदेश दिए थे। मामले में विभागीय जांच के आदेश भी दिए गए थे।

शिक्षिका का पैसा रख लिया था खुद के अकाउंट में:–

जांच में यह भी बात सामने आई कि चेक बनने के बाद इसे शिक्षिका के खाते में भुगतान करना था पर खंड शिक्षा अधिकारी विजय टांडे ने इसे अपने खाते में जमा करवा लिया था। दिसंबर 2024 से निकला पैसा मार्च 2025 तक उनके खाते में ही रहा। इसे वित्तीय भ्रष्टाचार मानते हुए विभागीय जांच की अनुशंसा भी की गई थी। पर अब तक विभागीय जांच नहीं की गई उल्टा डीईओ पद का तोहफा दे दिया गया।

शिक्षक पोस्टिंग में भी धांधली में रहे शामिल:–

कोटा बीईओ रहते विजय टांडे शिक्षक पोस्टिंग में धांधली में भी शामिल रहे थे। सितंबर 2022 में प्रदेश स्तर पर शिक्षकों का स्थानांतरण हुआ था। इसी सूची में बिल्लीबंद के शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय के शिक्षक शैलेश यादव का स्थानांतरण शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय धौराभांटा बिल्हा ब्लॉक में हुआ था। शिक्षक शैलेश यादव को बिल्हा ब्लॉक के धौराभांटा स्कूल में ज्वाइन करना था पर उन्हें बीईओ रहते विजय टांडे 17 अक्टूबर 2022 को आदेश जारी कर बिल्लीबंद स्कूल से हटाते हुए कोटा ब्लॉक के धौराभांटा स्कूल में ही ज्वाइन करवा दिया। जबकि स्थानांतरण आदेश में स्पष्ट था कि कोटा ब्लॉक के बिल्लीबंद स्कूल से बिल्हा ब्लॉक के धौराभांटा स्कूल में ट्रांसफर हुआ है। खास बात यह है कि धौराभांटा स्कूल में पद भी रिक्त नहीं था। शिक्षक शैलेश यादव का वेतन 2 साल तक उनके पुराने स्कूल बिल्लीबंद से ही निकलवाते रहे।

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