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दिल्ली यूनिवर्सिटी टीचर एसोसिएशन एग्जीक्यूटिव चुनाव में प्रोफेसर एम. रामानंद सिंह सर्वाधिक 9190 वोटों से ऐतिहासिक जीत दर्ज करके द्वितीय स्थान पर रहे: इंडियन नेशनल टीचर कांग्रेस की प्रचंड बहुमत से हुई वापसी

दिल्ली विश्वविद्यालय टीचर एसोसिएशन का चुनाव फिलहाल अध्यक्ष एवं एग्जीक्यूटिव का चुनाव 4 सितंबर को संपन्न हुआ। जिसमें दिल्ली विश्वविद्यालय के विभिन्न शिक्षक संगठनों चुनाव में भाग लिया। डूटा एग्जीक्यूटिव के लिए लगभग 25 उम्मीदवार चुनावी मैदान में थे। विश्वविद्यालय में चुनाव प्रचार प्रसार का अभियान लगभग एक महीने से चल रहा था जिसका परिणाम आ गया है। इंडियन नेशनल टीचर कांग्रेस की तरफ से प्रत्याशी प्रोफेसर एम. रामानंद सिंह डूटा एग्जीक्यूटिव के लिए सर्वाधिक 9190 वोटों से ऐतिहासिक जीत दर्ज करके द्वितीय स्थान पर रहे हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय के चुनावों में इस बार इंडियन नेशनल टीचर कांग्रेस की प्रचंड बहुमत से जीत दर्ज करके वापसी हुई हैं। संगठन के शिक्षकों में खुशी की लहर हैं। इंडियन नेशनल टीचर कांग्रेस दिल्ली प्रदेश के सचिव डॉ अनिल कुमार मीणा ने बताया कि इंटेक के चेयरमैन प्रोफेसर पंकज गर्ग का चुनावी योजना जबरदस्त थी। संगठन के सभी शिक्षकों को साथ लेकर उन्होंने चुनावी मैदान में कदम रखा।

संगठन के सभी शिक्षकों की सहमति से डूटा एग्जीक्यूटिव के लिए उम्मीदवार बनाया। प्रोफेसर एम. रामानंद सिंह दिल्ली विश्वविद्यालय हंसराज कॉलेज केमिस्ट्री विभाग में कार्यरत हैं। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (डूटा) कार्यकारी परिषद के चुनावों में उनके भारी समर्थन के लिए शैक्षणिक समुदाय का हार्दिक आभार व्यक्त किया हैं। संगठन के लिए यह ऐतिहासिक क्षण हैं कि प्रोफेसर एम. रामानंद सिंह उत्तर पूर्व भारत से डूटा कार्यकारी परिषद के लिए चुने जाने वाले पहले व्यक्ति भी बन गए हैं। डूटा कार्यकारी चुनावों के इतिहास में उनके मतों की संख्या अब तक के सबसे अधिक मतों में से एक है, जो शिक्षक समुदाय के विश्वास और एकजुटता का एक महत्वपूर्ण प्रदर्शन है। सिंह ने चुनाव के बाद अपने संदेश में कहा कि मेरे साथी शिक्षकों ने मुझ पर जो भरोसा दिखाया है, उससे मैं बहुत सम्मानित महसूस कर रहा हूँ। यह परिणाम न केवल एक व्यक्तिगत की उपलब्धि है, बल्कि दिल्ली विश्वविद्यालय में एक अधिक समावेशी, लोकतांत्रिक और प्रगतिशील शैक्षणिक वातावरण के लिए हमारी साझा आकांक्षाओं का प्रतिबिंब है।

उन्होंने इंटेक और उसके समर्थकों को उनके अथक प्रयासों के लिए धन्यवाद दिया तथा शिक्षकों के सामूहिक कल्याण और संस्थान की शैक्षणिक अखंडता के लिए काम करने की अपनी प्रतिबद्धता जताई है|

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