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दीक्षांत समारोह के नाम पर हो रही अनियमित के खिलाफ NSUI का शंखनाद..राज्यपाल,उच्च शिक्षा सचिव से की शिकायत..

उग्र आंदोलन की तैयारी

दीक्षांत समारोह में हो रही अनियमित के खिलाफ राज्यपाल, उच्च शिक्षा सचिव से शिकायत

एनएसयूआई ने दीक्षांत समारोह में हो रहे करोड़ों के दुरुपयोग पर उठाई आवाज,

बिलासपुर। एनएसयूआई प्रदेश सचिव रंजेश सिंह ने छत्तीसगढ़ के माननीय महामहिम राज्यपाल व उच्च शिक्षा विभाग, छत्तीसगढ़ के सचिव महोदय को एक विस्तृत शिकायत पत्र सौंपकर अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय, बिलासपुर में दीक्षांत समारोह के नाम पर हो रहे अत्यधिक व्यय, अनियमितताओं एवं भंडार क्रय नियमों के उल्लंघन पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।

उन्होंने अपने पत्र में कहा कि—
1) अनावश्यक खर्च पर रोक:
विश्वविद्यालय द्वारा हर वर्ष लगभग 60 लाख से अधिक राशि केवल दीक्षांत समारोह में खर्च की जाती है, जबकि राज्य के अन्य विश्वविद्यालय—पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर, हेमचंद यादव विश्वविद्यालय दुर्ग—कम खर्च में गरिमापूर्ण आयोजन करते हुए यह राशि शैक्षणिक विकास में लगाते हैं।
उन्होंने कहा कि आज तक विश्वविद्यालय कैंपस में छात्रावास जैसी बुनियादी सुविधाएँ तक उपलब्ध नहीं हैं, और इसी अव्यवस्था का परिणाम है कि विश्वविद्यालय अब तक NAAC मान्यता भी प्राप्त नहीं कर सका।

2) समस्त खरीदी में पारदर्शिता अनिवार्य:
एनएसयूआई ने दीक्षांत समारोह सहित सभी प्रकार की खरीद-बिक्री, भुगतान और अन्य कार्यों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने हेतु भंडार नियमों के सख्त पालन की मांग की है, ताकि किसी विशेष व्यक्ति/संस्था को लाभ पहुँचाने या भ्रष्टाचार जैसी स्थिति बनने से रोका जा सके।

3) कार्यपरिषद की बैठक और स्वीकृति, दीक्षांत समारोह हेतू बजट के लिए सहमति से पहले ही जारी हुआ टेंडर,

4) छात्रहित सर्वोपरि—आमदनी के अनुरूप व्यय:
रंजेश सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय का बजट नियमानुसार व मुख्य रूप से छात्रहित कार्यों पर खर्च होना चाहिए। अनावश्यक कार्यक्रमों में मोटी रकम खर्च होने का सीधा प्रभाव छात्रों की जेब और उनके अधिकारों पर पड़ता है। बजट की कमी के कारण विद्यार्थी अनेक आवश्यक सुविधाओं से वंचित हैं। इस सन्दर्भ में माननीय प्रदेश अध्यक्ष नीरजपाण्डेय जी एवं अन्य पदाधिकारीओ से गंभीरता से चर्चा भी हो चुकी है और उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि उच्च शिक्षा विभाग ने इस गंभीर विषय में तत्काल प्रभावी निर्णय नहीं लिया, तो एनएसयूआई सैकड़ों कार्यकर्ताओं के साथ आंदोलन करने के लिए बाध्य होगी, जिसकी जिम्मेदारी पूरी तरह विश्वविद्यालय प्रशासन की होगी।

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