काला कपड़ा और फीता लगाकर पटवारियों की हड़ताल जारी…. बोले मांग नहीं हुई पूरी तो जारी रहेगा हड़ताल
प्रदेश भर में पटवारियों
की हड़ताल से काम काज हो रहा पर प्रभावित
बिलासपुर।छत्तीसगढ़ में पटवारियों की हड़ताल का असर सरकार पर पड़े या न पड़े, आम जनता पर जरूर पड़ा है। पटवारियों की हड़ताल को लगभग एक महीने होने जा रहा है। मगर अब तक सरकारी स्तर पर कोई पहल नहीं हुई है। पटवारियों के हड़ताल पर जाने से ऑनलाइन खसरा, बटांकन और नामांतरण का काम रुक गया है। महीने भर से पटवारी बाकी काम तो कर रहे हैं ।मगर ऑनलाइन अपलोडिंग का काम ठप पड़ गया है।पटवारियों की हड़ताल से ऑनलाइन रिकार्ड अपडेट नहीं हो पा रहा है। और तो और नकल भी नहीं निकल रहा है । अगर किसी को जाति प्रमाण पत्र बनाना हो या फिर आय प्रमाण पत्र तो इस तरह के कार्य में लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। जाहिर है,मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सभी कलेक्टरों को राजस्व दुरूस्त करने कहा था। इसके बाद सभी जिलों में खसरा, बटांकन काम चल रहा है।
पटवारियों ने कहा मांग पूरी होगी तो हड़ताल खत्म होगी
पटवारियों की मांग है कि कंप्यूटर, इंटरनेट जैसे ऑनलाइन काम करने वाले टूल की सरकार ने कोई व्यवस्था नहीं की है, इसलिए वे इसे नहीं करेंगे. उनकी मांग है कि कंप्यूटर, इंटरनेट के साथ ही कंप्यूटर ऑपरेटर दिया जाए। सरकार जब ये सुविधा मुहैया कराएगी, तभी वे ऑनलाइन काम करेंगे. हालांकि, अधिकांश पटवारियों ने ये सुविधाएं अपने स्तर पर जुटा रखी है मगर वे चाहते हैं कि सरकार ये काम करें. सरकार भी समझ रही कि जब पूरे देश में लैंड रिकार्ड का डिजिटलाइजेशन हो रहा है तो छत्तीसगढ़ में क्यों नहीं।
पटवारी सफ्ताह में सोमवार को काला कपड़ा और बाकी दिन काला फीता लगाकर करते है काम
प्रदेश भर के पटवारी भत्ता और नेट के दर की मांग को लेकर प्रदर्शन पर अड़े हुए है।जो ऑफलाइन काम करके टाइम पास कर रहे है।
जिनका सीधा और साफ कहना है कि ऑनलाइन करना है तो कर दीजिए लेकिन इसका खर्च भी देना होगा जो सरकार नहीं दे रही है।इसी कारण विरोध में काला कपड़ा और फीता लाकर प्रदर्शन किया जा रहा है।और यह प्रदर्शन तब तक जारी रहेगा जब तक सरकार मांग न पूरी करे।
डिजिटलाइजेशन हुआ तो पटवारियों का रोल हो जाएगा कम
असल में,लैंड रिकार्ड का अगर डिजिटलाइजेशन हो गया तो फिर सारा चीज आम आदमी के हाथ में आ जाएगा. जैसे पहले रेलवे की टिकिट या रिजर्वेशन के लिए बिना काउंटर पर लाइन लगाना संभव नहीं था। बैंकों से पैसा निकालने में दिन का आधा समय निकल जाता था। उसी तरह जमीनों का डिजिटलाइजेशन होने के बाद सब कुछ मोबाइल पर उपलब्ध होगा.जमीनों को बेचने या खरीदने से पहले लोग पटवारी के दरवाजे पर दौड़कर जाते हैं। बिना पटवारी के एक इंच इधर-से-उधर आप नहीं कर सकते। मगर अब जीपीएस की तरह आप अपने मोबाइल पर लोकेशन डालकर अपने प्लॉट पर पहुंच सकते हैं। मतलब आने वाले समय में पटवारियों का एकाधिकार समाप्त हो जाएगा।