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धान खरीदी पर हाहाकार,अन्नदाता सड़कों पर उतरे….खलिहानों में सड़ रहा धान,कलेक्ट्रेट में गूंजा किसान आक्रोश….

टोकन नहीं, खरीदी नहीं-धान के साथ किसान भी बेहाल…

बिलासपुर।धान खरीदी को लेकर एक बार फिर अन्नदाता सड़कों पर उतर आया है। बिलासपुर जिले में खरीदी की समय-सीमा खत्म हो चुकी है, लेकिन हजारों किसानों का धान आज भी खलिहानों में सड़ने को मजबूर है। हक की लड़ाई लड़ते हुए मजबूर किसान आज धान की ढेरी छोड़कर कलेक्ट्रेट पहुंच गए और प्रशासन के खिलाफ जमकर आक्रोश जताया।

दरअसल सोमवार को भारतीय किसान संघ के नेतृत्व में सैकड़ों किसानों ने जिला कलेक्टर कार्यालय का घेराव किया। हाथों में तख्तियां, जुबान पर नारे और आंखों में गुस्सा—किसानों ने साफ कहा कि उन्हें सिर्फ एक ही हक चाहिए, “दाना-दाना धान की खरीदी”।किसानों का आरोप है कि एग्रीस्टैक, सर्वर फेल, भौतिक सत्यापन और तकनीकी गड़बड़ियों ने उनकी मेहनत पर पानी फेर दिया है। टोकन नहीं मिल रहा, मंडी नहीं पहुंच पा रहे और धान खुले में पड़ा खराब हो रहा है।कुरेली के किसान गुनकुंवर यादव ने बताया कि 16 एकड़ में खेती करने के बावजूद सिर्फ 104 क्विंटल धान ही बिक सका, जबकि 212 क्विंटल धान अब भी पड़ा हुआ है। यही हाल जिले के हजारों किसानों का है।किसानों का कहना है कि आधार नंबर की गलती, कैरी फॉरवर्ड की समस्या और सत्यापन में देरी ने उन्हें पूरी तरह बेबस बना दिया है। मौसम का मिजाज बदल रहा है और धान सड़ने की कगार पर है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है।भारतीय किसान संघ के पदाधिकारियों ने साफ शब्दों में कहा है कि किसान बेहद परेशान हैं। सरकार से बार-बार गुहार लगाने के बाद भी समाधान नहीं मिल रहा। संगठन ने चेतावनी दी है कि अगर सभी किसानों का धान नहीं खरीदा गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। इस साल जिले में 7.40 लाख मीट्रिक टन धान खरीदी का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन प्रशासन अब तक सिर्फ 6.75 लाख मीट्रिक टन ही खरीद पाया है। नतीजा करीब 7,737 किसान अब भी अपनी पूरी उपज बेचने से वंचित हैं।सबसे बड़ा सवाल यही है।क्या दाना-दाना खरीदी का वादा सिर्फ कागजों तक सीमित है
या फिर किसान अपने खून-पसीने से उपजे धान को बेचने के लिए यूं ही दर-दर भटकता रहेगा।

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