नए श्रम कानून और निजीकरण के विरोध में देशभर में ट्रेड यूनियनों की एक दिवसीय हड़ताल
बिलासपुर के नेहरू चौक में ट्रेड यूनियन और कांग्रेस का धरना, 10 यूनियनों ने किया विरोध प्रदर्शन
बिलासपुर ।केंद्र सरकार के नए श्रम कानूनों और सार्वजनिक उपक्रमों में निजीकरण के विरोध में गुरुवार को देशभर में ट्रेड यूनियनों ने एक दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल का आह्वान किया। इस हड़ताल का असर छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में भी साफ तौर पर देखने को मिला।
दरअसल बिलासपुर के नेहरू चौक में ट्रेड यूनियनों के साथ-साथ कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं ने धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार की श्रम नीतियों को श्रमिक विरोधी बताते हुए जोरदार नारेबाजी की।इस हड़ताल में कुल 10 ट्रेड यूनियनों ने हिस्सा लिया। यूनियन नेताओं का कहना है कि सरकार लगातार ऐसे नए नियम लागू कर रही है, जो कर्मचारियों और श्रमिकों को कमजोर करने का काम कर रहे हैं। उनका आरोप है कि नए श्रम कानूनों में कई ऐसे प्रावधान हैं, जिनसे नौकरी की सुरक्षा, कार्य समय और श्रमिक अधिकारों पर सीधा असर पड़ेगा।
इसके साथ ही सार्वजनिक उपक्रमों में बढ़ते निजीकरण को लेकर भी यूनियनों ने गहरी चिंता जताई। उनका कहना है कि निजीकरण से न सिर्फ कर्मचारियों की नौकरी पर खतरा बढ़ेगा, बल्कि कार्य समय में वृद्धि और सुविधाओं में कटौती जैसी समस्याएं भी सामने आएंगी।हालांकि सरकार की ओर से ये श्रम कानून लगभग तैयार बताए जा रहे हैं और जल्द लागू होने की संभावना है, लेकिन इस राष्ट्रव्यापी हड़ताल का सरकार पर कितना असर पड़ेगा, यह आने वाले दिनों में साफ होगा।फिलहाल इतना जरूर है कि शासकीय और सार्वजनिक क्षेत्रों में बढ़ती सख्ती और नियमों के दबाव से कर्मचारी वर्ग खुद को प्रभावित महसूस कर रहा है, और यही कारण है कि अब यह असंतोष दफ्तरों से निकलकर सड़कों पर नजर आने लगा है।
सेल्स प्रमोशन कर्मचारियों का प्रदर्शन,लेबर कोड के खिलाफ ज्ञापन
देशव्यापी भारत बंद के आह्वान पर बिलासपुर में भी विरोध की गूंज सुनाई दी। 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों द्वारा चार नए लेबर कोड बिल के विरोध में 12 फरवरी को किए गए बंद के समर्थन में छत्तीसगढ़ सेल्स प्रमोशन एम्पलाईज यूनियन की बिलासपुर इकाई ने भी हड़ताल और प्रदर्शन किया। यूनियन के हजारों सदस्यों ने विभिन्न स्थानों पर ड्यूटी और मेडिकल कॉम्प्लेक्स स्थित धरना स्थल पर उपस्थित रहकर आंदोलन को सफल बनाया। नए लेबर कोड लागू होने से कर्मचारियों को नौकरी से निकालना आसान हो जाएगा और श्रमिकों की सुरक्षा कमजोर पड़ेगी।संगठन ने आशंका जताई कि बिल लागू होने पर यूनियनों के अधिकार सीमित हो जाएंगे और नियोक्ताओं की मनमानी बढ़ेगी।
यूनियन बोला ने वेज कोड बिल को रद्द करने और पुराने श्रम कानूनों को पुनः लागू करने की मांग की
स्थायी रोजगार की जगह अस्थायी नियुक्तियां बढ़ेंगी, जिससे कर्मचारियों का भविष्य असुरक्षित हो जाएगा। सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के कमजोर होने की संभावना जताई। प्रदर्शन के बाद यूनियन प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रीय संगठन एफएमआरएआई के बैनर तले बिलासपुर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर नए वेज कोड बिल को रद्द करने और पुराने श्रम कानूनों को पुनः लागू करने की मांग की।
यूनियन बोला कि मांगे नहीं हुई पूरी तो फिर होगा आंदोलन
यूनियन पदाधिकारियों ने ड्राफ्ट सीड बिल, इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट बिल और शांति न्यूक्लियर बिल को भी वापस लेने की मांग उठाई। आंदोलन में 1023 सदस्यों के साथ ट्रेड यूनियन काउंसिल का भी समर्थन रहा। यूनियन ने चेतावनी दी है कि मांगें नहीं मानी गईं तो आगे भी चरणबद्ध आंदोलन जारी रहेगा।