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नदियों के उद्गम स्थल संवर्धन के लिए हाईकोर्ट ने कहा कागजी कार्यवाही से नहीं चलेगा काम, मांगा नया शपथ पत्र

बिलासपुर।नदियों के उद्गम स्थल के संरक्षण और संवर्धन पर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। इसमें हाईकोर्ट ने कागजी कार्यवाही पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि सिर्फ समितियां बना देने और बैठकें लेने से आदेश का पालन नहीं होता। इसके लिए ठोस समयबद्ध योजना जमीन पर लागू करना होगा। हाईकोर्ट ने अफसरों से विभिन्न बिंदुओं पर नया शपथ पत्र मांगा है।

दरअसल कोरबा की लीलागर और जीपीएम की सोन व तिपान का उद्गम की सुरक्षा और उनके पुनर्जीवन के मामले में बुधवार को सुनवाई हुई। शपथ पत्र पर हाई कोर्ट ने कहा कि अब तक हुई कार्रवाई सिर्फ प्रारंभिक कदम हैं। समितियां बना देना और बैठकें कर लेने को आदेश का पालन नहीं माना जाएगा। राज्य सरकार ठोस, समयबद्ध और जमीन पर लागू होने योग्य योजना दे।
हाई कोर्ट के 10 नवंबर के आदेश के बाद जल संसाधन विभाग के सचिव ने शपथ पत्र प्रस्तुत किया। वहीं, कोरबा और जीपीएम के कलेक्टर ने भी अपनी-अपनी रिपोर्टें सौंपी हैं। जल संसाधन विभाग के सचिव ने कहा कि तीनों नदियों की उद्गम की पहचान करने और उन्हें पुनर्जीवित करने के लिए संबंधित जिलों में राजस्व, पंचायत, वन, खनिज, जल संसाधन और नगर पालिका अधिकारियों की संयुक्त उप समितियां गठित की गई हैं। 20 व 21 नवंबर को इन समितियों के गठन के आदेश जारी कर दिए गए थे। जीपीएम जिले में 22 नवंबर को पुनर्जीवन समिति की बैठक हुई, जिसमें विभागीय अधिकारियों को नदी की उत्पत्ति चिह्नित करने और पुनर्जीवन योजना तैयार करने के निर्देश दिए गए। कोरबा के कलेक्टर ने भी अपने शपथ पत्र में इसी तरह की जानकारी दी और कहा कि लीलागर नदी की उत्पत्ति और पुनर्जीवन पर काम शुरू कर दिया गया है।

हाईकोर्ट ने कहा- कागजी कार्रवाई से काम नहीं चलेगा:–

हाईकोर्ट ने जवाब पर असंतोष जताते हुए कहा कि अब तक सिर्फ शुरुआती औपचारिकताएं पूरी हुई हैं, जबकि कोर्ट का स्पष्ट निर्देश था कि नदी पुनर्जीवन को लेकर ठोस कार्ययोजना और उस पर हुई प्रगति की रिपोर्ट पेश की जाए। कहा कि केवल समितियां बनाना और बैठकें करना पर्याप्त नहीं है। वास्तविक, समय-सीमा आधारित कार्ययोजना और उसके क्रियान्वयन की प्रगति को ही आदेश का पालन माना जा सकता है। इसके साथ ही हाई कोर्ट ने अरपा नदी क्षेत्र से जुड़ी जमीन अधिग्रहण की रिपोर्ट भी अगले सुनवाई तक प्रस्तुत करने को कहा।

इन बिंदुओं पर मांगा नया शपथ पत्र:–
हाईकोर्ट ने अफसरों से अब इन बिंदुओं पर जानकारी मांगी है, इसमें

  1. अब तक जमीन पर क्या काम हुआ?
  2. नदी की उत्पत्ति की पहचान किस चरण में है?
  3. पुनर्जीवन के लिए क्या कार्रवाई की गई या प्रस्तावित है?

विशेषज्ञों को भी समिति में शामिल करने का सुझाव:–

हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि अगली सुनवाई पर याचिकाकर्ता, न्याय मित्र और राज्य सरकार यह सुझाव दें कि किस-किस विशेषज्ञ को समिति में शामिल किया जाए, जिसमें तकनीकी विश्वविद्यालयों के प्रोफेसर, पर्यावरणविद, भू-गर्भ शास्त्री और अन्य संबंधित अनुभवी व्यक्तियों को शामिल कर राज्य की सभी नदियों के संरक्षण और पुनर्जीवन की एक व्यापक योजना बनाई जा सके।

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