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पांच दिन काम की मांग पर बैंककर्मियों का देशव्यापी हड़ताल…

बिलासपुर में बैंक बंदी का असर, कैश और चेक काम ठप….

गांधी चौक में बैंककर्मियों का प्रदर्शन, सेवाएं प्रभावित….

बिलासपुर । बैंक उपभोक्ताओं के लिए एक अहम खबर सामने आ रही है। पांच दिन के कार्य सप्ताह की मांग को लेकर आज देशभर में सरकारी बैंकों की हड़ताल जारी है। इस हड़ताल का सीधा असर आम लोगों की रोजमर्रा की बैंकिंग सेवाओं पर पड़ रहा है।

दरअसल बिलासपुर में भी आज लगातार चौथे दिन सरकारी बैंक बंद नजर आए। गांधी चौक स्थित बैंक शाखा के बाहर बैंककर्मियों ने प्रदर्शन किया और अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी की। बैंककर्मियों का कहना है कि लंबे समय से वे पांच दिन काम और दो दिन अवकाश की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक इस पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।हड़ताल के चलते कैश ट्रांजेक्शन, चेक क्लियरेंस, ड्राफ्ट और पासबुक से जुड़े काम पूरी तरह प्रभावित रहे। बैंक बंद रहने से उपभोक्ताओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई लोग जरूरी कामों के लिए बैंक पहुंचे, लेकिन शाखाएं बंद देखकर निराश लौटना पड़ा।हालांकि, एटीएम और ऑनलाइन बैंकिंग सेवाएं चालू रहीं, जिससे लोगों को कुछ राहत मिली। बैंककर्मियों ने साफ किया है कि जब तक उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।बैंक बंद रहने से व्यापारियों, बुजुर्गों और ग्रामीण उपभोक्ताओं को सबसे ज्यादा दिक्कत हो रही है।





*5 दिन कार्य सप्ताह की मांग पर सरकारी बैंकों की देशव्यापी हड़ताल, बिलासपुर में भी असर*

पांच दिन कार्य सप्ताह सहित विभिन्न मांगों को लेकर देशभर में आज सरकारी बैंकों के कर्मचारी हड़ताल पर रहे। हड़ताल का असर बिलासपुर में भी साफ तौर पर देखने को मिला, जहां लगातार चौथे दिन बैंकिंग सेवाएं प्रभावित रहीं। सरकारी बैंकों के बंद रहने से आम उपभोक्ताओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।हड़ताल के चलते कैश ट्रांजेक्शन, चेक क्लियरेंस, ड्राफ्ट, पासबुक एंट्री सहित अधिकांश बैंकिंग कार्य पूरी तरह ठप रहे। बैंक शाखाओं में सन्नाटा पसरा रहा, वहीं एटीएम में भी नकदी की कमी के कारण लोगों को मायूसी हाथ लगी। खासकर व्यापारियों, छोटे दुकानदारों और पेंशनधारकों को बैंक बंद रहने से दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

*कैश ट्रांजेक्शन और चेक क्लियरेंस ठप, गांधी चौक में बैंककर्मियों का प्रदर्शन*

इस दौरान कर्मचारियों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों को जल्द पूरा करने की अपील की। बैंककर्मियों का कहना है कि लंबे समय से उनकी मांगों की अनदेखी की जा रही है, जिससे मजबूर होकर उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा है।बैंक यूनियनों के अनुसार पांच दिन कार्य सप्ताह लागू करने, कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने, लंबित भर्तियों को जल्द पूरा करने और निजीकरण के प्रस्ताव का विरोध उनकी प्रमुख मांगों में शामिल है। यूनियन नेताओं ने स्पष्ट किया कि यदि मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।वहीं, बैंक बंद रहने से आमजन को वैकल्पिक डिजिटल माध्यमों का सहारा लेना पड़ा।

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