पिता ही मेरे गुरु, उन्हीं से सीखा संगीत: मैथली ठाकुर

राज्य उत्सव में भजन प्रस्तुति देने पहुंची अंतरराष्ट्रीय राम भजन गायिका मैथली ठाकुर
बिलासपुर के युवाओं से मिली और छत्तीसगढ़ी व्यंजनों का लिया स्वाद
बिलासपुर।राज्य उत्सव में भजन प्रस्तुति देने पहुंची अंतरराष्ट्रीय राम भजन गायिका मैथली ठाकुर ने अपने जीवन और संगीत के सफर से जुड़ी कई बातें साझा कीं। बिहार के मधुबनी जिले के बेनीपट्टी की निवासी मैथली ने बताया कि उनका संगीत सफर उनके पिता और गुरु रमेश ठाकुर के मार्गदर्शन में शुरू हुआ। उन्होंने कहा, “मेरे पिता ही मेरे गुरु हैं, और मैं जो भी हूं उन्हीं की वजह से हूं।” मैथली ने शास्त्रीय संगीत और क्लासिकल संगीत की बारीकियां अपने पिता से सीखी हैं, जो उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुकी हैं।
बिलासपुर में पहली बार आई मैथली ने बताया कि भगवान राम के ननिहाल में आकर उन्हें बेहद खुशी हो रही है। यहां उन्हें बिलासपुर की सांस्कृतिक पहचान, बल्लू बिलासपुरिया और सोशल मीडिया पर सक्रिय युवाओं से मिलने का मौका मिला, जिससे वे बहुत प्रभावित हुईं। उन्होंने बताया कि बिलासपुर के यूथ की सोशल मीडिया पर सक्रियता और ऊर्जा ने उन्हें खासा प्रभावित किया है।
मैथली ने राज्य उत्सव में छत्तीसगढ़ी व्यंजनों का भी स्वाद लिया और बताया कि उन्होंने सुबह से कई लोगों से मुलाकात की और छत्तीसगढ़ी फरा, गुलगुला जैसे पारंपरिक व्यंजनों का आनंद लिया।
पारंपरिक संगीत और भजनों के प्रति समर्पण
मैथली ठाकुर ने बताया कि उनका जन्म ऐसे परिवार में हुआ है जहाँ शास्त्रीय और पारंपरिक संगीत की विशेष मान्यता है। अपने पिता से मिली शिक्षा और संस्कारों का असर उनके भजन गायन में स्पष्ट झलकता है। भगवान राम के प्रति भक्ति का प्रदर्शन करते हुए, राज्य उत्सव में उनकी प्रस्तुति ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।