प्रतिबंधित सामान की ऑनलाइन डिलीवरी भी अपराध, लूट और हत्या में प्रयुक्त समान आया था फ्लिपकार्ट से, डिलीवरी बॉय और कूरियर संचालक की याचिका खारिज
राजधानी रायपुर के मंदिर हसौद में हुई लूट और हत्या के मामले में फ्लिपकार्ट के जरिए सप्लाई हुए प्रतिबंध सामान का इस्तेमाल हुआ था। पुलिस ने इस मामले में सप्लाई करने वाले डिलीवरी बॉय और कूरियर संचालक को भी आरोपी बनाया है। दोनों ने एफआईआर निरस्त करने हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी। हाई कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट कर दिया है की डिलीवरी बॉक्स में नशीला पदार्थ या प्रतिबंधित सामान मिलता है तो उसमें डिलीवरी करने वालों को भी जिम्मेदारी होगी और अपराध होने पर ई-कॉमर्स प्लेटफार्म और उनके डिलीवरी एजेंट भी जिम्मेदार माने जाएंगे। इसके साथ ही याचिका खारिज कर दी गई।
बिलासपुर l बिलासपुर हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा है कि प्रतिबंधित सामान की ऑनलाइन डिलीवरी कराना या करना भी अपराध की श्रेणी में आता है। अदालत ने साफ कर दिया कि डिलीवरी करने वाले एजेंट और वेयरहाउस संचालक अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति बीडी गुरु की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान तीखी टिप्पणी करते हुए कहा – “यदि किसी डिलीवरी बॉक्स में नशीला पदार्थ या प्रतिबंधित सामान निकले तो क्या डिलीवरी करने वालों की कोई जिम्मेदारी नहीं होगी?”
राजधानी के मंदिर हसौद की वारदात से जुड़ा प्रकरण:–
यह मामला रायपुर के मंदिर हसौद में हुई लूट और हत्या की वारदात से जुड़ा है। इस अपराध में फ्लिपकार्ट के जरिए प्रतिबंधित सामान की सप्लाई का इस्तेमाल हुआ था। पुलिस जांच में सामने आया कि इस सप्लाई की डिलीवरी दिनेश कुमार साहू ने की थी और अभनपुर के कूरियर संचालक हरिशंकर साहू इसके संचालन में शामिल थे। दोनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कार्रवाई निरस्त करने की मांग की।
याचिकाकर्ताओं का तर्क:–
याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि वे सिर्फ सर्विस प्रोवाइडर हैं और फ्लिपकार्ट के नियमित कर्मचारी नहीं। उनके अधिवक्ता ने तर्क रखा कि वे केवल सील पैक बॉक्स की डिलीवरी करते हैं और एग्रीमेंट के मुताबिक उसमें छेड़छाड़ नहीं कर सकते। इसके साथ ही उनके अधिवक्ता ने आईटी एक्ट की धारा 79 का हवाला देते हुए कहा कि फ्लिपकार्ट को मध्यस्थ (इंटरमीडियरी) होने के कारण छूट प्राप्त है, इसलिए उनके खिलाफ दर्ज मामला उचित नहीं है।
सरकार का पक्ष:–
शासन की ओर से पेश हुए अधिवक्ता ने कहा कि बिना लाइसेंस प्रतिबंधित सामान की खरीद-बिक्री और डिलीवरी कानूनन अपराध है। वर्ष 2024 में राज्य सरकार ने इस विषय पर ई-कॉमर्स कंपनियों और मोबाइल एप उपयोगकर्ताओं के लिए एडवाइजरी भी जारी की थी, जिसमें स्पष्ट निर्देश दिया गया था कि प्रतिबंधित वस्तुओं की बिक्री या वितरण करने पर संबंधित प्लेटफॉर्म, वेयरहाउस संचालक और डिलीवरी एजेंट जिम्मेदार माने जाएंगे।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह स्पष्ट कर दिया कि ऑनलाइन कारोबार से जुड़े सभी लोगों की जवाबदेही तय होगी। अब न केवल ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म बल्कि उनके डिलीवरी एजेंट और कूरियर ऑपरेटर भी अपराध की स्थिति में जिम्मेदार माने जाएंगे।