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फंड की कमी या सिस्टम की नाकामी? 300 मासूमों का भविष्य अधर में….

मॉडल स्कूल खुद संकट में,आत्मानंद स्कूलों की नर्सरी पर ताला….

300 बच्चों की पढ़ाई पर ब्रेक,पालक पहुंचे कलेक्टर दफ्तर…

कलेक्टर ने कहा- जल्द की जायेगी वैकल्पिक व्यवस्था….

बिलासपुर ।जिले में सरकारी शिक्षा व्यवस्था पर एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। कभी मॉडल स्कूल की पहचान रखने वाले स्वामी आत्मानंद स्कूल आज खुद संकट में नजर आ रहे हैं। जिले के चार आत्मानंद स्कूलों में नर्सरी, केजी और एलकेजी में पढ़ने वाले करीब 300 मासूम बच्चों का भविष्य अधर में लटक गया है। डीएमएफ यानी जिला खनिज संस्थान न्यास से फंड नहीं मिलने के कारण प्रशासन ने नर्सरी कक्षाएं बंद करने का फैसला लिया है, जिसने पालकों की चिंता बढ़ा दी है।

दरअसल बड़ी संख्या में बच्चों के माता-पिता कलेक्टर कार्यालय पहुंचे। आंखों में आंसू और मन में चिंता लिए पालकों ने कलेक्टर के सामने अपनी पीड़ा रखी। पालकों का कहना है कि लॉटरी सिस्टम के जरिए उनके बच्चों का चयन हुआ था और अब शिक्षा सत्र के बीच अचानक नर्सरी बंद करना पूरी तरह गलत है। इससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होगी और आगे एडमिशन में भी बड़ी परेशानी आएगी।बिलासपुर के तिलक नगर, लाल बहादुर शास्त्री, तारबाहर और लाला लाजपत राय स्वामी आत्मानंद स्कूलों में संचालित नर्सरी कक्षाओं को बंद करने का आदेश जारी कर दिया गया है। यह फैसला न सिर्फ चौंकाने वाला है, बल्कि बीच सत्र में लिया गया एकगैर-जिम्मेदार कदम माना जा रहा है। इन स्कूलों में नर्सरी के लिए मात्र छह शिक्षिकाएं कार्यरत हैं, जिनके वेतन के लिए डीएमएफ फंड उपलब्ध नहीं हो पा रहा।
स्वामी आत्मानंद स्कूलों की शुरुआत गरीब और मध्यम वर्ग के बच्चों को निजी स्कूलों जैसी मुफ्त और गुणवत्तापूर्ण अंग्रेजी शिक्षा देने के उद्देश्य से की गई थी। पालकों की मांग पर नर्सरी कक्षाएं शुरू की गई थीं, लेकिन अब वही पालक सबसे ज्यादा परेशान हैं। अधिकांश परिवार निजी स्कूलों की भारी फीस वहन करने में असमर्थ हैं।प्रशासन के अनुसार 8 फरवरी से नर्सरी कक्षाएं बंद कर दी जाएंगी। इस सत्र में अस्थायी रूप से सरकारी प्राइमरी स्कूलों की शिक्षिकाएं बच्चों को पढ़ाएंगी, जबकि अगले सत्र से नर्सरी पूरी तरह बंद कर दी जाएगी। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या फंड की कमी के नाम पर मासूम बच्चों की पढ़ाई कुर्बान कर दी जाएगी? और क्या मॉडल स्कूलों की पहचान सिर्फ कागजों तक सीमित रह जाएगी? जवाब अब शासन और प्रशासन को देना होगा।

वर्जन
इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था बना ली गई है। इस सत्र तक स्कूल संचालित रहेंगे।

संजय अग्रवाल
कलेक्टर बिलासपुर

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