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फैक्ट्री में आग लगने पर दो कर्मचारियों की मौत, फैक्ट्री मालिक पर अपराध दर्ज

मित्तल फर्नीचर फैक्ट्री के तारपीन टैंकर में आग लगने से दो मजदूरों की मौत हो गई। पुलिस ने मामले में फैक्ट्री मालिक संजय मित्तल के खिलाफ अपराध दर्ज किया है। जांच के बाद धाराएं भी बढ़ाई जाएंगी।

बिलासपुर।बिलासपुर के औद्योगिक क्षेत्र सिरगिट्टी स्थित मित्तल फर्नीचर कारखाना में 23 दिसंबर की दोपहर लगी आग से जलकर दो लोगों की मौत हो गई। हादसे की जांच कर रही पुलिस ने श्रमिकों के बयान और मौके पर मिले साक्ष्य के आधार पर कारखाना के मालिक संजय मित्तल के खिलाफ लापरवाही का मामला दर्ज कर लिया है। मामले की जांच चल रही है। जांच में मिले तथ्यों के आधार पर और धाराएं बढ़ाई जाएगी। मामला सिरगिट्टी थाना क्षेत्र का है।

तिफरा के शिवा चौक में रहने वाले अभिजीत सूर्यवंशी सिरगिट्टी स्थित मित्तल फर्नीचर कारखाना में काम करते थे। वे 23 दिसंबर को कारखाना में काम करने के लिए गए थे। इसी दौरान कारखाना में करीब 10 हजार लीटर तारपीन तेल का टैंकर आया। श्रमिक टैंकर के तारपीन तेल को प्लास्टिक के टंकियों में खाली कर रहे थे। इसी दौरान टुल्लू पंप के मोटर में शार्टसर्किट से आग लग गई। इस दौरान वहां काम करने वाले मनोज चौहान, दक्ष, रितेश शुक्ला वहां से भाग निकले। भागने का रास्ता नहीं मिलने पर अभिजीत वहीं फंस गया। आग भड़कने पर अभिजीत की मौत हो गई। दूसरे दिन उसका कंकाल मिला। पुलिस ने कंकाल का पीएम कराया। इसके अलावा फैक्ट्री के सुपरवाइजर ऋषभ शुक्ला भी फैक्ट्री से जलते हुए निकले थे। उन्हें कॉलडा नर्सिंग होम ले जाया गया। जहां इलाज के दौरान उनकी भी मौत हो गई।

इसके बाद पुलिस ने वहां काम करने वाले श्रमिकों का बयान दर्ज किया। बयान के बाद पुलिस ने कारखाना मालिक संजय मित्तल के खिलाफ बीएनएस की धारा 106(1), 125(ए) के तहत मामला दर्ज कर लिया है।

श्रम विभाग की जांच जारी, आगे होगी कार्रवाई:–

श्रम विभाग के औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग की ओर से पूरे मामले की जांच की जा रही है। निरीक्षक विजय सोनी ने मौके का निरीक्षण किया है। विभाग की रिपोर्ट के आधार प्रशासन की ओर से आगे की कार्रवाई की जाएगी। अब तक की जांच में पता चला है कि कारखाना में एसएस केमिकल कंपनी का केमिकल भी डंप किया जा रहा था।

लापरवाही आई सामने:–

मित्तल फैक्ट्री फर्नीचर में बिना अनुमति तारपीन टैंकर बनाया गया था। इसमें 10000 लीटर तारपीन डंप किया गया था। यहां मोटर से निकली चिंगारी टैंकर तक पहुंच गई। जिससे टैंकर में आग भड़क उठीं। खास बात यह है कि औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा, पर्यावरण और स्थानीय प्रशासन ने इस सब को नजरअंदाज किया। जिसके चलते यह हादसा हुआ।

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