32 लाख की रिश्वतखोरी पर सीबीआई ने 4 लोगो को किया गिरफतार
कॉन्ट्रैक्ट दिलाने रेलवे सीई और कंपनी के बीच डील
सीई ने रिश्वत लेकर ठेकेदार झाझरिया को दिलाया 395 करोड़ का ठेका
बिलासपुर। सीबीआई ने 32 लाख रुपए की रिश्वत लेने के आरोप में बिलासपुर रेलवे जोन के चीफ इंजीनियर को रिश्वत के मामले में पकड़ा है। इस मामले में कंपनी के डायरेक्टर सुशील झाझरिया भी पकड़े गए हैं। आरोप लगा है कि, झाझरिया कंपनी और सीई के बीच कॉन्ट्रैक्ट को लेकर ये डील हुई थी।जिसकी शिकायत सीबीआई तक पहुंची और उसके बाद उन्होंने कार्यवाही की। सीबीआई की इस कार्रवाई ने हड़कंप मचा दिया है और रेलवे विभाग में अफसरों के दिल की धड़कने तेज हो गई है।
सूत्र बताते है कि एसईसीआर
बिलासपुर रेलवे जोन में एक हजार करोड़ से अधिक का काम चल रहा है। जिसमें से ज्यादातर काम केवल झाझरिया निर्माण कंपनी को ही दिया गया है। इसमें लगभग 395 करोड़ का काम कंपनी कर रही है। आरोप लगा है कि, निर्माण कंपनी को काम दिलाने में जोन के कई बड़े अफसर भी शामिल हैं वो भी सीबीआईI के निशाने पर हैं। रिश्वत कांड में ऐसे अफसर भी जांच के दायरे में हैं।
सीबीआई के सूत्रों ने बताया कि,बिलासपुर रेलवे जोन में टेंडर में बड़े पैमाने पर घोटाला चल रहा है। इसकी जानकारी हाथ लगने पर सीबीआई अफसरों ने पहले झाझरिया कंस्ट्रक्शन लिमिटेड को दिए गए रेलवे के प्रोजेक्ट्स की जानकारी जुटाई।
तब पता चला कि ज्यादातर बड़े निर्माण कार्यों का ठेका इसी कंपनी को दिया गया है।हाल ही में करोड़ों रुपए के प्रोजेक्ट इस कंपनी को दिए गए हैं। जिस पर घोटाले की आशंका होने पर सीबीआई ने पुख्ता जानकारी जुटाकर छापेमारी की।
रेलवे जोन की बड़ी कंपनी है झाझरिया कंपनी
दरअसल,बिलासपुर रेलवे स्टेशन को अमृत भारत स्टेशन के तहत विश्वस्तरीय बनाने की योजना है। इसमें 395 करोड़ से अधिक की लागत से रि-डेवलपमेंट का काम जारी है। यह ठेका झाझरिया निर्माण लिमिटेड को मिला है। ठेकेदार सुनील झांझरिया ही इस कंपनी के प्रमुख हैं। कंपनी रेलवे जोन में सबसे बड़ी मानी जाती है,जो रेलवे लाइन बिछाने,ब्रिज निर्माण और अन्य संरचनात्मक कामों में सक्रिय है।
झाझरिया कंपनी को ठेका दिलाने के एवज में 32 लाख रुपए की रिश्वत मांगी
सूत्रों ने बताया कि, रिश्वत का सौदा तय होने से पहले ही सीबीआई उनके पीछे लगी थी। 21 अप्रैल को चीफ इंजीनियर विशाल आनंद ने ठेकेदार सुशील झाझरिया से उसकी कंपनी के ऑफिस में मुलाकात की। पता चला कि, विशाल ने झाझरिया कंपनी को ठेका दिलाने के एवज में 32 लाख रुपए की रिश्वत मांगी।
जैसे ही पता चला कि उनकी मीटिग 21 अप्रैल को हुई है और 25 अप्रैल यानी शुक्रवार को पैसों की डिलीवरी होने वाली है। तब से सीबीआई झाझरिया कंपनी के कर्मचारियों पर नजर रखी हुई थी। पहले सीबीआई को बिलासपुर में पैसे के लेनदेन होने की जानकारी मिली थी।
सीई ने भाई को बोला,32 लाख रुपए को उसके पैतृक घर रांची में छोड़ना होगा
इस बीच सीबीआई को पता चला कि, चीफ इंजीनियर ने सौदा तय करने के बाद ये शर्त रखी कि, 32 लाख रुपए को उसके पैतृक घर रांची में छोड़ना होगा। कंपनी इस पर भी तैयार हो गई। इधर, आरोपी इंजीनियर ने अपने भाई कुणाल आनंद को पहले ही बता दिया था कि एक व्यक्ति पैसे लेकर आएगा।
शुक्रवार को सीबीआई को पता चला कि, कर्मचारी पैसे लेकर रांची गया है,तब आनन-फानन में सीबीआई की टीम कर्मचारी का पीछा करते हुए रांची पहुंच गई। कर्मचारी ने जैसे ही कुणाल को पैसे दिए, सीबीआई ने उसे रंगे हाथो दबोच लिया। इसके बाद बिलासपुर में छापेमारी कर दस्तावेज खंगाले गए।
पहले रेलवे ऑफिस, फिर ठेकेदार के दफ्तर में दी दबिश
सीबीआई की टीम ने रेलवे से जुड़े निर्माण कामों में शामिल विभागों में छापेमारी की। इस दौरान टीम वहां भी गई, जहां चीफ इंजीनियर विशाल आनंद का ऑफिस है। वहां से जरूरी दस्तावेज जब्त किए गए। जिसमें झाझरिया कंस्ट्रक्शन लिमिटेड को काम दिया गया है। डेटा कलेक्ट करने के बाद टीम झाझरिया कंस्ट्रक्शन लिमिटेड के दफ्तर पहुंची।
दफ्तर से जब्त किए दस्तावेज,कंपनी डॉयरेक्टर गिरफ्तार
कार्रवाई रेलवे प्रोजेक्ट्स में संभावित अनियमितताओं की जांच के तहत की गई है।अधिकारियों ने कंपनी के मैनेजिग डायरेक्टर के दफ्तर में दस्तावेजों की जांच की। महत्वपूर्ण फाइलें और डिजिटल डेटा जब्त किया है। कंपनी के डॉयरेक्टर को गिरफ्तार कर पूछताछ की गई।
5 साल पहले भी सीबीआई ने दी थी दबिश
झाझरिया निर्माण लिमिटेड कंपनी ने रेलवे में ठेका लेकर काफी तेजी से अपना कारोबार फैलाया। इस कंपनी का कारोबार दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल समेत 8 राज्यों में करोड़ों रुपए का कारोबार है। करीब 5 साल पहले भी सीबीआई ने इस कंपनी के दफ्तर में छापेमारी की थी।
जानिए आखिर आगे क्या होगा
अब सीबीआई की टीम आरोपी चीफ इंजीनियर विशाल आनंद की संपत्ति की जानकारी जुटा रही है। बताया जा रहा है कि दो अलग-अलग पदों पर रहते हुए आरोपी अफसर पर पहले भी अनियमितता बरतने के आरोप लगे हैं।
सूत्र यह भी बता रहे है कि,आरोपी चीफ इंजीनियर विशाल आनंद रांची डिवीजन में 3 साल तक इंजीनियरिग विभाग में सीनियर डीईएन (को-ऑर्डिनेशन) के पद पर पदस्थ थे। इस दौरान उन पर विभागीय प्रक्रियाओं में गड़बड़ी के आरोप लगे थे।
कार्यकाल पूरा होने के बाद वे रांची में ही आरबीएनएल में दो साल तक पदस्थ रहे, यहां भी इसी तरह के आरोप लगाए गए। सूत्रों के अनुसार, आने वाले दिनों में अन्य ठिकानों पर भी कार्रवाई हो सकती है।
सीबीआई ने चीफ इंजीनियर और झाझरिया के ठेकेदार समेत आरोपियों को किया गिरफ्तार
विशाल आनंद चीफ इंजीनियर (आईआरएसइ-2000 बैच) दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे,बिलासपुर।
सुशील झाझरिया (उर्फ सुशील कुमार अग्रवाल), प्रबंधक निदेशक, मेसर्स झाझरिया निर्माण लिमिटेड कंपनी बिलासपुर।
कुणाल आनंद, निवासी रांची, बिहालर (चीफ इंजीनियर का भाई)।
मनोज पाठक, मेसर्स, कर्मचारी, झाझरिया निर्माण लिमिटेड बिलासपुर। (रिश्वत देने वाला)